अन्तर्राष्ट्रीय

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श्रीलंकाई खुफिया विभाग को मिली सूचना, बौद्ध मंदिरों को निशाना बना सकती हैं महिला हमलावर

29 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोलंबो। ईस्टर के मौके पर हुए हमलों के बाद की गई छापेमारी में एक मकान से बरामद सफेद कपड़ों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि महिला हमलावर शायद बौद्ध मंदिरों को निशाना बनाने की योजना बना रही हैं।‘डेली मिरर’ में सोमवार को प्रकाशित खबर के मुताबिक, ईस्टर के दिन हमले के बाद पूर्वी प्रांत के संतामुरुतु में छापेमारी के दौरान एक मकान से पुलिस को स्कर्ट और सफेद ब्लाउज मिले थे। इसके बाद श्रीलंकाई खुफिया एजेंसी को जानकारी मिली कि स्थानीय आतंकवादी संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) की महिला हमलावर संभवत: बौद्ध अनुयायी बनकर मंदिरों पर हमले की योजना बना रही हैं।



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श्रीलंका ब्लास्ट में नहीं मरे 359 लोग, स्वास्थ्य मंत्रालय ने मृतकों की संख्या में किया संशोधन

26 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोलंबो। श्रीलंका ने ईस्टर के दिन हुए विस्फोटों में मृतकों की संख्या में बृहस्पतिवार को संशोधन किया। अब यह संख्या करीब 253 बताई गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। प्रशासन ने इससे पहले बताया था कि नौ आत्मघाती हमलावरों ने इन हमलों को अंजाम दिया था, जिसमें 359 लोगों की मौतें हुई और 500 से अधिक घायल हो गए। ऐसा संदेह किया जा रहा है कि इस हमले में स्थानीय इस्लामी चरमपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) का हाथ है। हालांकि, अब स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक डॉक्टर अनिल जयसिंघे ने बताया कि पहले वाली संख्या गिनती में गलती होने की वजह से बताई गई थी। उन्होंने कहा कि इस हमले में मृतकों की संख्या लगभग 253 होगी, न कि मीडिया में आई खबरों के अनुसार 359 है। जयसिंघे ने बताया कि कम से कम 485 घायल लोगों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। इसी बीच, विदेश मंत्रालय ने बताया कि 11 भारतीय लोगों समेत 40 विदेशी नागरिकों की मौत इस हमले में हुई।



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श्रीलंकाई विस्फोटों को सात आत्मघाती हमलावरों ने दिया था अंजाम

23 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोलंबो। श्रीलंका में रविवार को ईस्टर के मौके पर किए गए सिलसिलेवार बम धमाकों को सात आत्मघाती हमलावरों ने अंजाम दिया था। सरकारी विश्लेषक विभाग ने सोमवार को यह दावा किया। ‘संडे टाइम्स’ ने सरकारी विश्लेषक विभाग के हवाले से कहा की शांगरी ला, सिनामोन ग्रैंड, किंग्सबरी होटलों और सेंट एंथनी गिरजाघर, पश्चिमी तटीय शहर नेगोम्बो के सेंट सेबेस्टियन गिरजाघर और बट्टिकलोवा के जियोन गिरजाघर में किए गए विस्फोट आत्मघाती हमले थे।इन छह हमलों के कुछ घंटों बाद कोलंबो में एक और विस्फोट हुआ था। वहीं पुलिस दल के कोलंबो उत्तरी उपगर ओरुगोदावट्टा में एक घर पर छापे मारने पहुंचने पर एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया था। इस आठवें धमाके में तीन पुलिस कर्मी भी मारे गए थे। विभाग ने कहा की कुल सात आत्मघाती हमलावरों ने इन हमलों को अंजाम दिया।

गौरतलब है कि श्रीलंका में रविवार को गिरजाघरों तथा पांच सितारा होटलों में ईस्टर के मौके पर आत्मघाती हमलों सहित आठ बम धमाकों में कम से कम 290 लोगों की जान चली गई हैं और करीब 500 लोग घायल हुए हैं। हमलों की अभी तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस ने इस सिलसिले में 24 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। इस बीच आई मीडिया खबरों के अनुसार एनटीजे (नेशनल तोहिद जमात) के अहम गिरजाघरों पर फिदायीन हमले करने की योजना बनाने की जानकारी मिली थी। एनटीजे श्रीलंका का कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन है।



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तुर्की को अमेरिका से ईरान प्रतिबंधों में और छूट मिलने की उम्मीद

17 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

वॉशिंगटन। तुर्की को कई मुद्दों पर अमेरिका के साथ मतभेद होने के बावजूद ईरान से तेल खरीद के लिए मिली अमेरिकी छूट में और ढील मिलने की उम्मीद है।तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन के प्रवक्ता इब्राहिम कालिन ने बताया कि तुर्की के वित्त मंत्री बेरत अल्बायरक ने सोमवार को व्हाइट हाउस में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात की और दोनों ने रूस से अंकारा के प्रमुख हथियारों की खरीद सहित कई मतभेदों पर चर्चा की।कालिन ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से कहा, ‘‘ पूर्ण रूप से यह एक सकारात्मक बैठक रही।’’ उन्होंने कहा कि तुर्की को उम्मीद है कि ट्रम्प प्रशासन पिछले साल सभी देशों से ईरान से तेल खरीदना बंद करने की मांग करने के बाद उसे और छूट प्रदान करेगा। कालिन ने कहा, ‘‘ निश्चित रूप से हम तुर्की को और छूट मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। ’’साथ ही उन्होंने बताया कि अंकारा को इस संबंध में कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है। अमेरिका ने इस संबंध में आठ देशों चीन, यूनान, भारत, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और तुर्की को छह महीने की छूट दी है,जो दो मई को खत्म हो रही है।



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सूडान में सैन्‍य शासन को लेकर US और ब्रिटेन की चिंता बढ़ी, नागरिक शासन के लिए बनाया दबाव

15 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

खार्तुम। संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका, ब्रिटेन और नार्वे ने सूडान में नागरिक शासन की वकालत करते हुए सैन्‍य शासकों से इसकी पहल की अपील की है। तीनों देशों ने संयुक्‍त रूप से वार्ता शुरू करने के लिए यहां के सैन्‍य शासन से आग्रह किया है। तीनों देशों ने कहा है कि सूडान की नई सत्‍तारूढ़ सैन्‍य परिषद ने एक निर्वाचित सरकार को सत्‍ता हस्‍तांरित करने का वादा किया था, लेकिन यहां के नागरिकों ने अभी तक इसकी मांग नहीं की है। अमेरिका की इस प्रतिक्रिया के बाद सूडान के सैन्‍य शासन ने वाशिंगटन में अपने राजदूत मोहम्‍मद अता को बर्खास्‍त करने का फैसला लिया है। सैन्‍य परिषद के प्रवक्‍ता लेफ्‍िटनेंट जनरल शमशेल्‍डीन कबाशी ने कहा है कि अमेरिका में सूडान के राजदूर अता को बर्खास्‍त किया गया है।

तीनों देशों के दूतावासों ने कहा है कि सूडान के लिए यह संक्रमणकालीन समय है। दूतावासों ने कहा कि सैन्‍य परिषद और अन्‍य सभी पक्षों को देश में नागरिक शासन के बदलाव के लिए वार्ता करने का उचित समय है। तीनों देशों ने कहा कि यह वार्ता विश्‍वसनीय रूप से और तेजी से किया जाना चाहिए।

वार्ता में विरोधी दलों के नेता, राजनीतिक विपक्ष, नागरिक समाज संगठन और महिला संगठनों को हिस्‍सा लेना चाहिए। तीनों देशों ने यह भी जोर दिया कि निरंतर शांतिपूर्ण विरोधी प्रदर्शन में हिंसा का कोई स्‍थान नहीं होना चाहिए।

दूतावास ने कहा कि व्‍यवस्‍था में बदलाव के लिए एक तय समय में चुनाव कराया जाना चाहिए। इसके साथ राजनीतिक कैदियों की रिहाई पर भी जोर दिया गया। दूतावास ने पूर्व में सेना द्वारा हिंसा की निंदा की है। बता दें कि उमर अल बशीर ने 30 वर्षों तक सूडान पर शासन किया। गुरुवार को मौजूदा सत्‍ता के विरोध एवं प्रदर्शन के बीच सेना ने सूडान की सत्‍ता अपने हाथ में ले लिया था।



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अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के लिए अर्थव्यवस्था, राष्ट्र सुरक्षा शीर्ष प्राथमिकता शामिल

14 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

न्यूयॉर्क। भारत में कई हफ्तों तक चलने वाले और अहम माने जाने वाले आम चुनावों की शुरुआत के साथ सतत आर्थिक विकास, राष्ट्र सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों का संरक्षण जैसे मुद्दे अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों के लिए चुनाव की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। भारतीय-अमेरिकी सामुदायिक समूह ने हाल ही में न्यूयॉर्क में एक चुनावी अभियान चला कर 2019 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की थी। भारतीय प्रवासियों में मोदी समर्थकों ने ‘अबकी बार 400 पार’ के नारे के साथ भरोसा जताया कि मोदी दूसरी बार सत्ता में लौटेंगे। अमेरिकी भारत सार्वजनिक मामलों की समिति के अध्यक्ष जगदीश सेवहानी ने कहा कि 2019 के आम चुनाव भारत के भविष्य के लिहाज से अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा की राष्ट्र सुरक्षा भाजपा की शीर्ष प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि मोदी का अगला कार्यकाल देश के सतत आर्थिक विकास के साथ-साथ देश के विकास को सुनिश्चित करेगा। वहीं वकालती समूह ‘कोअलिशन फॉर द डिफेंस ऑफ द कॉन्स्टीट्यूशन एंड डेमोक्रेसी’ ने शहर में ‘लोकतंत्र बचाओ’ रैली का आयोजन किया। इस रैली के सह-प्रायोजकों में अलायंस फॉर अ डेमोक्रेटिक एंड सेक्युलर साउथ एशिया, कोअलिशन फॉर अ डेमोक्रेटिक इंडिया, दलित सोलिडेरिटी फोरम (डीएसएफ) और अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल शामिल थे। गठबंधन ने एक बयान में कहा की भाजपा सरकार व्यवस्था में लगी जंग और संस्थानों एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार है। गठबंधन ने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की भी अपील की।



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Lok Sabha Election 2019 में इमरान खान भी चाहते हैं पीएम मोदी की जीत

10 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

इस्‍लामाबाद, पीटीआइ। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को कहा कि यदि नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाली भारतीय जनता पार्टी 2019 के आम चुनाव में जीत दर्ज करती है, तो दोनों देशों के बीच शांतिवार्ता के लिए यह बेहतरीन मौका हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि यदि मोदी दोबारा भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं तो कश्‍मीर मुद्दा सुलझाने का यह सुनहरा मौका होगा। खान ने यह बात एक साक्षात्‍कार के दौरान विदेश पत्रकारों के एक समूह से कही। उन्‍होंने कहा कि अगर भारत में अगली सरकार कांग्रेस की बनती है तो वह पाकिस्‍तान के साथ बेघड़क समझौता करने में भयभीत हो सकती है। यह बात उन्‍होंने विदेशी मीडिया के समक्ष कही।

पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत में गुरुवार से शुरू हो रहे आम चुनाव में यदि भारतीय जनता पार्टी की जीत हासिल होती है तो यह पाकिस्‍तान के हित में होगा। उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों के बीच शांतिवार्ता को लेकर यह बेहतर मौका है। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में कश्‍मीर में किसी तरह का समझौता हो सकता है। इस मौके पर पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्‍तान में सक्रिय सभी आतंकवादी संगठनों को खत्‍म करने के लिए संकल्पित है। उन्‍होंने कहा कि इस अभियान में पाक सरकार सेना को पूरा सपोर्ट करेगी। हालांकि, इमरान के इस अटपटे बयान पर भारत की कोई प्रतिक्रया नहीं आई है। सत्‍ताघारी भाजपा और कांग्रेस दोनों मौन हैं।

गौरतलब है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद से पाकिस्‍तान सरकार लगातार ऐसे अटपटे बयान दे रही है, जिससे पाक जनता का ध्‍यान यहां की ज्‍वलंत समस्‍याओं की ओर न जाए। इमरान खान के इस बयान को भी इसी कड़ी से जोड़ कर देखा जा रहा है। पड़ोसी मुल्‍क की यह बौखलाहट बेवजह नहीं है। आर्थिक तंगी झेेल रही इमरान खान की सरकार को तब बड़ा झटका लगा जब पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत की वायु सेना ने पाक में घुसकर आतंकवादी ठिकानों को ध्‍वस्‍त किया। भारत के इस कदम का पूरी दुनिया ने समर्थन किया।

अमेरिका ने भारत के इस निर्णय को आत्‍मरक्षा के लिए उठाया गया उचित कदम बताया और इसे जायज ठहराया। पाकिस्‍तान की पूरी दुनिया में निंदा हुई। उस पर पाकिस्‍तान में सक्रिय आतंकवादी कैंपों को नष्‍ट करने का दबाव बढ़ा। इस बौखलाहट में पाकिस्‍तानी हुकूूमत इस प्रकार के बयानों का सहारा ले रही है। हाल में पाकिस्‍तान के विदेश मंंत्री की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि भारत एक बार फ‍िर उस पर हमला कर सकता है। इतना ही नहीं भारत के उप उच्‍चायुक्‍त को बुलाकर उन्‍हें आगाह किया गया। इसी बयान में यह भी कहा गया था कि कश्‍मीर में एक और आतंकवादी घटना हो सकती है। बुधवार को विदेशी मीडिया के सामने प्रधानंत्री इमराना का यह बयान भी गैर जिम्‍मेदाराना है।



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अमेरिका ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकवादी संगठन घोषित करता है: ट्रंप

09 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि अमेरिका ईरान के विशिष्ट सैन्य बल ‘रेवल्यूशनरी गार्ड कार्प’ को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर रहा है। ट्रंप ने एक बयान में कहा कि यह अप्रत्याशित कदम यह याद दिलाता है कि ईरान न सिर्फ आतंकवाद प्रायोजित करने वाला देश है बल्कि आईआरजीसी आंतकवाद को धन मुहैया कराने और उसे बढ़ावा देने में सक्रियता से लगा है।

विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने ट्रंप की घोषणा के बाद सभी बैंकों और व्यापारियों को रेवल्यूशनरी गार्ड्स के साथ किसी भी प्रकार का संपर्क रखने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

पोम्पिओ ने कहा, ईरान के नेता क्रांतिकारी नहीं रैकेटियर हैं। उन्होंने कहा, विश्वभर के व्यापार और बैंकों की अब यह स्पष्ट जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि जिन कंपनियों के साथ वे वित्तीय लेनदेन कर रहे हैं किसी भी तरह से आईआरजीसी के साथ जुड़ी नहीं हों। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह नया कदम गार्ड्स के साथ किसी भी प्रकार के संपर्क को अपराध के दायरे में लाएगा।



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भगोड़े विजय माल्या को ब्रिटेन से भारत लाए जाने की उम्मीद बढ़ी, प्रत्यर्पण के खिलाफ अर्जी खारिज

08 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

लंदन। भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या (Vijay Mallya) को ब्रिटेन की कोर्ट ने झटका दिया है। अदालत ने प्रत्यर्पण के खिलाफ अर्जी को खारिज कर दिया गया है। इस लिहाज से अब माल्या के भारत आने की संभावना बढ़ गई है। इससे पहले भारतीय एजेंसियां लगातार इस मामले पर ब्रिटेन की सरकार पर जबरदस्त दबाव बनाए हुई थीं। सीबीआइ और ईडी ने अदालत में उसके खिलाफ सभी सबूत मजबूती से रखे थे

इससे पहले विजय माल्या ने पब्लिक सेक्टर बैंक पर निशाना साधा था। फरार शराब कारोबारी विजय माल्या ने ट्विट कर लिखा था कि, ‘अभी तक मेरी ब्रांडिंग ऐसे चोर की बना दी है जो पीएसयू बैंकों का पैसा लेकर भाग गया। बैंकों ने अपने पैसे की रिकवरी आज और पहले भी काफी कर ली है। ये सभी मेरे सेटलमेंट प्रस्ताव में भी शामिल था। आप चाहें कुछ भी करें लेकिन आपको गलत ही कहा जाएगा। मेरे साथ ऐसा ही बर्ताव हुआ है।’

बीते फरवरी में ब्रिटेन के गृह मंत्री ने शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पित किये जाने का आदेश दिया था। इसके बाद से ही भारतीय एजेंसियां प्रत्‍यर्पण के लिए प्रयास कर रही हैं। माल्या ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत गठित विशेष अदालत के फैसले को पिछले महीने चुनौती दी थी। पांच जनवरी के आदेश में विशेष अदालत ने एफईओ एक्ट के तहत माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था।

कानून के तहत अगर किसी व्यक्ति को भगोड़ा घोषित कर दिया जाता है तो अभियोजन एजेंसी (प्रवर्तन निदेशालय) उसकी संपत्तियों को जब्त कर सकती है। इससे पहले माल्या के वकील अमित देसाई ने सुनवाई को कहा था कि संपत्तियों को जब्त करना बेहद कठोर कार्रवाई है।

यह समय बैंकों और कर्जदाताओं को राहत पहुंचाने का है। माल्या नहीं चाहते कि उनकी संपत्तियों को लौटाया जाए। उनका सिर्फ इतना कहना है कि सरकार द्वारा संपत्तियों को जब्त करने से बैंकों और कर्जदाताओं की समस्याओं का निराकरण नहीं होगा। बता दें कि विजय माल्‍या पर देश के विभिन्‍न बैंकों का लगभग साढ़े नौ हजार रुपये से अधिक का कर्ज है।



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जापान के हायाबुसा यान ने रयुगु एस्टेरॉयड पर कराया ब्लास्ट, जीवन की उत्पत्ति के रहस्य से उठेगा पर्दा

06 Apr 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

टोक्यो। पृथ्वी के समीप मौजूद एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) ‘रयुगु’ की जांच के लिए भेजे गए हायाबुसा 2 यान की मदद से वहां की सतह पर विस्फोट कराया गया है। यह उपलब्धि हासिल करने के बाद जापान की स्पेस एजेंसी (जेएएक्सए) ने कहा कि विस्फोट से बने गड्ढे की जांच में सौर मंडल के विकास से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठ सकेगा। जेएएक्सए ने 2014 में इस मिशन को लांच किया था। पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के रहस्यों का पता लगाने के लिए भेजा गया यह मिशन रयुगु से नमूने इकट्ठा कर 2020 में लौट आएगा।

हायाबुसा 2 के कैमरे से ली गई तस्वीरों से पता चलता है कि विस्फोटक डिवाइस सही जगह पर स्थापित की गई थी, लेकिन विस्फोट हो जाने का कोई सुबूत अभी नहीं मिला है। हालांकि, जापानी स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों ने इसका भरोसा जताया है। उन्होंने यह भी कहा कि विस्फोट कराना काफी जोखिम भरा था, लेकिन इसमें पूरी तरह कामयाबी मिली। यह इसलिए कराया गया है ताकि कुछ ऐसे तत्व रयुगु की सतह से बाहर निकलें जिनके अध्ययन से सौर मंडल के विकास के शुरुआती चरणों का पता चल सके। ऐसा अनुमान है कि 4.6 अरब वर्ष पहले इस एस्टेरॉयड पर जैविक पदार्थ व पानी बहुतायत में उपलब्ध थे।

10 मीटर व्यास का क्रेटर बनने की है उम्मीद : जेएएक्सए के वैज्ञानिकों ने कहा कि रयुगु की सतह यदि रेतीली हुई तो विस्फोट से 10 मीटर का गड्ढा बन सकता है। यदि वहां की जमीन पथरीली है तब केवल तीन मीटर व्यास का ही गड्ढा ही बन पाया होगा।

हायाबुसा 2 ने रयुगु की सतह से 500 मीटर ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कोण की आकृति वाला ‘स्मॉल कैरी ऑन इम्पैक्टर’ डिवाइस रिलीज कर दिया था। सतह पर पहुंचने के 40 मिनट बाद यह डिवाइस ब्लास्ट हुआ। इम्पैक्टर रिलीज करने बाद हायाबुसा 2 तुरंत वहां से हट गया था ताकि विस्फोट से टुकड़े से उसे नुकसान ना हो।



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