व्यापार

hindi news portal lucknow

RBI ने बैंकों से संशोधित मानदंडों के तहत MSME का वर्गीकरण करने को कहा

02 Jul 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

मुंबई। रिजर्व बैंक ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों का नये मानदंडों के तहत वर्गीकरण करने को कहा है। सरकार ने पिछले महीने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के वर्गीकरण के लिये संयंत्र और मशीनरी में निवेश और कारोबार के आधार पर नये मानदंडों को अधिसूचित किया। रिजर्व बैंक ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों और एनबीएफसी को लिखे पत्र में कहा, ‘‘....एक जुलाई 2020 से नई परिके तहत एमएसएमई के नये सिरे से वर्गीकरण के लिये जरूरी कदम उठाये जाएं।इस बारे में अपनी शाखाओं/कार्यालयों को यथाशीघ्र जानकारी दें।’’ एमएसएमई विकास कानून के 2006 में प्रभाव में आने के 14 साल बाद 13 मई को आत्मनिर्भर भारत पैकेज में एमएसएमई की परिमें बदलाव की घोषणा की गयी।

रिजर्व बैंक ने कहा कि अगर कोई इकाई संयंत्र और मशीनरी में निवेश या कारोबार या दोनों के आधार पर उच्च श्रेणी में जाती है और उसके आधार पर नये सिरे से वर्गीकरण होता है, ऐसा उद्यम पंजीकरण समाप्त होने के एक साल तक मौजूदा स्थिति को बनाये रखेगा। संशोधित परिके तहत अगर किसी उद्यम के संयंत्र और मशीनरी में निवेश एक करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं है और कारोबार 5 करोड़ रुपये तक है तो उसे सूक्ष्म उद्यम माना जाएगा। वहीं संयंत्र और मशीनरी में 10 करोड़ रुपये तक के निवेश और 50 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाले लघु उद्यम कहलाएंगे।नई परिके अनुसार जबकि 50 करोड़ रुपये तक के निवेश और 250 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली इकाइयां मझोले उद्यम की श्रेणी में आएंगी।



hindi news portal lucknow

नेपाल के जानेमाने अर्थशास्त्री ने कहा- नहीं बिगड़ने चाहिए नेपाल-भारत के रिश्ते

15 Jun 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

काठमांडू। नेपाल और भारत के संबंध सीमा विवाद को लेकर बिगड़ने नहीं चाहिए। हिमालयी देश सभी जरूरी सामानों की आपूर्ति के लिये अपने दक्षिण पड़ोसी देश पर निर्भर है और यह सोचना सही नहीं है कि चीन उसका ‘विकल्प’ हो सकता है। नेपाल के जानेमाने अर्थशास्त्री डा. पोश राज पांडे ने सोमवार को ये बातें कहीं। भारत के भू-क्षेत्र लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र में शामिल करने के लिये संविधान में संशोधन को लेकर नेपाल के कदम के बारे में दक्षिण एशियाई गैस-सरकारी संगठनों (एनजीओ) का समूह ‘साऊथ एशिया वाच ऑन ट्रेड एकोनॉमिक्स एंड एनवायरनमेंट (एसएडब्ल्यूटीईई) के कार्यकारी चेयरमैन ने कहा कि इस पहल का आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत की प्रतिक्रिया किस प्रकार की रहती है। बीस साल से अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहे अर्थशास्त्री ने कहा, ‘‘नेपाल न केवल चारों तरफ से भूमि से घिरा देश है बल्कि यह तीन तरफ से भारत से भी घिरा हुआ है। अगर भारत प्रतिक्रिया में जवाबी कार्रवाई करेगा तो स्थिति नाजुक हो जाएगी।इसका देश पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ेगा।’’ उल्लेखनीय है कि नेपाल के सत्तारूढ़ और विपक्षी राजनीतिक दलों ने शनिवार को विवादास्पद नक्शे में भारत के उत्तराखंड में स्थित लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को शामिल कर राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह को अद्यतन करने के लिये संविधान संशोधन के पक्ष में आम सहमति से मतदान किया। भारत ने नेपाल के कदम को ‘अस्वीकार्य’ और ‘आधारहीन’ करार दिया है। पांडे ने कहा कि नेपाल-भारत के रिश्ते को बिगड़ने नहीं देना चाहिए और इस मसले के यथाशीघ्र समाधानके लिये बातचीत किये जाने की जरूरत है। विश्व व्यापार संगठन में नेपाल की सदस्य के लिये वार्ताकारोंमें शामिल रहे अर्थशास्त्री ने कहा कि नेपाल जरूरी सामानों की आपूर्ति के लिये भारत पर निर्भर है। नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व सदस्य ने कहा, ‘‘भारत से हमारा आयात दो तिहाई है।जबकि चीन की हिस्सेदारी केवल 14 प्रतिशत है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति का सावाल है, चीन, भारत का विकल्प नहीं हो सकता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा भारत के साथ पूर्व में मेची से पश्चिम में महाकाली तक कारोबारी केंद्र हैं लेकिन उत्तरी पड़ोसी देश के साथ हमारा कुछ ही पारगमन केंद्र हैं और वहां भी बुनियादी ढांचे का अभाव हैं।’’ पांडे ने कहा, ‘‘जहां तक निर्यात का सवाल है, भारत को हम कुल निर्यात का 60 प्रतिशत करते हैं जबकि चीन की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत है।’’ उन्होंने कहा कि नेपाल का उत्तर से समुद्र तक पहुंच 4,000 किलोमीटर है जो भारत में कोलकाता तक उसकी पहुंच के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है। पांडे ने कहा, ‘‘इसीलिए तीसरे देश के साथ व्यापार केवल दक्षिणी मार्ग से ही किया जा रहा है।’’ नेपाल के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय में प्रवक्ता अनुराग श्रीवासतव ने शनिवार को कहा कि हिमालयी देश का दावा इतिहास के तथ्यों पर आधारित नहीं है या जो साक्ष्य है, उसका कोई आधार नहीं है। ‘‘यह लंबित सीमा मसलों का समाधान बातचीत से करने के आपसी समझ के भी खिलाफ है।



hindi news portal lucknow

शेयर बाजार की नरम शुरूआत, सेंसेक्स 200 से ज्यादा अंक गिरकर खुला

11 Jun 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

मुंबई। शेयर बाजारों में बृहस्पतिवार को कारोबार की शुरुआत नरम रही। सेंसेक्स 200 से ज्यादा अंक गिरकर खुला। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस, इंफोसिस और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे प्रमुख शेयरों को नुकसान उठाना पड़ा। बीएसई सेंसेक्स 34,010.86 अंक के निचले स्तर को छूने के बाद सुबह के कारोबार में 214.42 अंक यानी 0.63 प्रतिशत घटकर 34,032.63 अंक पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह एनएसई निफ्टी 57.90 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की गिरावट से 10,058.25 अंक पर चल रहा है। सन फार्मा का शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहा। यह दो प्रतिशत तक गिर गया।इसके अलावा एचडीएफसी बैंक, टाइटन, रिलायंस, कोटक महिंद्रा बैंक, टीसीएस और इंफोसिस भी नीचे का रुख लिए रहे। पिछले सत्र के कारोबार में सेंसेक्स 34,247.05 अंक पर और निफ्टी 10,116.15 अंक पर बंद हुआ था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के बुधवार को लघु अवधि में नीतिगत दरों के घटाने का असर बाजार पर पड़ा। साथ में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी से बाजार की शुरुआत गिरावट के रुख के साथ हुई। आरंभिक आंकड़ों के अनुसार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बुधवार को 919.26 करोड़ रुपये की निकासी की। इस बीच ब्रेंट कच्चा तेल 2.66 प्रतिशत गिरकर 40.62 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।



hindi news portal lucknow

लगातार पांचवे दिन ईंधन के दामों में तेजी, पेट्रोल-डीजल 60 पैसे प्रति लीटर महंगा

11 Jun 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। पेट्रोल और डीजल के दामों में बृहस्पतिवार को लगातार पांचवे दिन तेजी देखी गयी। इनके दाम 60 पैसे प्रति लीटर बढ़ गये। सरकारी कंपनियों ने रविवार से ईंधन के दामों में रोजाना बदलाव की प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया था। इससे पहले कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते देश में ईंधन के दाम लगातार 82 दिन तक स्थिर बने रहे थे।

सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन विपणन कंपनियों की अधिसूचना के मुताबिक नयी बढ़ोत्तरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 73.40 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 74 रुपये प्रति लीटर और डीजल का दाम 71.62 रुपये से बढ़कर 72.22रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। पिछले पांच दिन में पेट्रोल के दाम में कुल 2.74 रुपये और डीजल में 2.83 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। ईंधन के दामों में बढ़ोत्तरी पूरे देश में हुई है। यह राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के स्थानीय करों के चलते अलग-अलग हो सकती है।



hindi news portal lucknow

संसाधनों का इस्तेमाल समझदारी से हो, नई योजनाएं न लाएं: वित्त मंत्रालय

05 Jun 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों से चालू वित्त वर्ष में कोई नई योजना शुरू नहीं करने को कहा है। मंत्रालय का कहना है कि कोविड-19 संकट के मद्देनजर संसाधनों का इस्तेमाल समझदारी से करने की जरूरत है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले व्यय विभाग के कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज, आत्मनिर्भर भारत अभियान पैकेज और अन्य घोषित विशेष पैकेजों के लिए कोष आवंटित किया जाएगा। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष के लिए पहले से मंजूर योजनाएं अगले साल 31 मार्च या अगले आदेश तक स्थगित रहेंगी। इनमें वे योजनाएं भी शामिल हैं जिनको विभाग की ओर से सैद्धान्तिक मंजूरी मिल गई है। व्यय विभाग ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी संकट के बीच सार्वजनिक वित्तीय संसाधनों की मांग काफी बढ़ी है।बदलती प्राथमिकताओं के मुताबिक हमें संसाधनों का इस्तेमाल सावधानी से करने की जरूरत है।’’ इसमें कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में किसी योजना-उपयोजना के लिए कोई नया प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा। सिर्फ प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज, आत्मनिर्भर भारत अभियान पैकेज और अन्य विशेष पैकेज के तहत संसाधनों का आवंटन किया जाएगा। मौजूदा चल रही योजनाओं के बारे में विभाग ने कहा कि इन्हें पहले ही 31 मार्च, 2021 या 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें क्रियान्वयन में आने की तारीख, जो भी पहले हो, तक विस्तार दे दिया गया है। व्यय विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो योजनाएं कड़ाई से इन निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, उन्हें कोई कोष जारी नहीं किया जाएगा। इसके अलावा इन योजनाओं के लिए कोई बजटीय प्रावधान भी नहीं किया जाएगा। इन दिशानिर्देशों से किसी तरह की छूट के लिए व्यय विभाग की अनुमति लेनी होगी।



hindi news portal lucknow

MSME सेक्टर को मिली बड़ी राहत, सरकारी बैंकों ने दिया हजारों करोड़ रुपये का लोन

03 Jun 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित एमएसएमई क्षेत्र को इस महीने के पहले दो दिन में तीन लाख करोड़ रुपये की आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत 3,893 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इस बीच पीएसबी ने एक जून से 100 प्रतिशत ईसीएलजीएस के तहत 10,361.75 करोड़ रुपये के कर्ज को मंजूरी दी। यह योजना पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत अभियान राहत पैकेज का सबसे बड़ा राजकोषीय घटक है।

वित्त मंत्री निर्मला सीताराम ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 100 फीसदी आपातकालीन ऋण गारंटी योजना के तहत 10,361.75 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दे दी है। इसमें से 3,892.78 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।’’ वित्तीय सेवा विभाग ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार उनके विकास के लिए प्रतिबद्ध है।’’ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 21 मई को एमएसएमई क्षेत्र के लिए ईसीएलजीएस के माध्यम से 9.25 प्रतिशत की रियायती दर पर तीन लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त वित्त पोषण को मंजूरी दी थी।



hindi news portal lucknow

लॉकडाउन की अवधि तय होनी चाहिये: आनंद महिंद्रा

30 May 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने लॉकडाउन शब्द का प्रयोग नहीं करने की पैरवी करते हुए शनिवार को कहा कि इसकी अवधि तय होनी चाहिये। महिंद्रा ने लॉकडाउन के चौथे चरण की समयसीमा समाप्त होने से एक दिन पहले कहा कि आगे के लिये लॉकडाउन के बजाय ‘अनलॉक 1.0’ शब्द को अमल में लाया जा सकता है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, लॉकडाउन की परिके हिसाब से पहले से तय समयसीमा होनी चाहिये। इस शब्द के साथ इसके समाप्त होने का समय भी तय होना चाहिये।’’उन्होंने कहा, हो सकता है कि अब हमें इस शब्द से दूर जाने और आगे बढ़ने के लिये एक विकल्प खोजने की आवश्यकता है .. क्या यह ‘अनलॉक 1.0’ हो सकता है?’’ महिंद्रा ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा था कि लॉकडाउन को बढ़ाना न केवल आर्थिक रूप से विनाशकारी है, बल्कि इसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों के कारण एक और चिकित्सा संकट पैदा होने का जोखिम है।



hindi news portal lucknow

केंद्र सरकार ने किया साफ, कर्मचारियों के वेतन में कटौती का कोई प्रस्ताव नहीं

11 May 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन में कटौती का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस संदर्भ में आयी खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया में मंत्रालय ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘केंद्र सरकार के किसी भी श्रेणी के कर्मचारियों के मौजूदा वेतन में किसी भी प्रकार की कटौती का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।’’ मंत्रालय ने लिखा है, ‘‘ मीडिया के एक हिस्से में आयी इस प्रकार की रिपोर्ट गलत और आधारहीन है।’’पिछले महीने सरकार ने अपने 50 लाख कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते के भुगतान पर रोक लगा दी। सरकार कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिये जरूरी संसाधन जुटाने को लेकर अपने खर्च में कटौती कर रही है, इसी के तहत बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता नहीं देने का निर्णय किया गया। वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला व्यय विभाग ने एक कार्यालय ज्ञापन में कहा था कि एक जनवरी 2020 से 30 जून 2021 के बीच महंगाई भत्ता मद में कोई बकाये क भुगतान नहीं किया जाएगा।



hindi news portal lucknow

बैंकों का पैसा नहीं लौटाने वालों को UPA सरकार में दिया गया कर्ज, मोदी सरकार कर रही वसूली: सीतारमण

29 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वालों के बकाये को बट्टे खाते में डाले जाने के मुद्दे पर कांग्रेस पर पलटवार करते हुये वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि जानबूझकर बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले जितने भी डिफाल्टर है उन सभी को कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय में ‘फोन बैंकिंग’ का लाभ मिला था, जबकि मोदी सरकार बकाये की वसूली के लिये उनकी धरपकड़ में लगी है। सीतारमण ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुये यह बात कही है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने वाले शीर्ष 50 डिफाल्टरों का करीब 68,607 करोड़ रुपये का कर्ज बट्टे खाते में डालकर एक तरह से माफ कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व वाले संप्रग शासन काल में सत्ता बैठे लोगों द्वारा बैंक प्रबंधन को फोन कर अपने चहेते लोगों को कर्ज दिलाया जाता रहा। भाजपा कांग्रेस शासनकाल की इसी कार्रवाई को ‘फोन बैंकिंग लाभ’ कहकर कांग्रेस पर हमला करती है। वित्तमंत्री ने मंगलवार देर रात एक के बाद एक कई ट्वीट कर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को आत्मावलोकन करना चाहिये कि उनकी पार्टी पूरे तंत्र को साफ- सुथरा बनाने में रचनात्मक भूमिका निभाने में क्यों असफल रही। कांग्रेस ने न तो सत्ता में रहते और न ही विपक्ष में रहते हुये भ्रष्टाचार और भाई- भतीजावाद को रोकने के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई।

सीतारमण ने कहा, ‘‘ राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। वह कांग्रेस के मूल चरित्र की तरह बिना किसी संदर्भ के तथ्यों को सनसनी बनाकर पेश कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस और राहुल गांधी को आत्मावलोकन करना चाहिए कि क्यों उनकी पार्टी तंत्र की साफ-सफाई में कोई रचनात्मक भूमिका नहीं निभा सकी। ना सत्ता में रहते और ना विपक्ष में रहते हुए... कांग्रेस ने भ्रष्टाचार को रोकने-हटाने और सांठ-गांठ वाली व्यवस्था को खत्म करने के लिए कोई भी प्रतिबद्धता जतायी है?’’ वित्त मंत्री ने कहा कि 2009-10 और 2013-14 के बीच वाणिज्यिक बैंकों ने 1,45,226 करोड़ रुपये के ऋण बट्टे खाते में डाले।उन्होंने कहा, ‘‘काश!गांधी (राहुल) ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूछ लिया होता कि राशि को बट्टे खाते में डालना क्या होता है।’’ उन्होंने उन मीडिया रपटों का भी हवाला दिया जिनमें रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि अधिकतर फंसे कर्ज 2006-2008 के दौरान बांटे गए। ‘‘अधिकतर कर्ज उन प्रवर्तकों को दिए गए जिनका जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने का इतिहास रहा है।’’ सीतारमण ने कहा, ‘‘ऋण लेने वाले ऐसे लोग जो ऋण चुकाने की क्षमता रखते हुए भी ऋण नहीं चुकाते, कोष की हेरा-फेरी करते हैं और बैंक की अनुमति के बिना सुरक्षित परिसंपत्तियों का निपटान कर देते हैं, उन्हें डिफॉल्टर कहते हैं। यह सभी ऐसे प्रवर्तक की कंपनियां रहीं जिन्हें संप्रग (कांग्रेस नीत पूर्ववती गठबंधन सरकार) की ‘फोन बैंकिंग’ का लाभ मिला।’’

वित्त मंत्री ने एक ट्वीट और कर 18 नवंबर 2019 को लोकसभा में इस संबंध में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब का उल्लेख भी किया। यह जवाब डिफॉल्टरों की सूची से संबंधित था। उन्होंने कहा कि इस अतारांकित सवाल संख्या 52 के जवाब में पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक का बकाया रखने वाले डिफॉल्टरों की सूची को उपलब्ध कराया गया था। यह सूची बड़े ऋणों की जानकारी एकत्रित करने वाली केंद्रीय व्यवस्था (सीआरआईएलआईसी) के पास 30 सितंबर 2019 तक उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। वहीं 16 मार्च 2020 को राहुल गांधी के लोकसभा में पूछे गए तारांकित सवाल 305 के जवाब में 50 शीर्ष डिफॉल्टरों पर किस बैंक पर कितना बकाया है, इसकी भी जानकारी दी गयी। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि उन्होंने संसद में 50 ऋण चूककर्ताओं के नाम पूछे थे, लेकिन वित्त मंत्री ने उसका जवाब नहीं दिया। गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘अब रिजर्व बैंक ने नीरव मोदी, मेहूल चौकसी जैसे अन्य कई भाजपा के मित्रों के नाम दिए हैं जो बैंक के साथ धोखाधड़ी करने वालों की सूची में शामिल है। यह सच संसद से क्यों छिपाया गया।’’ कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि 2014 से सितंबर 2019 तक सरकार ने बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने वालों का 6.66 लाख करोड़ रुपये का ऋण माफ कर किया। सीतारमण ने कहा कि कांग्रेसी नेता जानबूझ कर ऋण ना चुकाने वालों,फंसे कर्ज और कर्ज को बट्टे खाते डालने के बारे में लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बकाया ऋण की वसूली के लिए डिफॉल्टरों के खिलाफ 9,967 वसूली मुकदमे दायर किए हैं। 3,515 प्राथमिकियां दर्ज करायी गयी हैं। इनके मामलों में भगोड़ा संशोधन कानून के तहत कार्रवाई चल रही है। नीरव मोदी, मेहूल चौकसी और विजय माल्या की जब्त परिसंपत्तियों का कुल मूल्य 18,332.7 करोड़ रुपये है। सीतारमण ने इन तीनों के खिलाफ की जारी कार्रवाई का पूरा ब्यौरा दिया है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार को इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जवाब देने को कहा था। उन्होंने कहा कि देश कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। सरकार के पास राज्यों को देने के लिये पैसा नहीं है लेकिन वह डिफाल्टरों का 68,607 करोड़ रुपये का बैंक कर्ज माफ कर सकती है।



hindi news portal lucknow

लॉकडाउन के दौरान भारतीय डाक ने किया कमाल का काम, घरों तक पहुचाएं पैसे

25 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन लागू किया गया है। इस बीच भारतीय डाक ने कमाल का काम किया है। भारतीय डाक विभाग ज्यादातर पत्र और पार्सल पहुंचाने के लिए जाना जाता है, लेकिन लॉकडाउन के बीच, इसने देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में नकदी और आवश्यक वस्तुओं को पहुंचाने का जिम्मा उठाया। संचार मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि 20 अप्रैल 2020 तक लॉकडाउन की अवधि के दौरान, इंडिया पोस्ट ने आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) का उपयोग करते हुए लोगों के घर तक जाके 15 लाख लेनदेन में 300 करोड़ रुपये वितरित किए।

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक की एईपीएस सुविधा किसी भी अनुसूचित बैंकों के खातों से घर बैठे पैसे निकालने में सक्षम बनाती है। इसे जोड़कर, लगभग 1.8 करोड़ डाकघर बचत बैंक लेनदेन में 28,000 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। आधार-इनेबल्ड पेमेंट सर्विस (एईपीएस) सुविधा के तहत कोई भी ग्राहक भले उसका अकाउंट किसी भी बैंक में क्यों न हो वह डाकिए के जरिए अपने घर तक पैसे मंगा सकता है। इसके लिए पोस्ट ऑफिस में ग्राहक के बचत खाते की जरूरत नहीं होती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अलावा, दिव्यांगजन और पेंशनरों को बड़ा समर्थन देते हुए, लॉकडाउन की अवधि के दौरान 480 करोड़ रुपये मूल्य के लगभग 52 लाख प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण भुगतान किए गए हैं। यात्री एयरलाइंस, रेलवे और राज्य रोडवेज पर सख्त प्रतिबंध के कारण, केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, रविशंकर प्रसाद ने संकट काल में भारतीय डाक को कुछ अलग सोचने के लिए प्रोत्साहित किया था। नतीजतन, विभाग को विभागीय वाहनों के मौजूदा बेड़े के साथ एक अच्छा अभियान शुरू किया।



12345678910...