अन्तर्राष्ट्रीय

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जॉर्ज फ्लॉयड हत्या:अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प ने शांति की अपील की

03 Jun 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

वाशिंगटन। अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रम्प ने अफ्रीकी-अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में भड़के हिंसक प्रदर्शनों के मद्देनजर लोगों से कर्फ्यू का पालन करने, रास्तों से हटने और अपने प्रियजनों के साथ समय बिताने की अपील की। मेलानिया ने मंगलवार को कहा, ‘‘रात होने के साथ ही मैं सभी नागरिकों से कर्फ्यू का पालन करने, रास्तों से हटने और अपने प्रियजनों के साथ वक्त बिताने के लिए घरों के भीतर रहने का अनुरोध करती हूं।’’ प्रथम महिला ने ट्वीट किया, ‘‘सभी शहर, समुदाय और नागरिक सुरक्षित रहने के हकदार हैं और यह तभी हो सकता है जब हम शांति के लिए मिलकर काम करें।’’ इससे एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि वह ‘‘अपने देश और समुदायों को नुकसान पहुंचते’’ हुए देखकर दुखी हैं।

मेलानिया ट्रम्प ने एक ट्वीट कर हर किसी से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने और एक-दूसरे की देखभाल करने तथा इस महान देश में शांति कायम करने पर ध्यान केंद्रित करने का लोगों से आग्रह किया। एक ट्वीट में उन्होंने अमेरिकियों से अपने प्रदर्शन के दौरान उग्र रूप न लेने की भी अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की इजाजत है लेकिन हिंसा की कोई जगह नहीं है। मैंने कोविड-19 के दौरान अपने नागरिकों को एकजुट और एक-दूसरे की देखभाल करते देखा है और अब हम रुक नहीं सकते।’’ मेलानिया ने कहा, ‘‘जॉर्ज फ्लॉयड के परिवार के प्रति मेरी गहरी संवदेनाएं हैं। एक देश के तौर पर चलिए शांति और प्रार्थना पर ध्यान केंद्रित करें।



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अमेरिका, ब्रिटेन ने सुरक्षा परिषद में उठाया हांगकांग का मुद्दा, चीन ने दिया मिनीपोलिस का हवाला

30 May 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक आपात चर्चा में अमेरिका और ब्रिटेन ने हांगकांग पर चीन के विवादास्पद सुरक्षा कानून का मुद्दा उठाया जिससे नाराज चीन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को इसके बजाए मिनीपोलिस में प्रदर्शनकारियों पर अमेरिका के अत्यधिक बल प्रयोग और अश्वेत समुदायों के खिलाफ भेदभाव पर अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। अमेरिका और ब्रिटेन ने शुक्रवार को आपात चर्चा की मांग की जिसके बाद 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद ने हांगकांग के मुद्दे पर अनौपचारिक ऑनलाइन बैठक की। संयुक्त राष्ट्र के लिए अमेरिकी राजदूत केली क्राफ्ट ने कहा,‘‘ आज मैंने परिषद से एक सामान्य प्रश्न किया: क्या हम स्वतंत्रता पसंद करने वाले अन्य लोगों की तरह हांगकांग के लाखों नागरिकों के मानवाधिकारों और गरिमापूर्ण जीवन जीने के उनके तरीके का बचाव करने के लिए कोई सम्मानजनक रुख अपनाने जा रहे हैं या हम चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने और हांगकांग के लोगों पर अपनी इच्छा को थोपने की अनुमति देंगे जो अपनी स्वतंत्रता और जीवन की अपनी शैली को संरक्षित करने के लिए हमारी ओर देख रहे हैं? ” क्राफ्ट ने कहा कि अमेरिका दृढ़ है और संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों से आह्वान करता है कि वे चीन से अपने निर्णय को वापस लेने और इस संस्था तथा हांगकांग की जनता के प्रति अपनी अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने की मांग मे शामिल हों।वहीं बीजिंग ने इस पर पलटवार करने हुए कहा कि विधेयक को पारित करना पूरी तरह से चीन का आंतरिक मसला है, इसका सुरक्षा परिषद के कामकाज और अधिकारक्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन और रूस ने अमेरिका को जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या का जिम्मेदार ठहराया। झांग ने कहा,‘‘हमारा मानना है कि इस मुद्दे पर वक्त बर्बाद करने के बजाए परिषद को ऐसे मामलों पर ध्यान देना चाहिए और उन पर कार्रवाई करनी चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के तौर पर अंतराराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर ब्रेक्जिट का प्रभाव, अमेरिका और अन्य देशों की तरफ से लगाए गए एकतरफा प्रतिबंध, मिनीपोलिस में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग, अफ्रीकी अमेरिकी युवा की हत्या और अफ्रीकी अमेरिकियों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव।यह सूची अंतहीन हो सकती है। चीन इन मुद्दे पर आप के साथ मिल कर काम करने के लिए तैयार है।’’ चीन का समर्थन करते हुए रूस के पहले उप स्थाई प्रतिनिधि दिमित्री पोलीयांसिकी ने ट्वीट कर कहा,‘‘ सुरक्षा परिषद में हांगकांग का मुद्दा उठाना अमेरिका और ब्रिटेन का ‘अजीब कदम’ है। इसे परिषद के सदस्यों का बहुमत नहीं है। यह विभाजनकारी, द्वेषपूर्णमुद्दा है जिसका अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से कोई लेना देना नहीं है और ऐसे मुद्दे परिषद में नहीं लाए जाने चाहिए।’’ झांग ने कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन को हांगकांग के मुद्दे में दखल देना तत्काल बंद करना चाहिए। इस बीच चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने मुखपत्र में कहा कि अमेरिका द्वारा हांगकांग को दी गई कुछ व्यापारिक तरजीह को समाप्त करना चीन के आंतरिक मामले में घोर दखल है।



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अमेरिका ने पहले फंडिंग रोकी, फिर नाता तोड़ा

30 May 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोरोना के खिलाफ जंग में देशवासियों की एकजुटता को लेकर पीएम मोदी लगातार उसे सराह रहे हैं तो सुपर पावर अमेरिका कोरोना वायरस रोकने में नाकामी पर विश्व स्वास्थ्य संगठन पर अपना गुस्सा निकाल रहा है। कोरोना से अपने एक लाख से ज्यागा नागरिकों को खो चुके अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ) से अपना नाता तोड़ लिया है। डब्ल्यूएचओ की फंडिग रोकने के बाद अब अमेरिका ने संगठन के चीन के कब्जे में होने के आरोप लगाते हुए अपने संबंध भी तोड़ लिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि वो डब्ल्यूएचओ को दी जाने वाली मदद को किसी और संस्था में लगाएंगे। आज के इस रिपोर्ट में हम बताएंगे की कौन है डब्ल्यूएचओ और क्या है इसके अहम काम। साथ ही बताएंगे की कहां से आता है डब्ल्यूएचओ के पास पैसा और ये खर्च कहां होता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन या डब्ल्यूएचओ की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी। डब्ल्यूएचओ की स्थापना के समय इसके संविधान पर 61 देशों ने हस्ताक्षर किए थे। वर्तमान में इसके 194 सदस्य देश हैं। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनीवा शहर में है और अभी टेड्रोस एडहानॉम डब्ल्यूएचओ के प्रमुख हैं। यह एक वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी है यानी इसका मुख्य काम दुनियाभर में स्वास्थ्य समस्याओं पर नजर रखना और उन्हें सुलझाने में मदद करना है।दुनिया में स्वास्थ्य संबंधी रुझानों की निगरानी और आकलन करना भी इसकी जिम्मेदारी है। अपनी स्थापना के बाद से डब्ल्यूएचओ ने स्मॉल पॉक्स बीमारी को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई है और फिलहाल डब्ल्यूएचओ एड्स, इबोला और टीबी जैसी खतरनाक बीमारियों की रोकथाम पर काम कर रहा है।विश्व स्वास्थ्य संगठन में चार तरह की फंडिंग मिलती है। जिसमें मूल्यांकन योगदान, निर्दिष्ट स्वैच्छिक योगदान, कोर स्वैच्छिक योगदान और पीआईपी योगदान शामिल है।डब्ल्यूएचओ का वर्तमान फंडिंग पैटर्न के अनुसार साल 2019 की चौथी तिमाही के अनुसार, डब्ल्यूएचओ की फंडिंग में कुल योगदान 5.62 बिलियन डॉलर (करीब 432 अरब 17 करोड़ रुपये)के आसपास था, जिसमें मूल्यांकन योगदान 956 मिलियन डॉलर (73 अरब 50 करोड़ रुपये) का था, स्वैच्छिक योगदान 4.38 बिलियन डॉलर(336 अरब 76 करोड़ रुपये), कोर स्वैच्छिक योगदान 160 मिलियन डॉलर (12 अरब 30 करोड़ रुपये) औरा पीआईपी योगदान 178 मिलियन डॉलर (13 अरब 68 करोड़ रुपये) था।

डब्ल्यूएचओ को सार्वाधिक योगदान देने वाले देश

अमेरिका- 890

चीन- 441

जापान- 315

जर्मनी- 224

ब्रिटेन- 168

फ्रांस- 163

इटली- 121

ब्राजील- 108

(राशि करोड़ रुपये में)

(मूल्यांकन योगदान 31 मार्च 2020 तक)

विश्व स्वास्थ्य संगठन को फंड

वर्ष 2017 में अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ को तीन हजार करोड़ रूपए दिए।

ये डब्ल्यूएचओ को उस वर्ष मिलने वाली कुल रकम का 17 फीसदी है।

वर्ष 2010 से 2017 के बीच अमेरिका ने 811 करोड़ से 864 करोड़ दिए।



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अमेरिका और विश्व के तमाम नेताओं को कोरोना के फिर लौटने की आशंका

11 May 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

ह्यूस्टन। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों को कोरोना वायरस प्रकोप के जल्द फिर से लौटने की आशंका है लेकिन उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है। व्हाइट हाउस के भीतर महामारी की चुनौतियां अब भी देखने को मिल रही हैं जहां उपराष्ट्रपति माइक पेंस अपने एक सहयोगी के संक्रमित पाए जाने के बाद “पृथक-वास” में चले गए हैं। पूरी दुनिया में वायरस के प्रकोप के बीच संतुलन बिठाने की कोशिश की जा रही है जहां वैश्विक नेता लॉकडाउन में छूट देने के साथ ही संक्रमण के दूसरे दौर के प्रति भी आगाह कर रहे हैं। राजकोषीय मंत्री स्टीवन मनूशिन ने अनुमान जताया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था दूसरी छमाही में बेरोजगारी दर को कम कर मंदी से उबर जाएगी। पिछले हफ्ते और 32 लाख लोगों ने बेरोजगारी भत्तों के लिए आवेदन किया था जिससे पिछले सात हफ्तों में ऐसे लोगों की कुल संख्या 3.35 करोड़ हो गई है।मनूशिन ने कहा, ‘‘मेरे विचार उछाल देखने को मिल सकता है।” लेकिन व्हाइट हाउस समर्थित कोरोना वायरस प्रतिमान तैयार करने वाले वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के एक संस्थान के निदेशक ने कहा है कि कारोबारों को फिर से खोलने की कार्रवाई के 10 दिनों के भीतर ज्यादा मौतें और मामले सामने आ सकते हैं।” इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मीट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के डॉ क्रिस्टोफर मुर्रे ने कह कि जहां मामले और मौत अनुमान से ज्यादा हो रहे हैं उनमें इलिनोइस, एरिजोना और कैलिफोर्निया शामिल हैं। जोखिम अब भी खत्म नहीं हुआ है, इसकी याद दिलाते हुए पेंस ने यह कदम तब उठाया है जब व्हाइट हाउस के कोरोना वायरस कार्यबल के तीन सदस्य संक्रमित सहयोगी के साथ संपर्क में आने के बाद पृथक-वास में चले गए थे

ब्रिटेन में, प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने देश में कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन को धीरे-धीरे खोलने की घोषणा की है लेकिन नागरिकों से अब तक हुई प्रगति पर पानी नहीं फेरने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि जो ऐसी नौकरी में हैं जो घर से नहीं की जा सकती उन्हें इस हफ्ते से “काम पर लौटने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।” खुद भी कोरोना वायरस संक्रमण का शिकार हुए जॉनसन ने इस वायरस के प्रति सख्त रुख अपनाया था और अब उन्होंने कहा कि अगर ब्रिटेन नये संक्रमण को नियंत्रित कर पाएगा तो वह एक जून से स्कूल एवं दुकानों को खोल सकते हैं।



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स्पेन में कोरोना वायरस का कहर जारी, 24 घंटों में हुई 325 और लोगों की मौत

29 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

मैड्रिड। स्पेन में कोरोना वायरस से 325 और लोगों की मौत हुई है। इसके बाद देश में संक्रमण की वजह से जान गंवाने वालों की संख्या बुधवार को 24,275 हो गई। संक्रमितों की तादाद 212,000 है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों में वही मामले शामिल हैं, जिनकी पुष्टि अति विश्वसनीय प्रयोगशाला परीक्षण से हुई है। यह परीक्षण व्यापक स्तर पर नहीं किया जा रहा है। अधिकारी चाहते हैं कि चरणबद्ध तरीके से सामाजिक और आर्थिक जीवन बहाल किया जाए। इसकी गति इस बात पर निर्भर करती है कि अलग अलग प्रांत और द्वीप स्वास्थ्य संकट को लेकर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने मंगलवार को अपनी योजना का ऐलान किया था। शनिवार से व्यक्तिगत कसरत, नाई तथा अन्य व्यक्तिगत सेवाओं के खुलने की इजाजत है लेकिन इनके लिए पहले से समय लेना होगा। अधिकतर स्थानों पर कुछ दुकानें 11 मई से खुलेंगी औरआउट डोर कैफे को भी इजाजत होगी। साथ में चर्च में प्रार्थना और मस्जिद में नमाज़ की भी इजाजत होगी लेकिन वे अपनी क्षमता से केवल एक तिहाई लोगों को ही जमा कर सकते हैं।



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UN ने COVID-19 महामारी से निपटने के लिए प्रयास तेज करने की अपील की

21 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर कोरोना वायरस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए दवाओं, टीकों और चिकित्सकीय उपकरणों को विकसित करने, उनका निर्माण करने और उनका आकलन करने की गति को तेजी से बढ़ाने के लिए वैश्विक स्तर पर कदम उठाए जाने की अपील की है।

मैक्सिको ने यह प्रस्ताव तैयार किया है जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस से विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर काम करने का अनुरोध किया गया है और सभी जरूरतमंदों, खासकर सभी विकासशील देशों के लोगों के लिए जांचों, चिकित्सकीय आपूर्ति, दवाओं एवं कोरोना वायरस से बचने के लिए भविष्य में बनने वाले टीकों तक समय पर एवं समान उपलब्धता सुनिश्चित करने के विकल्पों की सिफारिश की गई है।इस प्रस्ताव में कोविड-19 को फैलने से रोकने के वैश्विक प्रयासों को समन्वित करने और संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों की मदद करने में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की मूलभूत भूमिका की पुन: पुष्टि की गई है और इस संबंध में ‘‘विश्व स्वास्थ्य संगठन की अहम भूमिका को स्वीकार किया’’ गया है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन में सबसे पहले सामने आए संक्रमण को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए डब्ल्यूएचओ को दी जानी वाली निधि इस माह की शुरुआत में रोक दी थी और कहा था कि उसे ‘‘जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए’’ लेकिन अमेरिका ने इस प्रस्ताव को बाधित नहीं किया।वैश्विक महामारी के दौरान महासभा बैठक नहीं कर सकती, ऐसे में बनाए गए वोटिंग के नए नियमों के अनुसार मसौदा प्रस्ताव सदस्य देशों को भेजा जाता है। यदि कोई भी देश समससीमा समाप्त होने से पहले इस पर आपत्ति जताता है तो प्रस्ताव खारिज हो जाता है। महासभा के अध्यक्ष तिजानी मुहम्मद बंदे ने 193 संयुक्त राष्ट्र देशों को सोमवार रात पत्र भेजकर कहा कि प्रस्ताव को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। इस प्रस्ताव में सदस्य देशों से अनुचित भंडारण नहीं करने की अपील की गई है क्योंकि ‘‘इससे सुरक्षित, प्रभावी एवं किफायती आवश्यक दवाओं, टीकों, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों एवं चिकित्सकीय उपकरणों तक पहुंच बाधित हो सकती है’’। 170 देशों ने इस प्रस्ताव को प्रायोजित किया है। इसमें सदस्य देशों से इस बीमारी से निपटने के लिए मिलकर काम करने की अपील की गई है।



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ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने माल्या की अपील खारिज की, भारत लाने रास्ता करीब करीब साफ

20 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

लंदन। भारत को भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को ब्रिटने से वापस लाने की कानूनी लड़ाई में सोमवार को बड़ी सफलता मिली। ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने माल्य को भारत के हवाले किए जाने के आदेश के खिलाफ उसकी अपील खारिज कर दी। इसके साथ अब माल्या का प्रत्यर्पण अब कुछ ही समय की बात रह गया लगता है। वह भारत मेंकरीब 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और मनी लांड्रिंग के मामले में वांछित है। उच्च न्यायालय में अपील खारिज होने से माल्या का भारत प्रत्यर्पण का रास्ता बहुत हद तक साफ हो गया है। उसकेखिलाफ भारतीय अदालत में मामले हैं। उसके पास अब ब्रिटेन के उच्चतम न्यायालय में अपील के लिये मंजूरी का आवेदन करने के लिए 14 दिन का समय है। अगर वह अपील करता है, ब्रिटेन का गृह मंत्रालय उसके नतीजे का इंतजार करेगा लेकिन अगर उसने अपील नहीं की तो भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण संधि के तहत अदालत के आदेश के अनुसार 64 साल के माल्या को 28 दिनों के भीतर भारत प्रत्यर्पित किया जा सकता है। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘हमने प्रथम दृष्टि में गलत बयानी और साजिश का मामला पाया और इस प्रकार प्रथम दृष्ट्या मनी लांड्रिंग का भी मामला बनता है।’’

यह केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों के लिये शराब कारोबारी के मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। माल्या प्रत्यर्पण मामले में अपैल 2017 में गिरफ्तार होने के बाद से जमानत पर है। अब बंद पड़ी किंगफिशर एयरलाइन के प्रमुख ने वेस्टमिनिस्टर मजिस्ट्र्रेट कोर्ट के दिसंबर 2018 में प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस के न्यायाधीश स्टीफन इरविन और न्यायाधीश एलिजाबेथ लांग की दो सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में माल्या की अपील खारिज कर दी। कोरोना वायरस महामारी के कारण जारी ‘लॉकडाउन’ के कारण मामले की सुनवाई वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये हुई। पीठ ने वरिष्ठ जिला न्यायाधीश एम्मा आर्बुथनोट के फैसले सही ठहराया और कहा कि प्रथम दृष्टि में उन्होंने जो मामला पाया, वह कुछ मामलों में भारत में प्रतिवादी (सीबीआई और ईडी) के आरोपों से कहीं व्यापक है। ऐसे में प्रथम दृष्ट्या सात महत्वपूर्ण बिंदुओं के संदर्भ में उनके खिलाफ मामला बनता है जो भारत में आरोपों के साथ मेल खाता है।’’ उच्च न्यायालय ने जिन सात बिंदुओं के आधार पर फैसला सुनाया, वह न्यायाधीश आर्बुथनोट के प्रत्यर्पण आदेश से मिलता-जुलता है। माल्या के खिलाफ उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर दोनों न्यायाधीशों ने कहा कि उन्होंने पाया कि कर्ज साजिश के जरिये हासिल किया गया। यह कर्ज तब लिया गया जब किंगफिशर एयरलाइन की वित्तीय स्थिति कमजोर थी, उसके नेटवर्थ नीचे आ गया था और ‘क्रेडिट रेटिंग’ निम्न थी। पीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता (माल्या) ने गलत बयानी कर यह कर्ज हासिल किया...उन्होंने निवेश, ब्रांड मूल्य, वृद्धि को लेकर गुमराह करने वाले अनुमान तथा परस्पर विरोधी व्यापार योजनाओं की जानकारी दी। अपीलकर्ता का कर्ज नहीं लौटाने का बेईमान इरादा का पता उसके बाद के आचरण से चलता है जिसमें उसने व्यक्तिगत और कॉरपोरेट गारंटी से बचने का प्रयास किया।’’ माल्या के वकीलों ने भारत सरकार के मामले को कई आधार पर चुनौती दी थी। इसमें उनका यह भी कहना था कि क्या उनका मुवक्किल मुंबई के आर्थर रोड जेल के बैरक संख्या 12 में सुरक्षित होगा? माल्या को प्रत्यर्पण के बाद वहीं रखा जाना है। उच्च न्यायालय ने पहले ही ज्यादातर आधार को खारिज कर दिया था। केवल एक आधार... भारत सरकार के माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी के इरादे से बैंक कर्ज लेने का आरोप... पर चुनौती देने को लेकर अपील की अनुमति मिली थी। इस बीच, भारतीय जांच एजेंसियों का ब्रिटेन की अदालत में पक्ष रखने वाले ‘क्राउन प्रोसक्यूशन सर्विस’ के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘माल्या के पास अब उच्चतम न्यायालय में अपील की मंजूरी को लेकर आवेदन देनेहेतु 14 दिन का समय है। अगर वह अपील नहीं करता है, उसके बाद 28 दिन के भीतर उनका प्रत्यर्पण होगा। अगर वह अपील करता है, हम आवेदन के नतीजे का इंतजार करेंगे।’’ माल्या ब्रिटेन में मार्च 2016 से हैं और अप्रैल 2017 में प्रत्यर्पण वारंट की तामील के बाद से जमानत पर हैं। भारत और ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि पर 1992 में हस्ताक्षर हुए थे। यह संधि नवंबर 1993 से प्रभाव में है। अबतक केवल एक सफल प्रत्यर्पण ब्रिटेन से भारत हुआ है। समीरभाई बीनुभाई पटेल को 2016 में भारत भेजा गया ताकि वह 2002 में गोधरा हिंसा के बाद दंगे में शमिल होने को लेकर सुनवाई का सामना कर सके।



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कोरोना वायरस के प्रकोप संबंधी कभी कोई बात नहीं छिपाई : चीन

17 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

बीजिंग। चीन ने शुक्रवार को कहा कि उसने कभी यह बात नहीं छिपाई की कोरोना वायरस का देश पर कितना असर पड़ा है।अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी ताकतों द्वारा उठाए जा रहे सवालों का जवाबदेते हुए चीन ने यह बात कही।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वायरस के तेजी से फैलने के कारण मामलों की गिनती में खामी के चलते चीन मृतक संख्या बढ़ाने की बात स्वीकार की लेकिन साथ ही कहा, ‘‘ कभी कुछ छिपाया नहीं गया और हम कभी कुछ छिपाने भी नहीं देंगे।



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तीन हफ्ते से दुबई हवाईअड्डे पर फंसे 19 भारतीय, कब होगी वापसी

13 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

दुबई। भारत में देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने के चलते दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पिछले 21 दिन से फंसे 19 भारतीय थक चुके हैं और अपने घरों को लौटने के लिए उत्सुक हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।गल्फ न्यूज की खबर के मुताबिक, जब भारत ने कोरोना वायरस प्रसार की रोकथाम के मद्देनजर उड़ानों पर रोक लगाई, उस समय ये फंसे हुए लोग बीच सफर में थे। कुछ दिन तो फंसे हुए लोगों ने हवाईअड्डे के बेंच को ही अपना ठिकाना बना लिया। 21 मार्च को लिए गए कोविड-19 के जांच नमूनों के नतीजों में संक्रमित नहीं पाए जाने के बाद 25 मार्च को इन्हें दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के होटल में स्थानांतरित किया गया। वर्तमान में फंसे हुए सभी भारतीय इसी होटल में रह रहे हैं।22 मार्च तड़के चार बजे वाली अहमदाबाद की उड़ान छूट जाने के बाद फंसे एक यूएई बैंक के आईटी कर्मचारी अरुण सिंह (37) ने कहा, जब से हमें यहां (होटल में) रखा गया है, तब से मैं खा रहा हूं और सो रहा हूं और बस यही दोहरा रहा हूं। मैं यहां आराम में हूं लेकिन घर वापस जाने को बेचैन हूं। अन्य फंसे भारतीयों के विपरीत, सिंह के पास यूएई निवास वीजा है, लेकिन वह वीजा निलंबन की वजह से हवाईअड्डे को नहीं छोड़ सकते। वहीं, 18 मार्च से फंसे दीपक गुप्ता ने कहा कि वह नई दिल्ली में अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर चिंतित हैं। गुरुग्राम की एक बहु राष्ट्रीय कंपनी में उच्च पदस्थ कर्मचारी गुप्ता ने कहा कि ऐसे समय में पत्नी को मेरी जरूरत है और जल्द ही हमें हवाईअड्डे पर फंसे हुए एक महीना पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मुझे अब निराशा हो रही है। अन्य लोगों की तरह गुप्ता भी नयी दिल्ली की उड़ान के लिए यूरोप से दुबई उतरे थे।



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Hydroxychloroquine पर ट्रंप ने दी भारत को चेतावनी, दिल्ली बोली- सहयोग कर रहे हैं

07 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि व्यक्तिगत अनुरोध के बावजूद अगर उनके देश को मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाई हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का निर्यात नहीं किया गया तो इसे लेकर जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं मंगलवार को नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने पड़ोसियों सहित कई देशों को मामला-दर-मामला के आधार पर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का निर्यात करने का फैसला लिया है और वह कोरोना वायरस महामारी के रोकथाम के लिए अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन एक पुरानी और बेहद कम मूल्य की (सस्ती) दवा है जिसका इस्तेमाल मलेरिया के इलाज में होता है। राष्ट्रपति ट्रंप इसे कोरोना वायरस संक्रमण के प्रभावी इलाज के रूप में देख रहे हैं। गौरतलब है कि अमेरिका में अभी तक वायरस संक्रमण से 10,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है जबकि 3.6 लाख से ज्यादा लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। ट्रंप ने पिछले सप्ताह कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है कि वह अमेरिका में तेजी से बढ़ रहे कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए उसके द्वारा ऑर्डर किए गए मात्रा में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट के निर्यात की अनुमति दें।

गौरतलब है कि ट्रंप का यह बयान आने के कुछ ही घंटे पहले भारत ने इस दवा के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। चेतावनी भरे लहजे में ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे आश्चर्य होगा अगर उनका (प्रधानमंत्री मोदी) यह (दवा निर्यात नहीं करने का) फैसला हुआ। उन्हें मुझे बताना होगा। मैंने रविवार सुबह उनसे फोन पर बात की थी, मैंने कहा था कि अगर आप हमारे लिए निर्यात की अनुमति दें तो अच्छा लगेगा।’’

व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में सोमवार को ट्रंप ने कहा, ‘‘अगर वह निर्यात की अनुमति नहीं देते हैं, तो कोई बात नहीं, लेकिन इसकी जवाबी कार्रवाई भी होगी। और ऐसा क्यों नहीं होना चाहिए?’’ अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब भारत और अमेरिका के साथ-साथ लगभग पूरी दुनिया इस महामारी से जूझ रही है। ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे आश्चर्य होगा अगर वह ऐसा करते हैं (दवा निर्यात की अनुमति नहीं देते हैं) क्योंकि भारत और अमेरिका के संबंध काफी अच्छे चल रहे हैं।’’

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान और श्रीलंका, नेपाल आदि पड़ोसी देशों से भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की मांग आने के बाद भारत ने मंगलवार को कहा कि वह प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले की समीक्षा कर रहा है। नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘भारत का हमेशा से रूख रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दृढ़ एकजुटता और सहयोग करना चाहिए। इसी रुख के कारण हमने कई जगह फंसे दूसरे देशों के नागरिकों को निकला।’’ श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘महामारी के मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए यह तय किया गया है कि भारत उन सभी पड़ोसी देशों को पेरासिटामोल और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का समुचित मात्रा में निर्यात करेगा जो उसकी क्षमता पर निर्भर हैं।’’

गौरतलब है कि भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर प्रतिबंध इसलिए लगाया है ताकि वह अपनी घरेलू जरुरतों का आकलन कर सके और अपने पास पर्याप्त स्टॉक रख सके। आईसीएमआर ने भारत में मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इस दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के माध्यम से कोविड-19 के मरीजों का इलाज करने की बात कही है। उसने यह दवा ऐसे लोगों को भी देने की सलाह दी है जिनमें कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं। दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विदेश विभाग की कार्यवाहक सहायक मंत्री एलिस वेल्स ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘भारत लंबे समय से दवाओं के क्षेत्र में अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार रहा है।’’ ट्रंप प्रशासन ने पहले ही मलेरिया के इलाज में प्रयुक्त होने वाली इस दवा के 2.9 करोड़ डोज का राष्ट्रीय रणनीतिक स्टॉक तैयार कर रखा है। अमेरिका में न्यूयॉर्क के अलावा मिशिगन और टेक्सास में भी कोविड-19 के मरीजों को भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दी जा रही है।



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