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पुणे टेस्ट में भारत ने अफ्रीका को चटाई धूल, सीरीज में 2-0 की बढ़त

13 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

पुणे।अपने गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने दक्षिण अफ्रीका को दूसरे क्रिकेट टेस्ट में चौथे ही दिन रविवार को एक पारी और 137 रन से हराकर तीन मैचों की श्रृंखला में 2 . 0 की विजयी बढत बना ली। दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज एक बार फिर भारत की दमदार गेंदबाजी के सामने घुटने टेकने को मजबूर हो गए। फॉलोआन खेलते हुए पूरी टीम 67.2 ओवर में 189 रन पर आउट हो गई । दक्षिण अफ्रीका को 2008 के बाद किसी टेस्ट श्रृंखला में फालोआन खेलने पर मजबूर करने वाली भारत पहली टीम बन गई।

इस जीत के बाद विश्व चैम्पियनशिप तालिका में भारत 200 अंक लेकर दूसरे स्थान पर काबिज न्यूजीलैंड से 140 अंक आगे है। वहीं बतौर कप्तान यह विराट कोहली का 50वां टेस्ट था और उनकी कप्तानी में अपनी धरती पर भारत ने यह लगातार 11वीं श्रृंखला जीती है जो विश्व रिकॉर्ड है। तीसरा और आखिरी टेस्ट 19 अक्टूबर से रांची में खेला जायेगा। फॉलोआन खेलते हुए वेर्नोन फिलैंडर और केशव महाराज ने आखिर में जीत के लिये भारत का इंतजार लंबा कराने की कोशिश की लेकिन तेज गेंदबाज उमेश यादव ने 67वें ओवर में फिलैंडर (37) और कैगिसो रबाडा (चार) को पवेलियन भेजा।

इसके अगले ओवर में रविंद्र जडेजा ने दूसरी ही गेंद पर महाराज (22) को पगबाधा आउट किया। दक्षिण अफ्रीकी टीम ने रिव्यू लिया लेकिन फैसला गेंदबाज के पक्ष में रहा। पहली पारी में 275 रन बनाने वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम दूसरी पारी में 189 रन पर आउट हो गई। भारत ने अपनी पहली पारी पांच विकेट पर 601 रन (घोषित) की थी। दक्षिण अफ्रीका का शीर्षक्रम दूसरी पारी में भी नाकाम रहा। भारत के लिये जडेजा ने 21.2 ओवर में 52 रन देकर तीन, यादव ने आठ ओवर में 22 रन देकर तीन और रविचंद्रन अश्विन ने 21 ओवर में 45 रन देकर दो विकेट लिये। मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा को एक एक विकेट मिला।

लंच के बाद रविंद्र जडेजा ने क्विंटोन डिकाक (पांच) और तेम्बा बावुमा (38) को आउट किया । वहीं मोहम्मद शमी ने सेनुरान मुथुस्वामी (नौ) को पवेलियन भेजा। सुबह के सत्र में डीन एल्गर ने 72 गेंद में 48 रन बनाकर अकेले किला लड़ाने की कोशिश की लेकिन रविचंद्रन अश्विन ने उन्हें पवेलियन भेजा। अश्विन आठ ओवर में आठ रन देकर दो विकेट ले चुके हैं। पहली पारी में विकेट नहीं ले सके ईशांत शर्मा ने दूसरी ही गेंद पर एडेन मार्कराम (0) को पवेलियन भेजा। दूसरे छोर पर खड़े एल्गर से लंबी बातचीत के बाद मार्कराम ने रिव्यू नहीं लिया हालांकि टीवी रिप्ले से जाहिर था कि गेंद लेग स्टम्प के बाहर से जा रही थी। पहली पारी में भी शानदार कैच लपकने वाले विकेटकीपर रिधिमान साहा ने थ्यूनिस डि ब्रून का एक और दर्शनीय कैच लपका। एल्गर और कप्तान फाफ डु प्लेसी (54 गेंद में पांच रन) ने 49 रन जोड़े। डु प्लेसी को अश्विन ने आफ ब्रेक पर आउट किया। वहीं एल्गर ने मिडआफ पर खड़े उमेश यादव को कैच थमाया।



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विराट कोहली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पूरे किए सबसे तेज 21000 रन, बनाया टेस्ट का बेस्ट स्कोर

11 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। Ind vs SA 2nd test match 2019: टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने पुणे टेस्ट मैच में अपने टेस्ट करियर का बेस्ट स्कोर बनाया। साउथ अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने अपने टेस्ट करियर का सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाते हुए अपनी टीम के लिए रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया। पुणे टेस्ट मैच की पहली पारी में विराट कोहली साउथ अफ्रीका के खिलाफ 254 रन बनाकर नाबाद रहे और ये उनके टेस्ट करियर का अब तक से सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर रहा। इससे पहले उनका टेस्ट में बेस्ट स्कोर 243 रन था। इसके अलावा विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज 21000 रन बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए।

विराट कोहली पुणे टेस्ट मैच की पहली पारी में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 336 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 254 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 33 चौके व 2 छक्के लगाए। विराट कोहली का ये टेस्ट क्रिकेट में बेस्ट स्कोर था। इससे पहले उनका बेस्ट स्कोर टेस्ट क्रिकेट में 243 रन था जो उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ खेला था।

साउथ अफ्रिका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले विराट कोहली को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज 21000 रन परे करने के लिए 281 रन की जरूरत थी। उन्होंने इस स्कोर को पुणे टेस्ट मैच की पहली पारी के दौरान ही पा लिया और ये कमाल करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बन गए।

सबसे तेज अंतरराष्ट्रीय 21,000 रन (मैचों की संख्या)

392 मैच - विराट कोहली

396 मैच - ब्रायन लारा

418 मैच - सचिन तेंदुलकर

विराट कोहली दुनिया के पहले ऐसे टेस्ट कप्तान बन गए हैं जिन्होंने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में पहला दोहरा शतक लगाया है। विराट ने जहां अपने टेस्ट करियर का 7वां दोहरा शतक लगाया वहीं उन्होंने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में टेस्ट कप्तान के तौर पर अपना पहला शतक लगाकर इतिहास रचा। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की शुरुआत हाल ही में की गई है और विराट से पहले किसी भी टेस्ट कप्तान ने ये कमाल नहीं किया था।

विराट कोहली भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 7000 रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ते हुए ये उपलब्धि अपने नाम कर ली। सचिन ने अपने टेस्ट करियर की 136 पारियों में ये कमाल किया था, लेकिन विराट ने अब ये कामयाबी अपनी 138वीं पारी में हासिल कर ली।



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BCCI के पूर्व वकील ने CoA के फैसले को बताया मनमाना और गलत

10 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोलकाता। बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख कानूनी सलाहकार उषा नाथ बनर्जी ने तीन राज्य संघों को बोर्ड की सालाना आम बैठक (एजीएम) में भाग लेने से रोकने के प्रशासकों की समिति (सीओए) का फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे ‘पूरी तरह मनमाना और गलत’ करार दिया। सीओए ने बुधवार तमिलनाडु क्रिकेट संघ(टीएनसीए), महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (एमसीए) और हरियाणा क्रिकेट संघ (एचसीए) को संविधान में संशोधन नहीं करने के कारण 23 अक्टूबर को मुंबई में होने वाली बीसीसीआई की एजीएम में भाग लेने से रोक दिया है।बनर्जी ने हालांकि कहा कि अगर किसी राज्य ने बदलावों का अनुपालन नहीं किया है तो उसे पहले साल के लिए वित्तीय अनुदान और अन्य लाभों से वंचित किया जा सकता है लेकिन एजीएम में भाग लेने से नहीं रोका जा सकता है। बनर्जी ने कहा कि एक बार जब राज्य संघ पूर्ण सदस्य के तौर पर मान्यता प्राप्त कर लेता है तब एजीएम में भाग लेना और मतदान करना उसका कानूनी और संवैधानिक अधिकार है। उसके इस अधिकार को व्यक्तियों का समूह तब तक वापिस नहीं ले सकता जब तक वह मनमाना और गैर कानूनी हो। बीसीसीआई की आम सभा भी उसे नहीं रोक सकती।



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ICC की फुल मेंबर टीम को शिकस्त देकर सिंगापुर की टीम ने रच दिया ये इतिहास

30 Sep 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। Singapore vs Zimbabwe T20I: सिंगापुर की मेजबानी में जिम्बाब्वे और नेपाल की टीम टी20 इंटरनेशनल की त्रिकोणीय सीरीज खेल रही हैं। इस सीरीज के तीसरे मैच में सिंगापुर की टीम ने एक नया इतिहास रच दिया है। सिंगापुर की टीम ने टी20 इंटरनेशनल मैच में आइसीसी की फुल मेंबर टीम जिम्बाब्वे को हरा दिया है। आइसीसी की फुल मेंबर टीम के खिलाफ किसी भी प्रारूप में सिंगापुर की पहली अंतरराष्ट्रीय जीत है।

इसी जीत के साथ सिंगापुर ने अगले महीने से शुरू हो रहे T20 वर्ल्ड कप क्वालीफायर से पहले तहलका मचा दिया है। सिंगापुर की टीम ने अपने ही घरेलू मैदान इंडियन एसोसिएशन ग्राउंड पर रविवार को 4 रन से जिम्बाब्वे की टीम को हरा दिया। हालांकि, इससे पहले सिंगापुर की टीम को नेपाल के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिसमें नेपाल टीम के कप्तान पारस खड़का ने शतकीय पारी खेलकर अपनी टीम को 9 विकेट से जीत दिलाई थी।

वहीं, इस ट्राइ सीरीज के तीसरे मैच की बात करें तो सिंगापुर टीम के कप्तान अमजद महबूब ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी और स्कोर बोर्ड पर 18 ओवर के इस मैच में 181 रन टांग दिए। इस दौरान टीम के कुल 9 विकेट गिरे। सिंगापुर की ओर से टिम डेविड और मनप्रीत सिंह ने 41-41 रन की पारी खेली, जबकि रोहन रंगाराजन ने 39 रन बनाए। वहीं, जिम्बाब्वे की ओर से रियान बर्ल ने 3, रिचर्ड नगर्वा ने 2 और कप्तान सीन विलियम्स ने एक विकेट झटका।

18 ओवर के इस खेल में 182 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम 7 विकेट खोकर 177 रन ही बना सकी। जिम्बाब्वे की ओर से कप्तान सीन विलियम्स ने 66, सलामी बल्लेबाज रेगिस चकावा ने 48 रन और टिनोतेंदा ने 32 रन की पारी खेली। वहीं, सिंगापुर की टीम की ओर से कप्तान अमजद महबूब और जनक प्रकाश ने 2-2 विकेट चटकाए। इस तरह जिम्बाब्वे की टीम को इस मैच में 4 रन से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, सीरीज के पहले मैच में जिम्बाब्वे ने नेपाल को 5 विकेट से हराकर पहली जीत दर्ज की थी।



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भारतीय पहलवानों का विश्व चैंपियनशिप में निराशाजनक प्रदर्शन

14 Sep 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नूर-सुल्तान (कजाखस्तान)। भारत के यहां विश्व चैम्पियनशिप में शुरूआती दिन निराशाजनक रहा क्योंकि ग्रीको रोमन में भाग ले रहे सभी चारों पहलवान एक भी राउंड जीते बाहर हो गये। गैर-ओलंपिक वर्ग में भाग ले रहे एशियाई चैम्पियनशिप के रजत पदकधारी हरप्रीत सिंह(82 किग्रा), सागर (63 किग्रा) और मंजीत (55 किग्रा) अपने मुकाबलों के दौरान एक भी अंक नहीं जुटा सके। केवल योगेश (72 किग्रा) ने ही अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी रेमंड एंथोनी बंकर तृतीय को चुनौती दी लेकिन वह 5-6 से हार गये।

अगर भारतीयों के खिलाफ मुकाबले जीतने वाला पहलवान खिताबी भिड़ंत तक पहुंचता है तो उनके पास कांस्य पदक के लिये रेपेशाज दौर में खेलने का मौका मिल सकता है। हरप्रीत सिंह को 82 किग्रा में चेक गणराज्य के पेट्र नोवाक ने 5-0 से पराजित किया।

वहीं मंजीत का प्री क्वार्टरफाइनल में प्रतिद्वंद्वी काफी मजबूत था और उन्होंने काफी प्रयास किया लेकिन तकनीकी श्रेष्ठता के कारण हार गये। अजरबेजान के मौजूदा विश्व चैम्पियन एलदानीज अजीली ने आसानी से उन्हें पस्त कर दिया। सागर 63 किग्रा में केवल दो मिनट के लिये ही मैट पर टिक सके और अपने क्वालीफिकेशन दौर में स्थानी पहलवान अलमात केबिसपायेव से तकनीकी श्रेष्ठता से हार गये।



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US Open चैम्पियनशिप 18 साल के करियर की सबसे भावुक कर देने वाली जीत: नडाल

09 Sep 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

न्यूयार्क। अमेरिकी ओपन फाइनल में दानिल मेदवेदेव पर मिली जीत को अपने 18 साल के करियर की ‘सबसे भावुक कर देने वाली जीत’ में से एक बताया। नडाल ने करीब पांच घंटे तक चले पांच सेटों के मुकाबले में रूसी प्रतिद्वंद्वी को हराकर 19वां ग्रैंडस्लैम खिताब जीता। उन्होंने जीत के बाद कहा कि जिस तरह से वह खेल रहा था, वह अद्भुत था। इस मौके पर उनकी ग्रैंडस्लैम जीत का एक वीडियो भी दिखाया गया।

उन्होंने कहा कि यह मेरे टेनिस करियर की सबसे जज्बाती रातों में से एक है। वह वीडियो और आप सभी ने इसे खास बना दिया। दुनिया में कोई भी स्टेडियम इससे ज्यादा ऊर्जावान नहीं है। नडाल ने कहा कि जिस तरह से यह मैच खेला गया, जज्बात पर काबू रखना मुश्किल था।



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ओलंपिक मेडल जीतने के लिये अलग स्तर की मानसिक स्थिरता चाहिये: अभिषेक

08 Sep 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। पिछले सप्ताह विश्व कप में दूसरा स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय निशानेबाज अभिषेक वर्मा ने कहा कि ओलंपिक पदक जीतने के लिये अलग तरह की मानसिक स्थिरता की जरूरत होती है। हरियाणा के 30 बरस के इस निशानेबाज ने इस साल अप्रैल में बीजिंग विश्व कप में 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक कोटा हासिल किया था। उन्होंने पिछले सप्ताह रियो में विश्व कप में ही दूसरा पीला तमगा जीता। उन्होंने दस मीटर एयर पिस्टल मिश्रित वर्ग में यशस्विनी सिंह देसवाल के साथ रजत पदक जीता था।

अभिषेक ने प्रेस ट्रस्ट से कहा ,‘‘निशानेबाजी शारीरिक से ज्यादा मानसिक खेल है। ओलंपिक में हमें अलग तरह की मानसिक स्थिरता और आत्मविश्वास की जरूरत होगी । मैं इसके लिये मानसिक व्यायाम, योग और ध्यान कर रहा हूं।’’ उन्होंने कहा ,‘‘मुझे पूरी तैयारी पर काम करना है लेकिन मुख्य फोकस मानसिक शांति पर होगा। फाइनल में जब आप निशाना साधते हैं और पीछे से शोर होता है तो फोकस हट जाता है। ऐसे में नौ या आठ के स्कोर आने लगते हैं। इसी पर फोकस करना है।’’

भारत के पास इस समय निशानेबाजी में काफी युवा टीम है और अभिषेक ने कहा कि आपस में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से निशानेबाजों को मदद मिल रही है। उन्होंने कहा ,‘‘ यह अच्छा मौका है क्योंकि भारत में ही इतनी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है। इससे आत्मविश्वास बढता है।’’ उन्होंने कहा ,‘‘एशियाई खेलों से ही मैं और सौरभ हर अभ्यास शिविर में एक कमरे में रहते हैं । हर प्रतिस्पर्धा में भी और अपने अनुभव एक दूसरे से बांटते हैं जिससे प्रदर्शन में निखार आता है।’’ चीन में 17 से 23 नवंबर तक होने वाले विश्व कप फाइनल्स के लिये रिकार्ड 14 भारतीय राइफल और पिस्टल निशानेबाजों ने कोटा हासिल कर लिया है। अभिषेक ने कहा ,‘‘विश्व कप फाइनल्स दो साल में बार होता है। इस बार हमारे पास बड़ी टीम है और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।’’



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2012 तक विपक्षी टीम की निगाहों में नहीं दिखा अपने लिए भय: कोहली

07 Sep 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा कि विपक्षी टीम की निगाहों में उनके प्रति भय और सम्मान के अभाव से वह अपने काम करने के तरीके को बदलने के लिये बाधित हुए और ‘प्रभावी खिलाड़ी’ बनने में सफल हुए। एमी पुरस्कार विजेता पत्रकार ग्राहम बेनसिंगर ने भारत के सबसे लोकप्रिय और सक्रिय खिलाड़ी का साक्षात्कार लिया जिसमें कोहली ने अपनी फिटनेस के बारे में बात की। कोहली ने स्पोर्ट्स वेब-शो ‘इन डेप्थ विद ग्राहम बेनसिंगर’ में बताया कि कैसे उन्होंने 2012 में आस्ट्रेलियाई दौरे से वापसी के बाद अपनी फिटनेस पर काम किया जिससे उनके खेल में सुधार हुआ। कोहली ने इसमें कहा, ‘‘ऐसा भी समय था जब मैं बल्लेबाजी के लिये उतरता था तो विपक्षी खेमे में मेरे प्रति कोई भय या सम्मान नहीं होता था।’’

उन्होंने कहा, ‘मैं मैदान में ऐसे नहीं जाना चाहता कि विपक्षी टीम सोचे कि यह खिलाड़ी इतना खतरनाक नहीं है। मैं सिर्फ कोई अन्य खिलाड़ी नहीं बनना चाहता था क्योंकि मैं प्रभाव डालना चाहता था।’ कोहली ने कहा कि मैं चाहता था कि जब मैं चलूं तो टीमों को सोचना चाहिए कि हमें इस खिलाड़ी को आउट करना चाहिए वर्ना हम मैच गंवा देंगे। उन्होंने साथ ही बताया कि फिटनेस कैसे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गयी और कैसे इसने ब्रिटेन में विश्व कप के दौरान उन्हें तेजी से उबरने में मदद की। उन्होंने कहा कि विश्व कप के दौरान प्रत्येक मैच में मेरा ऊर्जा का स्तर 120 प्रतिशत रहता था। मैं इतनी तेजी से उबरा कि प्रत्येक मैच में मैंने औसतन 15 किमी की दूरी तय की। मैं वापस आता और उबरने का उपचार करता और फिर दूसरे शहर में जाता और जल्द ही फिर से ट्रेनिंग के लिये तैयार रहता।

कोहली ने कहा कि इतनी ऊर्जा होती थी कि मैं जिम सत्र में हिस्सा ले सका और 35 दिन के थोड़े से समय में 10 मैच खेल सका। मैंने प्रत्येक मैच इसी ऊर्जा से खेला, मुझे कभी भी ऐसा महसूस नहीं हुआ था। मेरे शरीर में कोई खिंचाव नहीं था। अपने आदर्श सचिन तेंदुलकर के बतौर क्रिकेटर कौशल को वह सर्वश्रेष्ठ आंकते हैं जबकि खुद को वह कड़ी मेहनत का नतीजा मानते हैं। उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि जब मैं आया था तो मैं इतना कौशल रखने वाला खिलाड़ी नहीं था लेकिन मेरी एक चीज निरंतर रही कि मैं खुद पर काम करता रहा। अगर भारतीय टीम को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बनना है तो उसे एक निश्चित तरीके से खेलने की जरूरत थी।

कोहली ने कहा कि जब हम 2012 में आस्ट्रेलिया से वापस आये थे तो मैंने हममें और आस्ट्रेलिया के बीच काफी अंतर देखा। मैंने महसूस किया कि अगर हम अपने खेलने, ट्रेनिंग करने और खाने के तरीके में बदलाव नहीं करते हैं तो हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों से नहीं भिड़ सकते। उन्होंने कहा कि अगर आप सर्वश्रेष्ठ नहीं होना चाहते तो प्रतिस्पर्धा करने का कोई मतलब नहीं। मैं खुद को सर्वश्रेष्ठ बनाना चाहता था और फिर खेल के प्रति रवैये में भी बदलाव हुआ।



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हर टेस्ट को मैं अपना आखिरी मैच समझ कर खेलता हूं: हनुमा विहारी

06 Sep 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। अक्सर क्रिकेटर अपने प्रदर्शन का श्रेय टीम में जगह पक्की होने को देते हैं लेकिन हनुमा विहारी अपने हर टेस्ट को ‘आखिरी टेस्ट’ समझकर खेलते हैं ताकि आत्ममुग्धता से बच सकें। आंध्र के इस 25 वर्षीय बल्लेबाज ने वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में 2.0 से मिली जीत में 291 रन बनाकर रोहित शर्मा की जगह अंतिम एकादश में उन्हें उतारने के टीम प्रबंधन के फैसले को सही साबित कर दिया। विहारी ने प्रेस ट्रस्ट को दिये इंटरव्यू में कहा कि बेशक मैं अपने प्रदर्शन से खुश हूं लेकिन मैं स्पष्ट सोच के साथ इस दौरे पर गया था। मैने मैच दर मैच रणनीति बनाई और हर मैच को अपने आखिरी मैच की तरह खेला। इससे मुझे इस सोच के साथ उतरने में मदद मिली कि मेरे पास खोने के लिये कुछ नहीं है।’’

कप्तान विराट कोहली ने हाल ही में कहा था कि विहारी बल्लेबाजी करता है तो ड्रेसिंग रूम में सुकून का माहौल रहता है। उन्होंने विहारी को वेस्टइंडीज दौरे की खोज भी बताया। इस पर विहारी ने कहा कि यदि चेंज रूम में सबको आप पर इतना भरोसा है तो और क्या चाहिये। यह सबसे बढिया तारीफ है और खुद कप्तान ने की है तो मुझे और क्या चाहिये। छह टेस्ट में एक शतक और तीन अर्धशतक समेत 456 रन बना चुके विहारी ने कहा कि यह बरसों की कड़ी मेहनत का नतीजा है जो मैने घरेलू क्रिकेट में की है। भारत के लिये खेलने से पहले मैने 60 प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं। उन्होंने कहा कि मैने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दबाव के हालात का सामना किया है जिससे मैं बड़ी चुनौतियों के लिये तैयार हुआ। आंध्र क्रिकेट संघ और चयन समिति के प्रमुख एमएसके प्रसाद को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं।विहारी ने कहा कि उनके छोटे लेकिन प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कैरियर का कारण चुनौतियों का डटकर सामना करने की उनकी क्षमता है। मेलबर्न में पारी का आगाज करने वाले इस बल्लेबाज ने कहा ,‘‘आस्ट्रेलिया में पारी की शुरूआत करना मेरी इसी मानसिकता की देन था। मैं स्वाभाविक रूप से सलामी बल्लेबाज नहीं हूं और वह बहुत बड़ी चुनौती थी।’’ उन्होंने कहा ,‘‘या तो मैं बैठकर रोता रहता कि मुझसे पारी का आगाज क्यो कराया जा रहा है या चुनौती का सामना करने के लिये खुद को तैयार करता। मैने दूसरा विकल्प चुना ।’’ हैदराबाद के रहने वाले विहारी की बल्लेबाजी की शैली उनके शहर के स्टायलिश बल्लेबाजों वीवीएस लक्ष्मण और मोहम्मद अजहरूद्दीन से जुदा है। उन्होंने कहा ,‘‘मेरा हमेशा से विश्वास रक्षात्मक खेल पर फोकस करने पर रहा है। रक्षात्मक तकनीक सही होने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आप किसी भी गेंदबाज पर दबाव बना सकते हैं। आक्रामक खेलने पर गेंदबाजों को मौके मिल जाते हैं।’’

सिर्फ 12 बरस की उम्र में अपने पिता को खोने वाले विहारी ने कहा ,‘‘मैं 12 बरस का ही था और मेरी बहन 14 बरस की जब मेरे पिता का देहांत हो गया। मेरी मां विजयलक्ष्मी गृहिणी है। वह काफी कठिन दिन थे।’’ उन्होंने कहा ,‘‘मेरी मां ने पिता की पेंशन पर मेरा घर चलाया।उन्होंने मुझे अपने सपने पूरे करने की सहूलियत दी और कभी हमें महसूस नहीं होने दिया कि हम अभाव में हैं। मुझे आज भी समझ में नहीं आता कि उन्होंने यह सब कैसे किया।’’उन्होंने कहा ,‘‘अब मैने हैदराबाद में घर बना लिया है। मैं अपनी मां को आराम देना चाहता हूं।’’



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दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ भारत ए के लिए फॉर्म में लौटना चाहेंगे धवन

04 Sep 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

तिरूवनंतपुरम। खराब फार्म में चल रहे सलामी बल्लेबाज शिखर धवन दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ बुधवार से शुरू हो रही पांच मैचों की अनधिकृत वनडे श्रृंखला के आखिरी दो मैचों में भारत ए के लिये खेलेंगे तो उनका इरादा अपनी लय फिर हासिल करने का होगा। धवन को चोटिल हरफनमौला विजय शंकर की जगह टीम में रखा गया है। धवन विश्व कप के दौरान हाथ में हुए फ्रेक्चर से उबरने के बाद पिछले पांच अंतरराष्ट्रीय मैचों में 65 रन ही बना सके जिसमें तीन टी20 और दो वनडे शामिल थे। भारत की सीनियर टीम 15 सितंबर से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 श्रृंखला खेलेगी लिहाजा धवन का इरादा खोया फार्म हासिल करने का होगा।

चौथे मैच में मनीष पांडे की जगह श्रेयस अय्यर कप्तानी करेंगे। श्रृंखला में 3. 0 की अजेय बढत बना चुकी भारत ए टीम में कुछ बदलाव किये जा सकते हैं । संजू सैमसन विकेटकीपिंग में इशान किशन की जगह ले सकते हैं। शुभमन गिल के लिये भी यह अहम मैच होगा जो पहले दो मैचों में नहीं चल सके और तीसरे से बाहर रहे। मुंबई के शिवम दुबे ने दोनों मैचों में प्रभावित किया है। वह इस लय को कायम रखना चाहेंगे।

दक्षिण अफ्रीका ए की कप्तानी तेंबा बावुमा कर रहे हैं और उसके पास रजा हेंडरिक्स, जार्ज लिंडे, तेज गेंदबाज एनरिच नोर्जे और जूनियर डाला जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी है।



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