अन्तर्राष्ट्रीय

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पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के बीच कल होगी वर्चुअल बैठक, जानिए किन मुद्दों पर होगी बात

10 Apr 2022 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ वर्चुअल बैठक में हिस्सा लेंगे। दोनों शीर्ष नेता भारत और अमेरिका के बीच चल रहे द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करेंगे और दक्षिण एशिया, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और आपसी हित के वैश्विक मुद्दों पर हाल के घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने दी है।मंत्रालय ने कहा कि वर्चुअल बैठक दोनों पक्षों को द्विपक्षीय व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से अपने नियमित और उच्च-स्तरीय जुड़ाव को जारी रखने में सक्षम बनाएगी।

दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की यह वर्चुअल बातचीत भारत-अमेरिका के बीच होने वाली चौथी 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता से पहले होगी। टू प्लस टू वार्ता में हिस्सा लेने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका पहुंचे हुए हैं। टू प्लस टू वार्ता का नेतृत्व भारतीय पक्ष में राजनाथ सिंह और एस जयशंकर और उनके अमेरिकी समकक्ष रक्षा सचिव लायड आस्टिन और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन करेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार टू प्लस टू वार्ता में दोनों देशों को विदेश नीति, रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग से जुड़े तमाम मुद्दों पर विमर्श करने का मौका देगा। भारत और अमेरिका रणनीतिक साझेदार हैं और इस बैठक में क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विमर्श होगा। अमेरिका ने इस साल की बैठक को इस लिहाज से महत्वपूर्ण बताया कि इस वर्ष दोनों देश कूटनीतिक रिश्तों के स्थापित होने की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।



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ब्राजील के राष्ट्रपति ने ओमिक्रॉन का किया स्वागत तो WHO ने लगाई लताड़

13 Jan 2022 [ स.ऊ.संवाददाता ]

देश-दुनिया में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का खौफ साफ नजर आ रहा है। लेकर दुनियाभर में दहशत का माहौल कायम है। टीकाकरण और बूस्टर डोज पर खासा जोर दिया जा रहा है। लेकिन एक देश ऐसा भी है जो इस जानलेवा वायरस का स्वागत कर रहा है। जिसकी वजह से उसकी काफी वजीहत भी हो रही है। ये तो सभी को पता है कि ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो कोरोना को लेकर अक्सर विवादित बयान देते रहते हैं। लेकिन अब बोल्सोनारो ने कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन को स्वागत योग्य वेरिएंट करार दिया है। जिसकी वजह से उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन की नाराजगी भी झेलनी पड़ी है। डब्ल्यूएचओ ने साफ कहा कि किसी की जान लेने वाले वायरस को स्वागत योग्य कतई नहीं कहा जा सकता है।

ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने कहा कि देश और विदेश में कोविड के मामलों में वृद्धि करने वाले ओमिक्रॉन स्ट्रेन को "वैक्सीन वायरस" कहा जा सकता है और यह एक "स्वागत" योग्य वेरिएंट है। बोल्सनारो ने बुधवार को गज़ेटा ब्रासिल वेबसाइट के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि कुछ स्टडीज में पाया गया है कि ओमिक्रॉन वास्तव में महामारी के अंत का संकेत दे सकता है। बोल्सनारो के बयान पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सख्त लहजे में कहा है कि लोगों को मारने वाले किसी वायरस का स्वागत नहीं किया जा सकता है। जिनेवा में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान डब्ल्यूएचओ के इमर्जेंसी डायरेक्टर माइक रयान ने कहा कि ओमिक्रॉन का संक्रमण कम गंभीर है, इसका मतलब ये नहीं है कि ये एक हल्की बीमारी है। ब्राज़ील दुनिया का तीसरा देश है, जहां कोरोना के सबसे ज़्यादा एक करोड़ 60 लाख मामले दर्ज किए गए। लेकिन पिछले दो वर्षों में वायरस से मरने वाले 600,000 से अधिक ब्राजीलियाई लोगों के बावजूद, बोल्सोनारो महामारी के सामने अपने अड़ियल रवैये को बरकरार रखा और बार-बार इसे एक "फ्लू" करार दिया है। इसके अलावा ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो का टीकाकरण विरोधी रूख भी खासा चर्चा में रहा। राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने अपनी बेटी को टीका लगवाने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा कि वो अपनी 11 साल की बेटी को कोविड​​​​-19 के खिलाफ टीकाकरण नहीं कराएंगे।



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ओमिक्रोन को लेकर डब्‍ल्‍यूएचओ चीफ ने किया आगाह

07 Jan 2022 [ स.ऊ.संवाददाता ]

जिनेवा (एएनआई)। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के प्रमुख टैड्रोस अघनोम घेबरेयसस का कहना है कि कोराना वायरस के नए वैरिएंट के मामले कम खतरनाक हो सकते हैं लेकिन ये बेहद कम लक्षण वाले नहीं हो सकते हैं। उन्‍होंने ये भी कहा कि ये पहले आए डेल्‍टा वैरिएंट के मुताबिक कम घातक हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है इसको कम लक्षण वाली श्रेणी में रख दिया जाए। एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के प्रमुख ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के करीब 109 देशों में जुलाई 2022 तक केवल 70 फीसद लोगों को ही वैक्‍सीन लग सकेगी।

डाक्‍टर टैड्रोस का कहना है कि कोरोना महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक पिछले सप्‍ताह सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। ये तब हो रहा है जब डेल्‍टा वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रोन कम खतरनाक है। खासतौर पर वहां जहां पर लोगों को वैक्‍सीनेट किया जा चुका है। इसके बावजूद इसको कम लक्षण वाली श्रेणी में नहीं कहा जा सकता है। उन्‍होंने साफतौर पर कहा कि ओमिक्रोन से संक्रमित लोग अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं और इसकी वजह से मौत भी हो रही हैं, जैसे पहले भी हुई हैं।जहां तक इसकी सुनामी की बात है तो ये काफी जल्‍द और काफी बड़ी है। इसके लिए हमें अपने स्‍वास्‍थ्‍य सेवा को जल्‍द से जल्‍द पूरी दुनिया में बेहतर करना होगा। अस्‍पताल पहले से ही मरीजों से भरे हुए हैं। इसकी वजह से न केवल कोरोना की वजह से मौत हो रही हैं बल्कि दूसरी बीमारियों की वजह से भी लोगों की जान जा रही है। जिन घायलों को समय पर सही इलाज नहीं मिल रहा है उनकी भी मौत हो रही है।प्रेस कांफ्रेंस के दौरान संगठन के प्रमुख ने एक बार फिर से कोरोना रोधी टीके के असमान वितरण पर अपनी चिंता जाहिर की। उन्‍होंने कहा कि पिछले वर्ष सबसे बड़ी कमी यही रही है कि वैक्‍सीन का एक समान वितरण नहीं हो सका। उनके मुताबिक एक देश में जहां जरूरत से अधिक प्रोटेक्टिव इक्‍यूपमेंट्स थे तो वहीं दूसरी तरफ कई देश ऐसे भी थे जहां पर इनकी जबरदस्‍त कमी थी। ऐसे देशों में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए आधारभूत जरूरतों का भी अभाव था। वैक्‍सीन के असमान वितरण की वजह से पिछले वर्ष कई मौत हुईं। इसकी वजह से विश्‍व को इस समस्‍या से उबरने में भी समय लगा।डाक्‍टर टैड्रोस ने कहा कि फ्रांस के अस्‍पताल के मुताबिक कोरोना वायरस का नया वैरिएंट B.1.640.2 जिसको आईएचयू वैरिएंट के नाम से भी जाना जा रहा है, कैमरून से लौटे पर्यटकों में मिला है। इससे संक्रमित होने वालों की संख्‍या करीब 12 है।



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अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल से मिले पीएम मोदी, द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने पर हुई बातचीत

13 Nov 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यहां अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित आपसी हित के क्षेत्रीय मुद्दों पर स्पष्ट चर्चा की। प्रधा मंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पीएम मोदी ने सीनेटर जान कार्निन के नेतृत्व में अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें सीनेटर माइकल क्रापो, सीनेटर थामस ट्यूबरविले, सीनेटर माइकल ली, कांग्रेसी टोनी गोंजालेस और कांग्रेसी जान केविन एलीजे सीनियर शामिल थे।

सीनेटर जान कार्निन भारत और भारतीय अमेरिकियों पर सीनेट काकस के सह-संस्थापक और सह-अध्यक्ष हैं। जारी बयान के मुताबिक, 'कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बड़ी और विविध आबादी की चुनौतियों के बावजूद भारत में COVID-19 स्थिति को अच्छे से काबू करने का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के लोकतांत्रिक लोकाचार पर आधारित लोगों की भागीदारी ने पिछली एक सदी की सबसे भीषण महामारी के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।'

बताया गया कि पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने में अमेरिकी कांग्रेस के निरंतर समर्थन और रचनात्मक भूमिका की सराहना की, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित है। बयान में कहा गया, दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से संबंधित मुद्दों सहित आपसी हित के क्षेत्रीय मुद्दों पर गर्मजोशी से और स्पष्ट चर्चा हुई।आगे कहा गया है कि पीएम मोदी और आने वाले प्रतिनिधिमंडल ने दो रणनीतिक भागीदारों के बीच रणनीतिक हितों के बढ़ते अभिसरण पर ध्यान दिया और वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सहयोग को और बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।बयान में कहा गया है कि पीएम मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने और आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के लिए विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला जैसे समकालीन वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।



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प्रोफेसर बिमल पटेल अंतरराष्ट्रीय कानून आयोग के लिए निर्वाचित, 1 जनवरी 2023 से शुरू होगा कार्यकाल

13 Nov 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

संयुक्त राष्ट्र। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य प्रोफेसर बिमल पटेल अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग में पांच वर्ष के लिए निर्वाचित हुए हैं। उनका कार्यकाल एक जनवरी, 2023 से शुरू होगा।संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरमूर्ति ने ट्वीट में कहा, 'रक्षा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बिमल पटेल को अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग में सदस्य के रूप में चुने जाने के लिए हार्दिक बधाई।' तिरमूर्ति ने भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों का आभार जताया है।51 वर्षीय पटेल को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा 192 सदस्यों में से 163 वोट मिले। वह वह एशिया-प्रशांत समूह में शीर्ष पर रहे। इस समूह में चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के उम्मीदवार भी थे। एशिया-प्रशांत समूह में आठ सीटों के लिए 11 बेहद मजबूत उम्मीदवार होने से मुकाबला कड़ा हो गया था।चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद भारत के स्थायी मिशन ने ट्वीट में बताया, 'भारत के प्रोफेसर बिमल पटेल को पांच साल के कार्यकाल के लिए अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग (आइएलसी) में निर्वाचित किया गया है। आइएलसी में हमारा योगदान नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।'



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यूएन महासभा में भाषण के बाद सुरक्षा प्रोटोकाल तोड़कर भारतीयों के बीच पहुंचे पीएम मोदी, लगे भारत माता की जय के नारे

25 Sep 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

न्‍यूयार्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर करारा हमला बोला। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा को संबोधित करने के बाद पीएम मोदी न्‍यूयार्क में सुरक्षा प्रोटोकाल की परवाह किए बगैर भारतीयों के बीच पहुंचे। इस दौरान लोगों में सेल्‍फी लेने की होड़ देखी गई। भारतीय मूल के लोग पीएम मोदी से हाथ मिलाने के लिए बेताब नजर आए.... समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक न्यूयॉर्क में अपने होटल के बाहर जमा लोगों से मिलने के बाद पीएम मोदी जान एफ कैनेडी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए प्रस्थान करने वाले हैं। इसी एयरपोर्ट से वह भारत के लिए रवाना होंगे। मालूम हो कि इससे पहले अमेरिका पहुंचने के बाद भी पीएम मोदी ने वाशिंगटन डीसी में इसी अंदाज में भारतीय लोगों से मुलाकात की थी। तब भी भीड़ ने जोरदार तरीके से भारत माता की जय के नारे लगाए थे।समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक पीएम मोदी की यात्रा के दौरान अमेरिका की ओर से 157 कलाकृतियां और पुरावशेष सौंपे गए। प्रधानमंत्री ने अमेरिका द्वारा भारत को पुरावशेषों की वापसी के लिए आभार व्‍यक्‍त किया। जारी बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन सांस्कृतिक वस्तुओं की चोरी, अवैध व्यापार और तस्करी से निपटने के अपने प्रयासों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।गौरतलब है कि पीएम मोदी ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के लिए पहुंचे पीएम मोदी की एक झलक पाने के लिए शुक्रवार को व्हाइट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी लोग जमा हुए थे। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक बेहद उत्साहित दिख रहे ये भारतवंशी हाथों में बैनर और भारतीय झंडे लिए नजर आ रहे थे।पीएम मोदी ने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में दिए अपने संबोधन में विश्व व्यवस्था, कानून और मूल्यों को बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सशक्तीकरण की जरूरत को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यदि वैश्विक संगठन प्रासंगिक बने रहना चाहता है तो उसे अपना प्रभाव और विश्वसनीयता बढ़ानी होगी। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बिना नाम लिए पाकिस्‍तान पर भी करारा हमला बोला।



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राष्ट्रपति बाइडन ने भारत के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया

25 Sep 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी पहली बैठक में रक्षा संबंधों को मजबूती देने और एक प्रमुख रक्षा भागीदार के रूप में भारत के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने यह जानकारी दी। राष्ट्रपति बाइडन ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया। ओवल कार्यालय में दोनों नेताओं की मुलाकात 60 मिनट के बजाय 90 मिनट से ज्यादा देर तक चली। विदेश सचिव श्रृंगला ने शुक्रवार को संयुक्त प्रेस वार्ता में संवाददाताओं से कहा, “राष्ट्रपति बाइडन ने रक्षा संबंधों को मजबूती देने और एक प्रमुख रक्षा भागीदार के रूप में भारत के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की।नेताओं ने रक्षा क्षेत्र में उन्नत औद्योगिक सहयोग को गहरा करने का स्वागत किया।” उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस के ओवल कार्यालय में बैठक के दौरान रक्षा क्षेत्र में सह-विकास, सह-उत्पादन और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्र के विस्तार पर जोर दिया गया। व्हाइट हाउस ने तथ्य पत्र (फैक्टशीट) में कहा कि 2016 के बाद से रक्षा सक्षम करने वाले चार प्रमुख समझौतों को संपन्न करने के बाद, अमेरिका और भारत ने प्रमुख रक्षा भागीदारों के रूप में महत्वपूर्ण प्रगति की है और अमेरिका सूचना साझाकरण, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यास, समुद्री सुरक्षा सहयोग, संपर्क अधिकारी आदान-प्रदान और साजो-सामान सहयोग को और बढ़ाने के लिए तत्पर है। इसने कहा कि अमेरिका-भारत रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार पहल (डीटीटीआई) को आगे बढ़ाते हुए, अमेरिका और भारत जुलाई में हवा में लॉन्च किए गए मानव रहित हवाई वाहनों के सह-विकास के लिए 2.2 करोड़ डॉलर की परियोजना पर सहमत हुए।डीटीटीआई में वर्तमान में चार कार्य समूह शामिल हैं, और इस वर्ष के अंत में वरिष्ठ अधिकारियों की अगली बैठक रक्षा औद्योगिक सहयोग का और विस्तार करेगी। इसने कहा कि अमेरिका भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है, जिसने अत्याधुनिक क्षमताओं की पेशकश की है, मसलन एफ/ए-18, एफ-15 ईएक्स, और एफ-21 लड़ाकू विमान; एमक्यू-9बी मानवरहित हवाई प्रणाली; आईएडडीडब्ल्यूएस मिसाइल प्रणाली; और अतिरिक्त पी-8आई समुद्री गश्ती विमान आदि।भारत की प्रमुख रणनीतिक हवाई परिवहन क्षमताएं इसकी सेना को हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे के लिए महत्वपूर्ण मानवीय राहत और निकासी अभियान प्रदान करने में सक्षम बनाती हैं। तथ्य पत्र के अनुसार, अमेरिकी वायु सेना और अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने हाल में भारत के C-130जे परिवहन विमान बेड़े के लिए रखरखाव प्रदान करने के लिए 32.9 करोड़ डॉलर का अनुबंध किया है।



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बिना नाम लिए PM मोदी ने PAK को लताड़ा, बोले- आतंकवाद के लिए न हो अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल

25 Sep 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

न्यूयॉर्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र को संबोधित करते हुए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का नाम लिए बिना ही उसे लताड़ा और अफगानिस्तान के हालात पर भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जो देश प्रतिगामी सोच के साथ-साथ आतंकवाद को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें यह समझना होगा कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना बहुत जरूरी है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने और आतंकी हमलों के लिए न हो। हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थिति का कोई देश अपने स्वार्थ के लिए एक टूल के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश न करे। उन्होंने कहा कि इस समय अफगानिस्तान की जनता को, महिलाओं और बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यक समुदाय को मदद की जरूरत है और इसमें हमें अपना दायित्व निभागा ही पड़ेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे समंदर भी हमारी साझा विरासत हैं। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम इन संसाधनों का उपयोग करें और उनका दुरुपयोग न करें। हमारे समंदर अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की जीवन रेखा भी हैं। हमें उन्हें विस्तार और बहिष्कार की दौड़ से दूर रखना चाहिए।



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तालिबानी शासन में भारत की कूटनीति की होगी असल परीक्षा, भारतीय निवेश को बचाने की बड़ी चुनौती

16 Aug 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

काबूल। अफगानिस्तान में तालिबान की सत्‍ता ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। अफगानिस्‍तान की सत्ता पर तालिबान का नियंत्रण भारत के लिए भी चिंता का सबब है। दो दशकों में भारत ने अफगानिस्तान में करीब 22 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि तालिबान के कब्जे के बाद क्या यह निवेश पूरी तरह फंस जाएगा। आखिर भारत की कौन सी बड़ी परियोजना संकट में है। अफगानिस्‍तान में भारतीय विदेश नीति की असल परीक्षा होगी। भारत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि अफगानिस्‍तान में अपने निवेश को कैसे सु‍रक्षित रखे। इसके अलावा चाबहार पोर्ट से मध्य एशिया को जोड़ने की योजना पर भी विराम लग सकता है।

प्रो. हर्ष पंत का कहना है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के प्रवेश के बाद बीते दो दशक में भारत ने भारी निवेश किया है। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक अफगानिस्तान में भारत के 400 से अधिक छोटे-बड़े प्रोजेक्ट हैं। अफगानिस्तान में चल रहे भारत के कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स पर नजर डालते हैं और ये भी देखते हैं कि फिलहाल मौजूदा समय में चल रही लड़ाई का इन पर क्या असर पड़ने वाला है।

उन्‍होंने कहा कि अफगानिस्तान में भारत के सबसे प्रमुख प्रोजेक्ट में काबुल में अफगानिस्तान की संसद है। इसके निर्माण में भारत ने लगभग 675 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसका उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में किया था। भारत-अफगान मैत्री को ऐतिहासिक बताया था। इस संसद में एक ब्लॉक पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर भी है।

अफगानिस्‍तान में सलमा डैम हेरात प्रांत में 42 मेगावॉट का हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट है। 2016 में इसका उद्घाटन हुआ था और इसे भारत-अफगान मैत्री प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता है। हेरात प्रांत अब तालिबान के कब्‍जे में है। इसके पूर्व तालिबान यह दावा कर चुका था कि डैम के आसपास के इलाकों पर अब उसका कब्जा है।

भारत बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन ने अफगानिस्तान में 218 किलोमीटर लंबा हाईवे भी बनाया है। ईरान के सीमा के पास जारांज से लेकर डेलारम तक जाने वाले इस हाईवे पर 15 करोड़ डॉलर खर्च हुए हैं। यह हाईवे इसलिए भी अहम है क्योंकि ये अफगानिस्तान में भारत को ईरान के रास्ते एक वैकल्पिक मार्ग देता है।

इस हाईवे के निर्माण में भारत के 11 लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी। जारांज-डेलारम के अलावा भी कई सड़क निर्माण परियोजाओं में भारत ने निवेश कर रखा है। जारांज-डेलाराम प्रोजेक्ट भारत के सबसे महत्वपूर्ण निवेश में से एक है। पाकिस्तान अगर जमीन के रास्ते भारत को व्यापार से रोकता है तो उस स्थिति में यह सड़क बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। तालिबानी नियंत्रण के बाद भारत के लिए एक बड़ा झटका होगा।

भारत की चाबहार परियोजना को लेकर भी काफी दिक्कत पैदा होने की संभावना है। भारत ईरान के इस पोर्ट के जरिये अफगानिस्तान को जोड़ने पर काम कर रहा था ताकि अफगानिस्तान को कारोबार के लिए पाकिस्तान पर निर्भर न होना पड़े। भारत की योजना इस पोर्ट के जरिए दूसरे मध्य एशियाई देशों को भी जोड़ने की रही है। अब पाकिस्तान और चीन के समर्थन से इन देशों को अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट की सुविधा मिल सकती है। चीन पहले ही कह चुका है कि वह अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारी निवेश करने का इच्छुक है। माना जा रहा है कि हाल में चीन के विदेश मंत्री और तालिबान नेताओं के बीच वार्ता में चीन-पाकिस्तान इकोनोमिक कारिडोर पर बात हुई है।

तालिबान के सत्ता में आने से भारतीय रणनीतिकार सबसे ज्यादा इसके केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं। पूर्व में भी पाकिस्तान ने तालिबान के जरिये इस राज्य में अशांति फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। कश्मीर में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए गठित संगठन जैश-ए-मुहम्मद को तैयार करने में तालिबान ने मदद की थी। इसके सरगना मसूद अजहर ने लगातार तालिबान के साथ काम किया है। यही नहीं, भारत के खिलाफ काम करने वाले कई आतंकी संगठन अभी भी तालिबान के साथ मिलकर अफगानिस्तान में लड़ाई लड़ रहे हैं। इनमें लश्कर, इस्लामिक स्टेट (जम्मू-कश्मीर) और अलकायदा शामिल हैं। पूर्व में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश के कई हिस्सों से इनके लोगों को गिरफ्तार किया है।



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तालिबान को लेकर चीन का बड़ा बयान, बोला- 'मैत्रीपूर्ण संबंध' विकसित करना चाहता है

16 Aug 2021 [ स.ऊ.संवाददाता ]

बीजिंग। दुनिया भर के लोग अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा किए जा रहे कृत्य को देखकर आहत हैं। तालिबान द्वारा रविवार को काबुल पर कब्जा कर लिया गया और फिर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी भी देश छोड़कर तजाकिस्‍तान चले गए हैं। इसके बाद वहां खौफ का माहौल है और अफगान में रह रहे लोग काबुल छोड़ने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। तालिबान के डर से लोग काबुल एयरपोर्ट पर जमा हो गए हैं। देश में तालिबान द्वारा किए जा रहे अत्याचार के बीच चीन की ओर से एक बड़ा बयान सामने आया है। चीन का कहना है कि वह तालिबान के साथ 'मैत्रीपूर्ण संबंध' चाहता है।चीन ने सोमवार को कहा कि वह तालिबान के साथ 'दोस्ताना संबंध' विकसित करने के लिए तैयार है। बता दें कि इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण के बाद चीन के लिए भी परेशानी खड़ी हो सकती है। ऐसे में इस दोस्ती के पीछे भी चीन की कोई चाल ना हो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने संवाददाताओं से कहा, 'चीन स्वतंत्र रूप से अपने फैसले लेने में समर्थ होने के अफगान लोगों के अधिकार का सम्मान करता है और अफगानिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध विकसित करना जारी रखना चाहता है।' बता दें कि चीन अफगानिस्तान के साथ 76 किलोमीटर (47 मील) की एक ऊबड़-खाबड़ सीमा साझा करता है।बीजिंग को लंबे समय से डर है कि शिनजियांग में मुस्लिम अल्पसंख्यक उइगर अलगाववादियों के लिए अफगानिस्तान एक मंच बन सकता है।हालांकि, तालिबान के एक शीर्ष स्तर के प्रतिनिधिमंडल ने पिछले महीने तियानजिन में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की, जिसमें वादा किया गया कि अफगानिस्तान को आतंकवादियों के बेस के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। बदले में, चीन ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता और निवेश की पेशकश की थी।बता दें कि शिनजियांग अफगानिस्तान के साथ एक संकरी सीमा साझा करता है और बीजिंग अपनी सीमा पर हिंसा फैलाने के डर से चिंतित है। चीन को लगता है कि तालिबान अफगानिस्तान पर नियंत्रण ले लेता है, तो चीन के क्षेत्रों में हलचल तेज हो जाएगी। शिनजियांग में चीन ने 10 लाख से अधिक उइगरों और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों के सदस्यों को आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करते हुए हिरासत में लिया है।



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