राजनीति

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कर्नाटक के सियासी घमासान के बीच कुमारस्वामी बोले, मैं इस्तीफा क्यों दूं?

11 Jul 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

बेंगलुरु। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस- जद (एस) गठबंधन 16 विधायकों के इस्तीफे के बाद सरकार पर खतरे के बादल मंडराने के बावजूद मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी इस्तीफा देने को तैयार नहीं है। कुमारस्वामी ने उनके इस्तीफे की तमाम अटकलों को खारिज करते हुए पत्रकारों से कहा, ‘‘ मैं इस्तीफा क्यों दूं? मुझे इस्तीफा देने की क्या जरूरत है?’’ उन्होंने 2009-10 के उस वाकये की याद दिलायी, जब कुछ मंत्रियों सहित 18 विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा का "विरोध" किया था, लेकिन उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया था।

कांग्रेस के दो और विधायकों के बुधवार को इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री ने गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से भी बातचीत की। अभी तक 16 विधायक इस्तीफे सौंप चुके हैं। अगर बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाते हैं तो सत्तारूढ़ गठबंधन बहुमत गंवा सकता है। 224 सदस्यीय विधानसभा में अध्यक्ष को छोड़कर गठबंधन विधायकों की कुल संख्या 116 (कांग्रेस-78, जद(एस)-37 और बसपा-1) है।



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इस्तीफा देने की परंपरा तो राहुल ने शुरू की, फिर भाजपा पर आरोप क्यों? : राजनाथ

08 Jul 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कर्नाटक मामले को लेकर लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमारी पार्टी ने कभी भी हॉर्स ट्रेडिंग नहीं की है। राजनाथ नें कांग्रेस और राहुल पर चुटकी लेते हुए कहा कि इस्तीफा देने की परंपरा को राहुल गांधी ने शुरू किया है। ऐसे में कांग्रेस से अगर कोई इस्तीफा देता है तो उसमें भाजपा को घसीटना गलत है। राजनाथ ने कहा कि हम संसदीय लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस्तीफे देने की प्रवृत्ति कांग्रेस में राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई थी, यह हमारे द्वारा शुरू नहीं किया गया था। उन्होंने खुद लोगों से इस्तीफे जमा करने के लिए कहा, यहां तक ​​कि वरिष्ठ नेता भी इस्तीफे सौंप रहे हैं।



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राहुल के इस्तीफे पर कर्ण सिंह ने कही बड़ी बात, पार्टी को भी दी सलाह

08 Jul 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि मैं राहुल गांधी के इस्तीफे से सहमत हूं पर कांग्रेस के अंदर जो भ्रम और भटकाव देखने को मिल रहा है वह व्यथित करने वाला है। उन्होंने कहा कि पद छोड़ने के राहुल गांधी के साहसिक फैसले का सम्मान करने की बजाए, एक महीने का वक्त उनसे इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध करने में बर्बाद किया गया।

कर्ण सिंह ने मांग कि की बिना किसी देरी के, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कार्य समिति की बैठक बुलाई जाए और आवश्यक निर्णय लिए जाएं। बता दें कि लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए CWC की बैठक बुलाई जानी है।



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‘इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने के बाद भी न तो हमारी चाल बदली है न ही चरित्र बदला है: राजनाथ सिंह

07 Jul 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस में अध्यक्ष पद के मामले में चुटकी लेते हुए शनिवार को यहां कहा कि ‘पता नहीं कांग्रेस का अध्यक्ष कौन है, कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा भी या नहीं।’ इसके साथ ही भारतीय वायुसेना द्वारा सीमापार आतंकी ठिकानों पर हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने कभी पाकिस्तान की संप्रभुता पर चोट पहुंचाने की कोशिश नहीं की। भाजपा के देशव्यापी सदस्यता अभियान की शुरुआत के लिए यहां आए राजनाथ सिंह ने पार्टी के कार्यक्रम में कहा, ‘जेपी नड्डा को भारतीय जनता पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करके हम लोगों ने अपनी सांगठनिक गतिविधियां भी प्रारंभ कर दी हैं... हमने तो अपनी गतिविधियां शुरू कर दी हैं लेकिन जहां तक कांग्रेस का सवाल है ... पता ही नहीं है कि कांग्रेस का अध्यक्ष कौन है।’ उन्होंने कहा,‘....कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा भी या नहीं कह नहीं सकते। अभी तक कांग्रेस को अपने अध्यक्ष की तलाश है कि अध्यक्ष कौन बनेगा। यह स्थिति है।’

सिंह ने कहा कि दुनिया ने इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया है कि भारत अब कमजोर देश नहीं रहा बल्कि वह दुनिया का ताकतवर देश बन चुका है। राजनाथ ने कहा, ‘प्राचीन इतिहास को उठाकर देख लें कि दुनिया के किसी देश पर हमने आक्रमण नहीं किया है और दुनिया के किसी देश की एक ईंच जमीन पर हमने कभी कब्जा नहीं किया है यह है भारत का चरित्र।’ उन्होंने कहा, ‘हमने दुनिया के किसी देश की संप्रभुता पर प्रश्न चिन्ह लगाने की कोशिश नहीं की। आतंकवाद का सफाया करना तो हमारी सरकार का संकल्प है हम इस काम को करेंगे ही।’ भारतीय वायुसेना द्वारा सीमापार आतंकी ठिकानों पर हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘जब हमारे सैनिक वहां गए तो पूरी सावधानी बरती कि आतंकवादी ठिकानों और वहां प्रशिक्षण ले रहे आतंकवादियों का सफाया हो ... लेकिन पाकिस्तान की सेना पर कोई आक्रमण इन लोगों ने नहीं किया। हमने वहां की पाकिस्तान की संप्रभुता पर चोट पहुंचाने की कोशिश नहीं की। यह जो काम किया हमने भारत के चरित्र के अनुरूप ही किया।’

लोकसभा चुनावों में भाजपा व राजग को मिले भारी बहुमत का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि, ‘इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करने के बाद भी न तो हमारी चाल बदली है न ही चरित्र बदला है।’ इस अवसर पर पार्टी के सांसद राज्यवर्धन राठौड़, रामचरण बोहरा,विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया व उपनेता राजेंद्र राठौड़ सहित पार्टी के विधायक व अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।



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ब्रीफकेस में बजट लाने की परंपरा टूटी, निर्मला के हाथों में नजर आया लाल रंग का फोल्डर

05 Jul 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर नरमी और मानसून की चिंता के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राजग सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट सुबह 11 बजे पेश करेंगी। सुबह करीब 8 बजकर 40 मिनट पर वित्त मंत्री और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर वित्त मंत्रालय पहुंचे। जहां पर उनके हाथों में पारंपरिक बजट ब्रीफकेस की बजाए एक लाल रंग का फोल्डर नजर आया, जिसमें अशोक स्तंभ बना हुआ था।घर से निकलते से पहले अनुराग ठाकुर ने बजरंग बली की पूजा अर्चना की और फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की गाड़ी में बैठकर मंत्रालय चले गए। मंत्रालय से उन्होंने लाल रंग का फोल्डर लिया जिसमें बजट के कागजात मौजूद थे और फिर राष्ट्रपति भवन की तरफ रवाना हो गए। मिली जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वित्त मंत्री को बजट 2019 पेश करने की अनुमति प्रदान कर दी है। जिसके बाद अब वह कैबिनेट की मंजूरी लेने के लिए पहुंची हैं।



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एक समय आएगा जब कश्मीर के मंदिरों में पूजा करते दिखेंगे कश्मीरी पंडित: अमित शाह

01 Jul 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

लोकसभा के बाद आज राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक और राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव पर राज्यसभा में कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे कोई भी भारत से अलग नहीं कर सकता है। गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार की नीति आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की, सरकार जम्मू कश्मीर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है। शाह ने विपक्ष पर हमलसला करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र सिर्फ तीन परिवारों तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों, सूफी परंपराओं को कश्मीर से बाहर किसने किया, क्या वे कश्मीरी परंपरा का हिस्सा नहीं थे? शाह ने कहा कि एक समय ऐसा आएगा जब कश्मीर में मंदिर में पूजा करते कश्मीरी पंडित दिखेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन के दौरान हमने स्कूल खुलवाए, रसोई गैस मुहैया करायी, शौचालयों का निर्माण कराया, बिजली उपलब्ध करायी है। उन्होंने कहा कि हमारा रूख साफ है, जो देश को तोड़ने की बात करेंगे, हम उसे उसी की भाषा में जवाब देंगे। शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में 70 साल से करीब 40 हजार लोग घर में बैठे थे जो पंच-सरपंच चुने जाने का रास्ता देख रहे थे। क्यों अब तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव नहीं कराये गये, और फिर जम्हूरियत की बात करते हैं। मोदी सरकार ने जम्हूरियत को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने सपा नेता राम गोपल यादव को याद दिलाते हुए कहा कि कश्मीर विवादित है तो मैं बताना चाहूंगा कि न कश्मीर विवादित है, न POK कश्मीर विवादित है ये सब भारत का अभिन्न अंग हैं।

PDP के साथ गठबंधन पर जवाब देते हुए शाह ने कहा कि मैं सदन के माध्यम से सभी को बताना चाहता हूं कि हम जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन करें, ये हमारा नहीं बल्कि वहां की जनता का फैसला था। तब एक खंडित जनादेश मिला था। मगर जब हमें लगा कि अलगाववाद को बढ़ावा मिल रहा है और पानी सिर के ऊपर जा रहा है तो हमने सरकार से हटने में तनिक भी देर नहीं की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एक बात बतानी चाहिए कि 1949 को जब एक तिहाई कश्मीर पाकिस्तान के कब्जें में था तो आपने सीजफायर क्यों कर दिया। ये सीजफायर न हुआ होता ये झगड़ा ही न होता, ये आतंकवाद ही नहीं होता, करीब 35 हजार जानें नहीं गई होती। इन सबका मूल कारण सीजफायर ही था।



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साध्वी प्राची ने किया नुसरत जहां का बचाव, फतवा जारी करने पर धर्मगुरुओं को सुनाई खरी-खोटी

29 Jun 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के बशीरहाट से तृणमूल सांसद नुसरत जहां के खिलाफ फतवा जारी हुआ है। बता दें कि यह फतवा मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस आधार पर जारी किया है कि उन्होंने एक हिन्दू लड़के के साथ शादी की और साड़ी, सिंदूर और मंगलसूत्र पहनकर संसद पहुंचीं। मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि मुस्लिम लड़कियों को सिर्फ मुस्लिम लड़कों से ही निकाह करना चाहिए। मुस्लिम धर्मगुरुओं की तरफ से यह बयान आया ही था कि नुसरत जहां के बचाव में भाजपा की फायरब्रांड नेता साध्वी प्राची सामने आ गई और उन्होंने मुस्लिम धर्मगुरुओं को जमकर लताड़ा। साध्वी प्राची ने कहा कि अगर कोई मुस्लिम महिला हिंदू व्यक्ति से शादी कर ले और बिंदी लगाए, मंगलसूत्र पहने और बिछुए पहनती है तो मुस्लिम धर्मगुरु उसे हराम बताते हैं। मुझे इन लोगों की बुद्धि पर तरस आता है लेकिन कई मुस्लिम पुरुष हिंदू बेटियों को लव जिहाद के नाम पर फंसाते हैं और उन्हें बुर्का पहनने को कहते हैं, उस वक्त हराम नहीं होता क्या।

इसी के साथ साध्वी प्राची ने तीन तलाक का भी जिक्र किया और कहा कि अगर धर्मगुरुओं को फतवे जारी करने थे तो तीन तलाक के विरोध में जारी करते। लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। उन्होंने किया भी तो नुसरत जहां पर मंगलसूत्र पहनने को लेकर किया। दरअसल नुसरत जहां ने 19 जून को कोलकाता के कारोबारी निखिल जैन से तुर्की में शादी की थी। जिसकी वजह से वह लोकसभा में शुरुआती दिनों में शपथ ग्रहण नहीं कर पाई थीं और बाद में वह हिन्दू रीति-रिवाज के कपड़े पहनकर संसद पहुंचीं और सदस्यता ग्रहण की



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मणिशंकर ने कांग्रेस के अधय्क्ष को लेकर दिया बयान, कहा- ‘गैर गांधी’हो सकता है पार्टी का प्रमुख

23 Jun 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बने रहने की अनिश्चितता के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने रविवार को कहा कि एक ‘गैर गांधी’ पार्टी का प्रमुख हो सकता है लेकिन गांधी परिवार को संगठन के भीतर सक्रिय रहना होगा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का लक्ष्य “गांधी मुक्त कांग्रेस” है ताकि फिर “कांग्रेस मुक्त भारत” का उनका उद्देश्य पूरा हो सके। अय्यर ने कहा कि अगर राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष बने रहते हैं तो यह सबसे अच्छा होगा लेकिन साथ ही राहुल की इच्छाओं का भी सम्मान होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मैं आश्वस्त हूं कि पार्टी का अध्यक्ष कोई नेहरू-गांधी न हो तब भी हमारा अस्तित्वकायम रहेगा बशर्ते नेहरू-गांधी परिवार पार्टी में सक्रिय रहे और ऐसे संकट का समाधान निकालने में मदद करे जहां गंभीर मतभेद उत्पन्न हों।” अय्यर ने कहा कि राहुल ने अध्यक्ष पद के लिए कोई अन्य विकल्प ढूंढने के लिए एक महीने का वक्त दिया है और इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के भीतर बातचीत जारी है जहां पार्टी में ज्यादातर लोग राहुल के पद पर बने रहने के पक्ष में हैं। हालांकि पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मीडिया को अटकलें लगाने की बजाए यह जानने के लिए “अंतिम समय सीमा” का इंतजार करना चाहिए कि क्या कोई विकल्प मिल गया है या राहुल को कांग्रेस अध्यक्ष बने रहने के लिए मना लिया गया है।

अय्यर ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह व्यक्तित्व का मामला है। मैं जानता हूं कि भाजपा का लक्ष्य गांधी मुक्त कांग्रेस और नतीजन कांग्रेस मुक्त भारत है। मेरे विचार में हम उस सोच के जाल में फंसने वाले नहीं हैं कि उन्होंने कुछ ऐसा पता लगा लिया है जिसे खोज पाने में हम असमर्थ हैं।” संगठन के शीर्ष नेतृत्व में फेरबदल की जरूरत को लेकर पूछे गए सवाल पर 78 वर्षीय अय्यर ने कहा, “अगर आप सिर ही कलम कर देंगे तो धड़ फड़फड़ाने लगेगा।” अय्यर ने पार्टी के इतिहास से ऐसे कई उदाहरण पेश किए जब नेहरू-गांधी परिवार से बाहर के लोग पार्टी के अध्यक्ष रहे, यू एन ढेबर से लेकर ब्रह्मानंद रेड्डी तक। उन्होंने कहा कि अब भी इस मॉडल को अपनाया जा सकता है। राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश के बाद उनके अगले कदम को लेकर लग रही अटकलों के बीच बृहस्पतिवार को उन्होंने कहा कि पार्टी फैसला ले कि उनके बाद इस पद को कौन संभालेगा और वह इस पद पर नहीं बने रहेंगे।



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राष्ट्रीय समस्याओं से ध्यान बांटने का प्रयास:मायावती

19 Jun 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर चरेचा के लिए एक बैठक बुलाई है। मोदी ने उन सभी दलों के प्रमुखों को इस बैठक के लिए आमंत्रित किया है जिनका लोकसभा या राज्यसभा में कम से कम एक सदस्य है। सूत्रों कि माने तो इस बैठक में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर सबसे ज्यादा चर्चा होने की संभावना है। इसको लेकर राजनीति तेज हो गई है। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में चुनाव कभी कोई समस्या नहीं हो सकती है और न ही चुनाव को कभी धन के व्यय-अपव्यय से तौलना उचित है। देश में ’एक देश, एक चुनाव’ की बात वास्तव में गरीबी, महंगाई, बेरोजबारी, बढ़ती हिंसा जैसी ज्वलन्त राष्ट्रीय समस्याओं से ध्यान बांटने का प्रयास व छलावा मात्र है।किसी भी लोकतांत्रिक देश में चुनाव कभी कोई समस्या नहीं हो सकती है और न ही चुनाव को कभी धन के व्यय-अपव्यय से तौलना उचित है। देश में ’एक देश, एक चुनाव’ की बात वास्तव में गरीबी, महंगाई, बेरोजबारी, बढ़ती हिंसा जैसी ज्वलन्त राष्ट्रीय समस्याओं से ध्यान बांटने का प्रयास व छलावा मात्र है।

बैलेट पेपर के बजाए ईवीएम के माध्यम से चुनाव की सरकारी जिद से देश के लोकतंत्र व संविधान को असली खतरे का सामना है। ईवीएम के प्रति जनता का विश्वास चिन्ताजनक स्तर तक घट गया है। ऐसे में इस घातक समस्या पर विचार करने हेतु अगर आज की बैठक बुलाई गई होती तो मैं अवश्य ही उसमें शामिल होती।



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राहुल ने शुरू की संसद में नई पारी, बोले- संविधान के प्रति रखूंगा सच्ची श्रद्धा और निष्ठा

17 Jun 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। केरल के वायनाड से निर्वाचित हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को लोकसभा की सदस्यता की शपथ ली। उन्होंने निचले सदन की सदस्यता की शपथ अंग्रेजी में ली। कांग्रेस अध्यक्ष भोजनावकाश के बाद सदन में आये और उनके पहुंचने पर उनकी पार्टी एवं सहयोगी दलों के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर उनका अभिनंदन किया। सदन में सदस्यों को राज्यवार शपथ दिलाई जा रही है। गांधी को केरल से निर्वाचित हुए सदस्यों के साथ क्रमवार शपथ दिलायी गयी।

शपथ ग्रहण करने से पहले उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘लोकसभा के सदस्य के तौर पर यह मेरा लगातार चौथा कार्यकाल है। वायनाड का प्रतिनिधित्व करते हुए मैं संसद में अपनी नयी पारी शुरू कर रहा हूं। मैं भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा।’’ गांधी अपने चिरपरिचित परिधान सफेद कुर्ता और पायजामा पहनकर सदन आये थे। वह सदन में अंग्रिम पंक्ति में अपनी मां एवं रायबरेली से पुन: निर्वाचित हुईं सोनिया गांधी के साथ बैठे हुए थे। शपथ लेने के लिए जब गांधी का नाम पुकारा गया तो सोनिया सहित कांग्रेस नेताओं एवं सदस्यों ने मेजें थपथपाकर उनका स्वागत किया।सोलहवीं लोकसभा में राहुल गांधी विपक्ष के लिए निर्धारित पहली पंक्ति में नहीं बैठकर दूसरी पंक्ति में बैठते थे। गौरतलब है कि गांधी इस बार अमेठी के अलावा वायनाड से भी लोकसभा चुनाव लड़े थे। उनकी परंपरागत सीट रही अमेठी से इस बार उन्हें भाजपा की स्मृति ईरानी से हार का सामना करना पड़ा। गांधी लगातार चौथी बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। वह 2004, 2009 और 2014 में अमेठी से निर्वाचित हुए थे। इस बार वह वायनाड से चुनाव जीतें हैं।



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