लाइफ स्टाइल

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बिरयानी हो तो हैदराबादी हो...वाकई इसके स्वाद का कोई जवाब नहीं
05 Feb 2019
[ स.ऊ.संवाददाता ]

पिछले दिनों हैदराबाद जाना हुआ तो पेट में बिरयानी बिरयानी होता रहा। उस दिन हम घूमने निकले तो मैंने अपने साढू कमलेश से कहा आज बिरयानी भी खा लेते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को फोन किया कि आप लंच कर लें हम बिरयानी खाने जा रहे हैं।

स्वाद चुंबक की मानिंद होता है। कुछ चीज़ें खाने का हम बरसों इंतज़ार करते हैं लेकिन खा नहीं सकते। इस नहीं खा सकने में व्यक्तिगत, पारिवारिक, धार्मिक या आर्थिक लोचे हो सकते हैं। कभी अवसर सामने खड़ा होता है और हम आगे बढ़ जाते हैं। पिछले दिनों हैदराबाद जाना हुआ तो पेट में बिरयानी बिरयानी होता रहा। उस दिन हम घूमने निकले तो मैंने अपने साढू कमलेश से कहा आज बिरयानी भी खा लेते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को फोन किया कि आप लंच कर लें हम बिरयानी खाने जा रहे हैं।

विविध स्वादों की धरती, चार सौ साल पुराने हैदराबाद जाकर आप गोलकुंडा फोर्ट, चार मीनार या चकित कर देने वाले अनुभवों से गुजरने के लिए रामोजी फिल्म सिटी में थक आओ लेकिन जब तक आपने दुनिया भर में मशहूर हैदराबादी बिरयानी हज़म नहीं की तब तक समझिए आप हैदराबाद के नहीं हुए। बिरयानी कभी राजसी खाना होता था अब वक़्त बदलने के साथ यहाँ बिरयानी खाने की अनगिनत जगहें हैं। लेकिन कहते हैं एक दो जगह तो ऐसी होती ही है जो मानी जाती है अपने मूल, असली व विश्वसनीय स्वाद के लिए। बिरयानी पूरे देश में उपलब्ध है लेकिन यह लाजवाब स्वाद लेने के लिए दुनिया भर से लोग हैदराबाद आते हैं। बेशक डिजिटल होती ज़िंदगी में आप घर बैठे बिरयानी खा सकते हैं लेकिन जैसे किताब को हाथ में पकड़ कर पढ़ने का जो मज़ा है वैसा ही खाने का मज़ा तो रसोई के पास ही है। प्रोसेसिंग व पैकेजिंग ने स्वाद संवारा नहीं बिगाड़ा है।

बिरयानी परोसने का एक तरीका है। इसे आप खुद नहीं परोस सकते यदि आप को पता नहीं है। कमलेश ने बताया कि बिरयानी लाने वाला ही सर्व करेगा। सर्व करने के लिए उन्होंने विशेष तरीके से बिरयानी वाले बर्तन में चम्मच डाला और पहले चावल आपकी प्लेट में डाले गए फिर मसाले के साथ मीट या चिकन। इसमें बासमती का हर चावल अलग अलग है यह न कम, न ज़्यादा बल्कि सही पके हुए हैं। कम ग्रेवी में मसालों का सम्मिश्रण बेहद संतुलित व उम्दा है। केसर की विशिष्ट खुशबू इसमें खूबसूरत रंग और बेमिसाल स्वाद उगाती है। बिरयानी खाने से पहले या इसके साथ सलाद न खाने की सलाह दी जाती है। हां, साथ में पतली-सी दही, हरी चटनी और सालन परोसा जाता है। वैसे शाकाहारी बिरयानी भी यहां उपलब्ध है लेकिन बिरयानी का सही मज़ा लेना हो तो मीट या चिकन बिरयानी में ही लिया जा सकता है। खाते समय, यहां अनेक मसाले काँच के बड़े बड़े मर्तबान में सजे देख स्वाद और बढ़ गया। यहाँ बैठने व परोसने का तरीका सहज पारम्परिक है। यहां जो भी आता है स्वाद के कारण और स्वाद के कारण ही विश्व ब्रैंड बन जाने के कारण। टेक होम सुविधा है। इस जगह देश विदेश में मशहूर फिल्मी सितारे, क्रिकेट सितारे आ चुके हैं। यहाँ लगभग चार सौ लोग एक साथ खा सकते हैं।




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IRCTC दे रहा है साउथ इंडिया के 6 शहरों में घूमने का मौका
02 Jan 2019
[ स.ऊ.संवाददाता ]

आईआरसीटीसी दे रहा है 48 हजार रुपए में साउथ इंडिया के 6 खूबसूरत शहरों को घूमने का मौका। धार्मिक से लेकर ऐतिहासिक हर एक जगह की सैर आप इस पैकेज में कर पाएंगे।

दक्षिण भारत के खूबसूरत जगहों की सैर कराने के लिए आईआरसीटीसी लेकर आया है आपके लिए खास टूर पैकेज। जिसमें आप चेन्नई, तिरुपति, त्रिवेंद्रम, कन्याकुमारी, रामेश्वरम और मदुरै के मशहूर जगहों की कर सकते हैं सैर। 7 दिन और 6 रातों वाले इस पैकेज में साउथ इंडिया के 6 शहरों को घूमने का मौका मिलेगा। इस खास टूर पैकेज का नाम साउथ इंडिया डिवाइन टूर पैकेज है। जिसकी शुरूआत दिल्ली से हो रही है।टूर की शुरूआत मार्च की अलग-अलग तारीख से हो रही हैं। 1 मार्च, 12 मार्च, 19 मार्च और 24 मार्च 2019 वाले इस पैकेज में कुछ 30 सीटें अवेलेबल हैं। जिसमें यात्रियों के फ्लाइट खर्चे से लेकर अच्छे होटल्स में रूकने की सुविधा, ब्रेकफास्ट और डिनर और 6 शहरों के प्रमुख जगहों के सैर की भी व्यवस्था होगी।साउथ इंडिया डिवाइन टूर पैकेज में आप केरल के मशहूर पद्नाभस्वामी मंदिर, तिरुपति बालाजी मंदिर, कन्याकुमारी के फेमस विवेकानंद रॉक मेमोरियल, रामानाथस्वामी मंदिर के दर्शन कर पाएंगे। जिसके लिए प्रति व्यक्ति कीमत 48 हजार रुपए है। अगर आप तीन लोगों की टिकट एक साथ बुक कराएंगे तो इसके लिए प्रति व्यक्ति कीमत 36,650 रुपए है और अगर दो लोगों एक साथ घूमने जा रहे हैं तो प्रति व्यक्ति कीमत 37,540 रुपए है।


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इस योगासन का करें रोजाना नहीं होगा कभी भी सिरदर्द
30 Dec 2018
[ स.ऊ.संवाददाता ]

उत्तानासन नर्वस सिस्टम में रक्त की आपूर्ति को बढ़ाकर दिमाग को शांत करता है। साथ ही यह कोशिकाओं में ऑक्सीजन प्रवाह को बेहतर बनाता है। यह सिरदर्द को दूर करने के लिए एक बेहतरीन आसन माना गया है। इसका अभ्यास करने के लिए पहले सीधे खड़े हो जाएं।सिरदर्द एक ऐसी समस्या है, जिसका हर व्यक्ति ने कभी न कभी सामना अवश्य किया है। कुछ लोगों को यह समस्या लगातार बनी रहती है तो कभी−कभी काम के तनाव के चलते हल्के सिरदर्द की शिकायत होती है। आमतौर पर, सिरदर्द होने पर लोग दवाइयों का सेवन करते हैं लेकिन अगर कुछ योगासनों का अभ्यास किया जाए तो सिरदर्द की समस्या होगी ही नहीं और जिन्हें यह समस्या है, उन्हें भी काफी हद तक राहत मिलेगी। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−

विपरीतकर्णीआसन शरीर को मजबूत व लचीला बनाने का काम करता है। इसके अतिरिक्त मस्तिष्क में रक्त प्रचुर मात्रा में जाने से उसके सभी विकार दूर होते हैं। यह आसन सिरदर्द व चक्कर आने जैसी समस्या को भी दूर करता है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए दीवार का सहारा भी लिया जा सकता है। इसके लिए दीवार के नजदीक पीठ के बल लेट जाएं। अब पैरों को दीवार से लगाकर सीधा करें। अब दीवार के सहारे अपने पैरों को ऊपर उठाएं। यह धीरे−धीरे करें। अब अपने कूल्हों को ऊपर की तरफ उठाएं। शरीर को अपने हाथों से सहारा दें। अपनी गर्दन, कंधे और चेहरे को स्थिर रखें। इस अवस्था में 5 मिनट तक गहरी सांस लें और फिर सांस छोड़ें। धीरे−धीरे इस अवस्था से बाहर आएं।

अधोमुखश्वासन

यह आसन सिर्फ कमरदर्द, हाथ, पैर व गर्दन की मांसपेशियों के लिए अच्छे नहीं माने जाते। बल्कि इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर उल्टे वी के समान दिखाई देता है और उल्टा होने के कारण सिर की तरफ रक्त व ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर तरीके से होता है, जिससे सिरदर्द से राहत मिलती है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए पेट के बल लेटें। इसके बाद अपने हाथों व पैरों को जमीन से लगाते हुए त्रिभुज की भांति शरीर की आकृति बनाते हुए कमर को उपर उठाएं। इस पॉश्चर में कुछ देर रूकें और गहरी सांस लें। इसके बाद सामान्य अवस्था में लौट आएं।

उत्तानासन

उत्तानासन नर्वस सिस्टम में रक्त की आपूर्ति को बढ़ाकर दिमाग को शांत करता है। साथ ही यह कोशिकाओं में ऑक्सीजन प्रवाह को बेहतर बनाता है। यह सिरदर्द को दूर करने के लिए एक बेहतरीन आसन माना गया है। इसका अभ्यास करने के लिए पहले सीधे खड़े हो जाएं। अब सांस छोड़ते हुए कूल्हों की तरफ से मुड़ते हुए नीचे झुके। ध्यान रहे कि आपके घुटने न मुड़ें तथा पैर एक−दूसरे के समानांतर हों। अब अपनी छाती को पैरों के बीच में करें तथा कूल्हे की हडि्डयों में खिंचाव को महसूस करें तथा हाथों से अपने पंजों को छुएं। आपका सिर अब फर्श तक पहुंच जाएगा। अब कुछ देर तक इसी अवस्था में रहें। अब सांस लेते हुए हाथों को अपने कूल्हें पर रखें तथा धीरे−धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं।


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नेचुरल ब्यूटी से घिरे ढाका में है मिला-जुला इस्लामिक और बंगाली कल्चर
28 Dec 2018
[ स.ऊ.संवाददाता ]

ढाका बांग्लादेश की राजधानी होने के अलावा बांग्लादेश का औद्यौगिक और प्रशासनिक केन्द्र भी है। लेकिन ये शहर बूढ़ी गंगा नदी के तट बसा है इसलिए ये काफी खूबसूरत भी है। ढाका को राजनीतिक गतिविधियों का गढ़ माना जाता है।

भारत के पड़ोसी देश के बारे में तो आपने सुना ही होगा... एक बड़ा ही खूबसूरत देश है... हम बात कर रहे हैं खूबसूरत बांग्लादेश की। बांग्लादेश की राजधानी ढाका घूमने के लिए बहुत ही अच्छी जगह है। यहां से भारत का कोई सरहदी दुश्मनी का नाता नहीं है न ही गोली लगने का डर, तो आप जा सकते हैं ढाका घूमने के लिए। यहां पर एक्सप्लोर के लिए बहुत कुछ है। नेचुरल ब्यूटी से घिरे ढाका में मिला-जुला इस्लामिक और बंगाली कल्चर आपको देखने को मिलेगा।

ढाका बांग्लादेश की राजधानी होने के अलावा बांग्लादेश का औद्यौगिक और प्रशासनिक केन्द्र भी है। लेकिन ये शहर बूढ़ी गंगा नदी के तट बसा है इसलिए ये काफी खूबसूरत भी है। ढाका को राजनीतिक गतिविधियों का गढ़ माना जाता है लेकिन यहां की खूबसूरती पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है।

मुगल शासन काल में ढाका को जहांगीर नगर के नाम से जाना जाता था। उस समय यह बंगाल प्रांत की राजधानी था। वर्तमान ढाका का निर्माण 19वीं शताब्दी में अंग्रेजों के अधीन हुआ। जल्द ही कलकत्ता के बाद ढाका बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा नगर बन गया। बंटवारे के बाद ढाका पूर्वी पाकिस्ताान की राजधानी बना। 1972 में यह बंगलादेश की राजधानी बना। यहां पुरानी और नई सभ्यताओं के कई नमूने देखने को मिलते हैं।

यहां राष्ट्रीय स्मारक देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। यह स्मारक ढाका से थोड़ा ही दूर लगभग 35 किलोमीटर दूर साभर में स्थित है। इस स्मारक का डिजाइन मोइनुल हुसैन ने तैयार किया था। यह स्मारक उन लाखों सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने बंगलादेश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।

ढाका में बना लालबाग किला काफी विशाल है। इस किले का निर्माण बादशाह औरंगजेब के पुत्र शाहजादा मुहम्मद आजम ने करवाया था। यह किला भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) का मूक गवाह है। 1857 में जब स्थानीय जनता ने ब्रिटिश सैनिकों के विरुद्ध विद्रोह किया था तब 260 ब्रिटिश सैनिकों ने यहीं शरण ली थी। इस किले में पारी बीबी का मकबरा, लालबाग मस्जिद, हॉल तथा नवाब शाइस्ता खान का हमाम भी देखने योग्य है। यह हमाम वर्तमान में एक संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है।

धान, गन्ना और चाय का सबसे ज्यादा व्यापार यहीं से होता है। टोंगी, तेजगांव, डेमरा, पागला, कांचपुर में रोजाना जरूरत की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मोतीझील यहां का मुख्य कमर्शियल एरिया है। ढाका का प्रसिद्ध सदरघाट बूढ़ी गंगा नदी पर बना हुआ है। यहां हर वक्त सैलानियों से लेकर स्थानीय लोगों की चहल-पहल देखी जा सकती है। सदरघाट के सुंदर नजारों को देखने के लिए बोट, स्टीमर, पैडल स्टीमर, मोटर आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं।


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पंजाबी स्टाइल में बनाएं सरसों का साग, सब उंगलियां चाटते रह जाएंगे
26 Dec 2018
[ स.ऊ.संवाददाता ]

अगर आप भी चाहती हैं कि हर कोई आपके साग की तारीफ ही करता रह जाए, तो इस अंदाज में इसे बनाएं। आइए आपको बताते हैं पंजाबी स्टाइल में साग बनाने की विधि। यह विधि बहुत ही आसान सी है।

ठंड के मौसम में सिर्फ पंजाबी ही नहीं, बल्कि हर किसी के घर में सरसों का साग जरूर बनता है। लेकिन इसका असली मजा तब ही आता है, जब इसे पंजाबी स्टाइल में बनाया जाए। अगर आप भी चाहती हैं कि हर कोई आपके साग की तारीफ ही करता रह जाए, तो इस अंदाज में इसे बनाएं। तो चलिए जानते हैं पंजाबी स्टाइल साग बनाने की विधि−

सामग्री−

आधा किलो साग

250 ग्राम बथुआ

250 ग्राम पालक

लहसुन

अदरक

हरी मिर्च

नमक

दो तीन चम्मच मकई का आटा

प्याज कटा हुआ

एक कटा टमाटर

धनिया पाउडर

सूखी लाल मिर्च

विधि− साग बनाने के लिए पहले साग, बथुआ और पालक को काटकर पहले अच्छी तरह धो लें। याद रखें कि इसमें मिट्टी काफी होती है और इसलिए अगर इसे सही तरह से नहीं धोया जाता है तो इससे साग किरकिरा बनता है। साग को धोने व काटने के बाद एक कूकर में उसे डालकर नमक व थोड़ा-सा पानी डालकर मीडियम आंच पर एक सीटी आने तक पकाएं।

जब कूकर की सीटी निकल जाए और साग हल्का ठंडा हो जाए, तो इसमें अदरक, लहुसन और हरी मिर्च डालकर रई की मदद से साग को मैश करें। अब साग को प्लेट से हल्का ढक कर मध्यम आंच पर पकाएं। साथ ही बीच−बीच में प्लेट हटाकर रई की मदद से मैश करते रहें।

पकाते समय अगर साग में पानी बिल्कुल खत्म हो जाए तो आप हल्का-सा पानी उबाल कर इसमें डाल सकते हैं। जब पत्ते अच्छी तरह पक जाएं तो इसमें दो−तीन चम्मच मकई का आटा व थोड़ा-सा गर्म पानी डालकर मिक्स करें।

अब बारी आती है साग का तड़का तैयार करने की। तड़का बनाने के लिए एक पैन में घी डालकर इसमें कटी हुई प्याज डालें। जब प्याज भुन जाए तो इसमें एक कटी हुई हरी मिर्च, बारीक कटी अदरक व लहसुन डालें। अब इसमें एक कटा टमाटर, थोड़ा सा नमक व धनिया पाउडर डालें व थोड़ी देर ढककर पकाएं। अगर आप चाहें तो मसाला भुनने के लिए थोड़ा सा पानी भी डाल सकते हैं। जब मसाला तैयार हो जाए तो इसमें साग डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।

अब एक तड़का पैन में थोड़ा-सा घी डालकर उसमें हींग, हरी मिर्च व सूखी लाल मिर्च डालकर तड़काएं। अब इस तड़के को तैयार साग में डालें।

आपका लजीजदार पंजाबी स्टाइल साग तैयार है। बस इसे सर्विंग बाउल में निकालें और गरमा−गरम मक्का की रोटी के साथ सर्व करें।




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क्रिसमस डे सेलिब्रेशन के लिए ये जगह है सबसे बेस्ट...
25 Dec 2018
[ स.ऊ.संवाददाता ]

पहाड़ों के प्राकृतिक नजारों के बीच आप क्रिसमस डे मना सकते हैं। क्रिसमस में बेस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को माना जाता है। क्रिसमस पर यहां काफी धूम रहती है। दिसंबर में पहाड़ों पर बर्फबारी भी होती है। ऐसे में आपके क्रिसमस डे का मजा स्नोफॉल से दुगुना हो जाएगा।

साल में एक दिन आता है जब सांता निकोलस धरती पर आते हैं और बच्चों को बहुत सारे गिफ्ट देकर जाते हैं। ये लाइन तो हर मां-बाप ने क्रिसमस डे पर अपने बच्चों से जरूर कही होगी, क्योंकि ईसाई धर्म में ऐसा माना जाता है कि क्रिसमस के दिन यीशु मसीह खुद सांता के रूप में आते हैं और सबको प्यार करके जाते हैं। साल के अंतिम दिनों में आने वाला खुशियों भरा ये त्योहार यीशू के जन्मदिन के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन का एक खास महत्व ये भी है कि विश्व भर में इस दिन को सबसे बड़ा दिन भी कहा जाता है और इस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश होता है। ईसाई धर्म में इसका खास महत्व है इसलिए लोग क्रिसमस को बहुत ही धूमधाम से सेलिब्रेट करते हैं। इस लेख में हम आपको बताएंगे की क्रिसमस डे की अलसी धूम कहां मचती है और ऐसी कौन-सी जगह है जहां जाकर आपका क्रिसमस यादगार बन जाएगा-

शिमला

पहाड़ों के प्राकृतिक नजारों के बीच आप क्रिसमस डे मना सकते हैं। क्रिसमस में बेस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को माना जाता है। क्रिसमस पर यहां काफी धूम रहती है। दिसंबर में पहाड़ों पर बर्फबारी भी होती है। ऐसे में आपके क्रिसमस डे का मजा स्नोफॉल से दुगुना हो जाएगा।

पुड्डुचेरी

पुड्डुचेरी में क्रिसमस डे काफी धमाकेधार अंदाज में मनाया जाता है। रात में पूरा पुड्डुचेरी रोशनी से जगमगा जाता है। यीशू का जन्म होते ही खूब आतिशबाजियां होती हैं। क्रिसमस के दिनों में इस शहर की रौनक दोगुनी बढ़ जाती है। दूर-दराज से लोग अपने परिवार संग यहां क्रिसमस मनाने आते हैं।

केरल

क्रिसमस के मौके पर केरल को दुल्हन की तरह तरह सजाया जाता है। भारत के केरल में ईसाइयों की संख्या ज्यादा है, इसलिए यहां क्रिसमस की धूम देखने बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इस फेस्टिवल में ज्यादातार गलियां क्रिसमस ट्री और बड़े-बड़े स्टार्स से सज जाती हैं। यह रौनक गलियों तक ही नहीं रहती है बल्कि मार्केट में भी नज़र आती है। अगर आप कोच्चि जा रहे हैं तो 16वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के जरिए बनाए गए सेंट फ्रांसिस चर्च का दीदार करने ना भूलें।

कोलकाता

अब बात करते हैं कोलकाता की तो कोलकाता किसी से कम नहीं है। हर त्योहर की धूम कोलकाता में दिखाई पड़ती है तो इसमें क्रिसमस डे कैसे पीछे हो सकता है। कोलकाता की सड़कें और संकरी गलियां क्रिसमस पर रोशनी के रंग से जगमगाती हैं। चारों ओर इमारतों को लाइट्स और बड़े-बड़े स्टार्स से सजाया जाता है। कोलकाता में इस दिन सेंट पॉल कथेड्रल में बहुत भीड़ देखने को मिलेगी। यहां पर 25 तारीख की रात को 12 बजते ही जीसस क्राइस्ट का जन्म मनाया जाता है।

इसे भी पढ़ेंः दिल्ली के नजदीक हिमाचल प्रदेश की इन जगहों पर होती है स्नोफॉल

गोवा

गोवा देश-विदेश में अपने पार्टी कलचर के लिए जाना जाता है। भारत के अन्य राज्यों की तुलना में यहां पर चर्च की संख्या ज्यादा है और ईसाई भी ज्यादा मात्रा में हैं इसलिए गोवा में भी क्रिसमस वीक का जश्न बेहद ही खास होता है।




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सर्दी लग गयी है? नाक बंद हो गयी है? यह घरेलू उपाय देंगे तत्काल राहत
21 Dec 2018
[ स.ऊ.संवाददाता ]

भाप के जरिए बंद नाक से आसानी से राहत पाई जा सकती है। इसके लिए बस एक बर्तन में गर्म पानी डालें और फिर बर्तन के ऊपर मुंह करके एक टावल की मदद से अपना मुंह ढक लें। कुछ देर तक स्टीम को महसूस करें।

मौसम में चाहे बच्चे हों या बड़े, हर किसी को सर्दी−जुकाम या नाक बंद होने की समस्या का सामना करना ही पड़ता है। भले ही यह समस्या मामूली-सी हो और तीन से पांच दिन में ठीक हो जाए लेकिन इस समस्या के दौरान व्यक्ति को काफी परेशानी होती है। कई बार लोग राहत पाने के लिए दवाईयों का भी सहारा लेते हैं लेकिन वास्तव में आप कुछ घरेलू उपाय के जरिए भी बंद नाक को आसानी से खोल सकते हैं−

भाप के जरिए बंद नाक से आसानी से राहत पाई जा सकती है। इसके लिए बस एक बर्तन में गर्म पानी डालें और फिर बर्तन के ऊपर मुंह करके एक टावल की मदद से अपना मुंह ढक लें। कुछ देर तक स्टीम को महसूस करें। कुछ ही देर में बंद नाक खुलने लगेगी।

नाक बंद होने की स्थिति में खुद को हाइड्रेट अवश्य रखें। खासतौर से, इस दौरान गर्म पानी का ही सेवन करें। इससे आपको काफी राहत महसूस होगी। हाइड्रेटेड रहने पर नाक में मौजूद म्यूकस पतला होता है और जिससे आपके साइनस पर दबाव कम होता है। आप हाइड्रेट रहने के लिए गर्म पानी के साथ−साथ सूप या चाय आदि का सेवन भी कर सकते हैं।

आपको शायद जानकर हैरानी हो लेकिन प्याज भी बंद नाक से छुटकारा दिलाने में मददगार है। बस आपको इतना करना है कि प्याज को छीलकर करीबन 5 मिनट के लिए सूंघें। इससे आपको सांस लेने में आसानी होगी।

नींबू भी बंद नाक को खोलने में काफी कारगर होता है। इसके लिए करीबन दो टेबलस्पून नींबू के रस में आधा टीस्पून काली मिर्च पाउडर व एक चुटकी नमक मिलाकर उसे अपनी नाक पर लगाएं। अब इसे कुछ देर के लिए छोड़ दें। कुछ ही देर में आपको काफी राहत महसूस होगी।

तुलसी के औषधीय गुणों से हर कोई वाकिफ है। यह एक ऐसी जड़ी−बूटी है जो कई तरह की समस्याओं से आसानी से राहत दिलाती है। जुकाम या बंद नाक होने पर भी तुलसी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आप बस ताजा तुलसी के पत्तों को नाश्ते से पहले व रात को भोजन के बाद चबाएं। आप चाहें तो चाय में भी तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करें। इससे आपको काफी लाभ होगा।

शहद पोषक तत्वों से भरपूर है। अगर दो चम्मच शहद को गर्म पानी, दूध या चाय के साथ सेवन किया जाए तो इससे बंद नाक को खोलने में मदद मिलती है। खासतौर से, रात को सोने से पहले इसका सेवन अवश्य करें।


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एलीफैंट सफारी पर जाएं इन 8 जंगलों में, हौदे में बैठ कर करें सैर
16 Oct 2017
[ स.ऊ.संवाददाता ]

एलीफैंट सफारी पर जाएं इन 8 जंगलों में, हौदे में बैठ कर करें सैरएलीफैंट सवारी पर जंगलों को घूमने का अलग ही मजा है। आइए आपको कराते हैं भारत के प्रसिद्ध नेशनल पार्को की एक सैर...

1. कार्बेट नेशनल पार्क

जिम कार्बेट नेशनल पार्क भारत का सबसे पुराना राष्‍ट्रीय पार्क है। उत्‍तराखंड में स्‍थित यह राष्‍ट्रीय उद्यान खासतौर से बाघों के लिए जाना जाता है लेकिन यहां हाथी भी काफी संख्‍या में देखने को मिल जाते हैं। दुनिया के कोने-कोने से पर्यटक यहां आते हैं। हाथियों को देखना है तो आप शाम के समय इस जंगल सफारी की सैर पर निकलें। यहां कुछ अनुभवी गाइड भी रहते हैं जो आपको जानवरों की आदतों और उनक दिनचर्या के बारे में सटीक जानकारी दे सकते हैं।

2. बांधवगढ़ नेशनल पार्क

हाथी पर बैठकर जंगल सफारी का आंनद उठाना चाहते हैं तो अबकी बार मध्‍यप्रदेश के बांधवगढ़ नेशनल पार्क का टूर प्‍लॉन कर सकते हैं। इस राष्‍ट्रीय उद्यान में आप चाहें तो जीप में घूमते हुए टहलते हुए जानवरों को देख सकते हैं, वहीं एलीफैंट सफारी में हाथी की सवारी का अलग ही मजा है।

3. कान्‍हा नेशनल पार्क

मध्‍यप्रदेश में स्‍थित कान्‍हा नेशनल पार्क भी हाथियों के लिए जाना जाता है। बाघ के अलावा इस पार्क में हाथियों की संख्‍या काफी ज्‍यादा है। कान्हा में ऐसे अनेक दुर्लभ प्रजाति के जीव जन्तु मिल जाएंगे। पार्क के पूर्व कोने में पाए जाने वाला भेड़िया, चिन्कारा, भारतीय पेंगोलिन, समतल मैदानों में रहने वाला भारतीय ऊदबिलाव और भारत में पाई जाने वाली लघु बिल्ली जैसी दुर्लभ पशुओं की प्रजातियों को यहां देखा जा सकता है।

4. पेंच नेशनल पार्क

अनेक दुर्लभ जीवों वाला पेंच नेशनक पार्क पर्यटकों को तेजी से अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। हाथी पर बैठकर जंगल की सफारी का अनुभव काफी खास होता है।

5. काजीरंगा नेशनल पार्क

असम में स्‍थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध है। यहां अलग-अलग प्रजाति के जीव-जंतु देखने को मिल जाते हैं। अगर आप काजीरंगा में हाथी पर बैठकर जंगल की सैर करना चाहते हैं, तो आपको इसकी पूरी सुविधा मिलेगी।

असम के गुवाहाटी में स्‍थित मानस नेशनल पार्क विश्‍व धरोहरों में शामिल है। हिमालय की तलहटी में स्‍थित इस अभयारण्‍य में दुर्लभ वन्‍य जीव पाए जाते हैं। जिसमें कि हेपीड खरगोश, गोल्‍डन लंगूर और पैगी हॉग शामिल हैं। इन्‍हें देखने लोग दूर-दूर से आते हैं।

असम के डिब्रूगढ़ में स्‍थित सैखोवा नेशनल पार्क मुख्‍य रूप से सफेद पंखों वाले देवहंस के संरक्षण के लिए बनाया गया था। बाद में यह राष्‍ट्रीय उद्यान जंगली घोड़ों और चमकदार सफेद पंखों वाली बतख के रूप में प्रसिद्ध हो गया। यहां पक्षियों की करीब 350 से ज्‍यादा प्रजातियां पाई जाती हैं।कर्नाटक में स्‍िथत नागरहोल अपने वन्‍य जीव अभयारण्‍य के लिए विश्‍व प्रसिद्ध है। यह उन जगहों में से है जहां एशियाई हाथी पाए जाते हैं। यहां हाथियों के बड़े-बड़े झुंड देखे जा सकते हैं। वहीं बारिश होते ही दूर-दूर से पक्षी यहां आ जाते हैं।


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भारत के वंडरलैंड इंफाल जायें तो ये जगह जरूर देखें
21 Aug 2017
[ स.ऊ.संवाददाता ]

इंफाल। यहां खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के बीच आप पाएंगे जीवंत उत्सवधर्मी लोग, सहेजी हुई प्राचीन धरोहरें और भारत की सतरंगी सांस्कृतिक परंपराओं की सुंदर झलक। यहां हरियाली से भरे मखमली पहाड़ों के बीच एक जादूई दुनिया सी बसी नजर आती है। यहां पहाड़ों की गोद मे बसे छोटे-छोटे गांवों से होकर गुजरना भी कम अचरज भरा अहसास नहीं। इस जगह की खूबसूरती के बयान मे सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है कि यहां के प्राकृतिक नजारे अभी तक अनछुए हैं। इस राज्य के पास प्राकृतिक का अमूल्य वरदान है। अगर आप ईको टूरिज्म में रुचि रखते हैं तो यह जगह आपके लिए स्वर्ग के समान है। पहाड़ों के बीचों बीच बसे अंडाकार कटोरे के आकार वाली जगह को देखकर आप बरबस कह उठेंगे सचमुच हमारा देश है रंग-बिरंगा और इसमें इंफाल का रंग है सबसे अलहदा, सबसे जुदा। तो इस जादू को देखने जरूर जायें इंफाल और इन खास जगहों को देखना ना भूलें।

इंफाल से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लोकटक लेक। यह मणिपुर की सबसे बड़ी फ्रेश वॉटर लेक है। इसमें तैरते हुए घास के टापू पाए जाते हैं। यह केवल लेक नहीं घर है लगभग 233 जलीय वनस्पतिक प्रजातियों का,100 से ज्यादा पक्षियों और 425 प्रजातियों के जंगली जीवों का। आप और भी हैरान होंगे जब पाएंगे इसी लेक के भीतर कई मछुवारों के गांव भी मौजूद हैं। यहां रहने वालों के लिए लोकटक लेक जीवनदायनी लेक हैं। पानी पर तैरते छोटे-छोटे घास के टापू किसी जादुई दुनिया के देश जैसे लगते हैं, जो आज यहाँ तो कल तैर कर कहीं और पहुंच जाते हैं। जैव विविधता से परिपूर्ण इस जादुई माहौल में एक और सुंदर जगह है जिसका नाम है सैंड्रा पार्क एन्ड रिजॉर्ट। यह एक टूरिस्ट लॉज है जहां पर सैलानी ठहर सकते हैं।

इंफाल में बेहद खास है ईमा मार्केट। यहां के लोगों की मानें तो यह मार्केट सोलहवीं शताब्दी से अस्तित्व मे है। मणिपुरी समाज की रीढ़ की हड्डी मानी जाने वाली महिलाएं इस मार्केट का संचालन करती हैं। यह एशिया की सबसे बड़ी मार्केट है जिसे पूरी तरह से महिलाएं चलती हैं। यहां लगभग 4000 महिलाएं व्यापार करती हैं। मणिपुरी भाषा मे ईमा का मतलब होता है मां और यहां सही मायनों मे माएं ही हैं जो दुकाने चलती हैं। ईमा मार्केट के दो भाग हैं एक भाग में सब्जी, मछली, मसाले व घर का अन्य समान मिलते हैं। भांति भांति की मछलियाँ, फल-फूल, पूजा का समान, सूखे मसाला, मटके और ना जाने क्या क्या। अगर आप शॉपिंग करते करते थक गए हैं और भूख भी लगने लगी है तो यहीं मार्केट के बीचों बीच कोई ईमा आपको ताजी पकाई हुई मछली और भात भी खिला देगी। यहां छोटा-सा लाईव किचन चलाने वाली ईमा भी होती हैं जोकि मुनासिब पैसों में भरपेट भोजन उपलब्ध करवाती हैं। थोड़ी दूर जाने पर दूसरी मार्केट है जहां हाथ के बने कपड़े बिकते हैं। यहां से आप मणिपुर का पारंपरिक परिधान खरीद सकते हैं और वहीं पर सिलाई मशीन के साथ बैठी महिलाओं से सिलवा भी सकते हैं।

ईमा मार्केट के पीछे दुनिया का सबसे पुराना पोलो ग्राउंड बना हुआ है, जिसका नाम है 'मापाल कंगजेबुंग'। यहां के अधिकतर लोग आदिवासी जनजातियों से ताल्लुक रखते हैं। इसलिए उनके हाव भाव और खेलने के तरीके थोड़े 'वाइल्ड' हैं। यही वजह है कि यहां खेला जाने वाला पोलो खेल शुरूवात में बहुत आक्रामक होता था, जिसमें कोई नियम कोई कानून नही होता था। बस खिलाडियों को किसी भी तरीके से जीतना होता था। बाद में अंग्रेजों ने इस खेल को खेलने के नियम बनाए और समय के साथ यह खेल परिष्कृत होता गया। आज पूरे विश्‍व मे यह खेल अपनी नज़ाकत और नफ़ासत के चलते कुलिन लोगों की पहली पसंद माना जाता है। मणिपुर में इस खेल को हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्‍तर पर खिलाने के लिए संघाई फेस्टिवल के समय 10 दिनो के लिए टूर्नामेंट का आयोजन किया जाता है। जिसमें पूरी दुनिया से टीमें आती हैं। इस खेल की लोकप्रियता का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं की मणिपुर मे लगभग 35 पोलो क्लब हैं।

मणिपुर को देश की 'ऑर्किड बास्केट' भी कहा जाता है। यहाँ ऑर्किड पुष्प की 500 प्रजातियां पाई जाती हैं। समुद्र तल से लगभग 5000 फीट की ऊंचाई पर स्थित शिरोइ हिल्स में एक खास प्रकार का पुष्प शिरोइ लिली पाया जाता है। शिरोइ लिली का यह फूल पूरी दुनिया मे सिर्फ मणिपुर में ही पैदा होता है। इस अनोखे और दुर्लभ पुष्प की खोज एक अंग्रेज फ्रैंक किंग्डम वॉर्ड ने 1946 में की थी। यह खास लिली केवल मानसून के महीने में पैदा होता है। इसकी ख़ासियत यह है कि इसे माइक्रोस्कोप से देखने पर इसमे सात रंग दिखाई देते हैं। फ्रैंक किंग्डम वॉर्ड द्वारा खोजे गए इस अनोखे लिली को 1948 में लन्दन स्थित रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी ने मेरिट प्राइज से भी नवाजा था। हर वर्ष उखरूल जिले में शिरोइ लिली फेस्टिवल का आयोजन बड़ी धूम धाम से होता है। इसे देखने दूर दूर से लोग मणिपुर आते हैं।

बीर टिकेंद्राजीत पार्क के बीचों बीच बनी यह शहीद मीनार अपनी मातृभूमि के लिए अंग्रेजों के खिलाफ वर्ष 1891 मे अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर आदिवासियों योद्धाओं की याद में बनाई गई है। मणिपुर मे पाए जाने वाले 34 प्रकार के आदिवासी जनजातियों का अपनी मातृभूमि से विशेष लगाव रहा है। यो कहें कि इन आदिवासी जनजातियों का प्रकृति के साथ एक अटूट रिश्ता है, जिसकी झलक इनके पूरे जीवन को देखने से मिलती है।

पोलो ग्राउंड के साथ ही एक और महत्वपूर्ण जगह है मणिपुर स्टेट म्यूजियम। मणिपुर की ऐतिहासिक- सांस्कृतिक विरासत के नजदीक से दर्शन करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण जगह है। इस संग्रहालय में मणिपुर के राज परिवार के जीवन की झलक और यहाँ के आदिवासी जीवन की झलक एक ही छत के नीचे देखने को मिल जाती है। इस संग्रहालय का मुख्य आकर्षण है 78 फीट लंबी शाही बोट। छोटा-सा दिखने वाला यह संग्रहालय अपने में 34 आदिवासी जनजातियों व समूहों के जीवन से जुड़ी कुछ नायाब वस्तुओं को समेटे हुए है। यह संग्रहालय सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक ही खुलता है।इंफाल सिटी के बीचों बीच एक नहर के दायरे के भीतर बना कांगला फोर्ट बरबस ही अपनी ओर ध्यान आकर्षित कर लेता है। यह फोर्ट सदियों से मणिपुर की राजनीति का केंद्र रहा है। इसका शाही दरवाज़ा चीनी वास्तुकला से प्रभावित है। इसके भीतर एक म्यूजियम भी है, जिसका नाम कांगला म्यूजियम है। इस पैलेस पर यहां के 7 राजाओं ने राज किया है। आज इस पैलेस का कुछ भाग खंडहर में तब्दील हो चुका है। इस पैलेस ने मणिपुर के राजशाही पाखांगबा का स्वर्णिम वैभव देखा और 1891 में आंग्लो-मणिपुर वॉर का अंधकारमय समय भी देखा है, जब मणिपुर को तीन दिशाओं से घेर लिया गया था। उस समय मे इंफाल की राष्ट्रीय धरोहर की बड़ी क्षति हुई। पैलेस के प्रांगण में बने दो सफेद कांगला-शा के विशाल स्टैचू भी तोड़ दिए गए थे। बाद में 2007 में दोबारा जीर्णोधर करके इसे स्थापित किया गया। कांगला-शा का मितिस समाज में बड़ा महत्व है। ऐसा माना जाता था कि जब भी महाराजा को कोई बड़ी चिंता आ घेरती थी तब इन राष्ट्रीय प्रतीकों की उपासना की जाती थी। यह मीतीस के राष्ट्रीय प्रतीक थे।

यहीं कांगला पैलेस के प्रांगण मे कांगला-शा के नजदीक ही एक बहुत सुंदर मंदिर भी है, जिसका नाम लॉर्ड सानमही टेंपल है। इसका निर्माण प्रमिड वास्तुकला से मिलता जुलता है, मातेई समाज की आराधना पद्धति में प्रकृति का बड़ा महत्व है। ये लोग प्रकृति की हर चीज की पूजा करते हैं। यह मंदिर भगवान सूर्य को समर्पित है। नदी, पहाड़, सूरज, चंद्रमा, जंगल, जीव जन्तु, सांप आदि इनके लिए पूजनीय हैं।


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दुनिया के 10 सबसे मायूस करने वाले टूरिस्‍ट प्‍लेस, फिर भी जाने वालों की लगी रहती है होड़
05 Jul 2017
[ स.ऊ.संवाददाता ]

टाइम्स स्क्वायर-न्यूयॉर्क:

यह न्‍यूयार्क का काफी फेमस प्‍लेस है। यहां पर लोग महज शानदार रोशनी देखने के ल‍िए आते हैं। शाम के समय पर काफी भीड़ होती है। जबक‍ि हकीकत में देखा जाए तो यहां पर कुछ ऐसा खास नही है। दूसरे बड़े शहरों की तरह यहां का नजारा भी लगभग वैसा ही है। लोगों की भीड़ इतनी होती है क‍ि चलना मुश्‍ि‍कल होता है। कोई खास सामान भी नहीं ख्‍ारीदा जा सकता है। यहां घूमने के समय कुछ भी खरीदना महज पैसे की बर्बादी करना है।

घास के मैदान-नेबरास्‍का:

यहां जाने का मतलब है कि‍ आप यहां पर पर दशकों पुराना नेबरास्‍का देखने जा रहे हैं। यहां पर घास, जमीन और आसामान से घ‍िरे होने के अलावा कुछ खास नहीं है। कोई महत्‍वपूर्ण स्‍थल भी नही है। जि‍ससे इस जगह पर महज 10 म‍िनट बाद ही ऊब महसूस होने लगती है। इसकी अपेक्षा आप क‍िसी शहरी पार्क को देखना ज्‍यादा पसंद करेंगे। बावजूद इसके यहां पर बड़ी संख्‍या में लोग घूमने आते हैं।

मैडम तुसाद:

हर जगह के मैडम तुसाद में जाने पर जरूरी नहीं क‍ि अच्‍छा लगे क्‍योंक‍ि आप हमेशा ही फेमस सेलेब्रेटी को देखना नहीं पसंद करेंगे। वहीं इसके अलावा मोम के बने सेलेब्‍स को देखने जाना महज पैसे और टाइम की बर्बादी के अलावा कुछ नहीं है, क्‍योंक‍ि उनका ऐसा लुक तो बाहर भी द‍िखता है। इसके अलावा यह भी न‍िर्भर करता है क‍ि आप क‍िस हस्‍ती के फैन है और क‍िसे देखना चाहते हैं। अब जैसे हांगकांग का तुसाद चाइनीज‍ स्‍टार्स अध‍िक हैं। इसके अलावा ब्रिट‍िश के संग्रहालय में ड‍ेव‍िड कैमरून और पूर्व प्रधानमंत्री के पुतले लगे हैं। इसके बाद भी लोग इनमें जाने के ल‍िए एक्‍साइटेड द‍िखते हैं।

दुबई-यूएई:

दुबई-यूएई भी इन जगहों में से एक है। अगर आप धरती पर सबसे हॉट प्‍लेस पर घूमना चाहते हैं तो आप मायूस न हो। दुबई-यूएई में धूल, रेत, गगनचुंबी इमारतें भी देखने को म‍िलेगी। हालांक‍ि ये सब साफ ब‍िल्‍कुल नकली लगती है। इसके अलावा यहां पर लोग दुन‍िया की सबसे ऊंची ब‍िल्‍ि‍डंग बुर्ज खलीफा को देखने के ल‍िए भी एक्‍साइटेड रहते हैं। जबक‍ि हकीकत ये है क‍ि दुबई काफी महंगा है। यहां पर घूमने का मतलब है क‍ि पैसे की काफी बर्बादी होना है।

इक्‍वेटर-इक्वाडोर:

इक्‍वेटर पृथ्वी की सतह पर अधिकतर भूमध्य रेखीय क्षेत्र समुद्र का भाग है। यह इक्वाडोर के दक्षिणी ढाल पर है। वर्षा ऋतु और अधिक ऊंचाई के भागों को छोड़कर, भूमध्य रेखा के निकट पूरे साल टैंपरेचर काफी हाई रहता है। यहां पर भी लोग बड़ी संख्‍या में जाते है।

प‍िराम‍िड-गीजा:

गीजा का ग्रेट प‍िराम‍िड भी इन खूबसूरत जगहों में एक है, लेकि‍न दुर्भाग्‍य से यह एक नीरस करने वाली जगहों में भी एक है। यहां पर पयर्टक बहुत सी उम्‍मीदों के साथ पहुंचते हैं लेक‍िन बाद में बहुत से लोग स‍िवाय श‍िकायतों के कुछ नहीं करते हैं। इस प्राचीन स्‍थल पर जाने का रास्‍ता काफी खराब है।

जमैका:

अगर आप ट्रोप‍िकल वेकेशन डेस्‍ट‍ीनेशन पर जमैका जाने से पहले दो बार सोच लेना। यह काफी खूबसूरत जगह है लेक‍िन हां बहुत से लोगों का कहना है क‍ि यहां बीच काफी गंदे रहते हैं। सावर्जन‍िक समु्द्र तटों पर बहुतायत में गंदगी-कूड़ा रहता है। हालांक‍ि फ‍िर भी यहां बड़ी संख्‍या में लोग जाते हैं।

लागोस-नाइजीरिया:

अमीर शहरों में ग‍िना जाने वाला लागोस पयर्टकों के ल‍िए काफी खतरनाक है। यहां पर भीड़ बहुत ज्‍यादा होती है। पर्यटकों के मुताब‍िक यह जगह कुछ खास अट्रैक्‍ि‍टव नहीं है। वहीं एक वेबसाइट के मुताब‍िक यहां पर भीड की वजह से जगह-जगह सुरक्षा कर्मी भी तैनात रहते हैं। वहीं ट्रैफ‍िक इतना ज्‍यादा होता है क‍ि कई बार एक क‍िलोमीटर की ड्राइव‍िंग में करीब 4 घंटे का समय लग जाता है।

मिनेसोटा मॉल-अमेरिका:

मिनेसोटा मॉल को मॉल ऑफ अमेरिका भी कहा जाता है। यहां पर देश के दूसरे मॉल की अपेक्षा अध‍िक दुकाने हैं। हकीकत में देखा जाए तो यह कुछ ही आगंतुको के ल‍िए पसंदीदा जगह साब‍ित होता है। बड़ी संख्‍या में लोग यहां आने के बाद न‍िराश होकर ही लौटते हैं। यहां पर भारी भीड़ में चलना मुश्‍ि‍कल होता है।

हॉलीवुड वॉक ऑफ फेम-कैलिफोर्निया:

यह भी कैलि‍फोर्निया का फेमस प्‍लेस है। इस शहर में स्‍टार को नारमल फुटफाथ पर घूमते देखा जा सकता है। यह क‍िसी रोमांच से कम नही है लेक‍िन एक वेबसाइट के मुताबि‍क अब यह जगह काफी बोर‍िंग होती जा रही है। यहां स्‍टूड‍ियो को देखने जाने पर मायूसी फील होती है। अब इस एरि‍या में होटल और बार की अध‍िकता हो चुकी है। इसके अलावा यहां पर स्‍लमएर‍िया के लोगों का भी जमावड़ा रहता है।




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