व्यापार

hindi news portal lucknow

MSME सेक्टर को मिली बड़ी राहत, सरकारी बैंकों ने दिया हजारों करोड़ रुपये का लोन

03 Jun 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित एमएसएमई क्षेत्र को इस महीने के पहले दो दिन में तीन लाख करोड़ रुपये की आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के तहत 3,893 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इस बीच पीएसबी ने एक जून से 100 प्रतिशत ईसीएलजीएस के तहत 10,361.75 करोड़ रुपये के कर्ज को मंजूरी दी। यह योजना पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत अभियान राहत पैकेज का सबसे बड़ा राजकोषीय घटक है।

वित्त मंत्री निर्मला सीताराम ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 100 फीसदी आपातकालीन ऋण गारंटी योजना के तहत 10,361.75 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दे दी है। इसमें से 3,892.78 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।’’ वित्तीय सेवा विभाग ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार उनके विकास के लिए प्रतिबद्ध है।’’ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 21 मई को एमएसएमई क्षेत्र के लिए ईसीएलजीएस के माध्यम से 9.25 प्रतिशत की रियायती दर पर तीन लाख करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त वित्त पोषण को मंजूरी दी थी।



hindi news portal lucknow

लॉकडाउन की अवधि तय होनी चाहिये: आनंद महिंद्रा

30 May 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने लॉकडाउन शब्द का प्रयोग नहीं करने की पैरवी करते हुए शनिवार को कहा कि इसकी अवधि तय होनी चाहिये। महिंद्रा ने लॉकडाउन के चौथे चरण की समयसीमा समाप्त होने से एक दिन पहले कहा कि आगे के लिये लॉकडाउन के बजाय ‘अनलॉक 1.0’ शब्द को अमल में लाया जा सकता है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, लॉकडाउन की परिके हिसाब से पहले से तय समयसीमा होनी चाहिये। इस शब्द के साथ इसके समाप्त होने का समय भी तय होना चाहिये।’’उन्होंने कहा, हो सकता है कि अब हमें इस शब्द से दूर जाने और आगे बढ़ने के लिये एक विकल्प खोजने की आवश्यकता है .. क्या यह ‘अनलॉक 1.0’ हो सकता है?’’ महिंद्रा ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा था कि लॉकडाउन को बढ़ाना न केवल आर्थिक रूप से विनाशकारी है, बल्कि इसके मनोवैज्ञानिक प्रभावों के कारण एक और चिकित्सा संकट पैदा होने का जोखिम है।



hindi news portal lucknow

केंद्र सरकार ने किया साफ, कर्मचारियों के वेतन में कटौती का कोई प्रस्ताव नहीं

11 May 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन में कटौती का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस संदर्भ में आयी खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया में मंत्रालय ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘केंद्र सरकार के किसी भी श्रेणी के कर्मचारियों के मौजूदा वेतन में किसी भी प्रकार की कटौती का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।’’ मंत्रालय ने लिखा है, ‘‘ मीडिया के एक हिस्से में आयी इस प्रकार की रिपोर्ट गलत और आधारहीन है।’’पिछले महीने सरकार ने अपने 50 लाख कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों को बढ़े हुए महंगाई भत्ते के भुगतान पर रोक लगा दी। सरकार कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिये जरूरी संसाधन जुटाने को लेकर अपने खर्च में कटौती कर रही है, इसी के तहत बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता नहीं देने का निर्णय किया गया। वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला व्यय विभाग ने एक कार्यालय ज्ञापन में कहा था कि एक जनवरी 2020 से 30 जून 2021 के बीच महंगाई भत्ता मद में कोई बकाये क भुगतान नहीं किया जाएगा।



hindi news portal lucknow

बैंकों का पैसा नहीं लौटाने वालों को UPA सरकार में दिया गया कर्ज, मोदी सरकार कर रही वसूली: सीतारमण

29 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वालों के बकाये को बट्टे खाते में डाले जाने के मुद्दे पर कांग्रेस पर पलटवार करते हुये वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि जानबूझकर बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले जितने भी डिफाल्टर है उन सभी को कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय में ‘फोन बैंकिंग’ का लाभ मिला था, जबकि मोदी सरकार बकाये की वसूली के लिये उनकी धरपकड़ में लगी है। सीतारमण ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुये यह बात कही है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही में बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने वाले शीर्ष 50 डिफाल्टरों का करीब 68,607 करोड़ रुपये का कर्ज बट्टे खाते में डालकर एक तरह से माफ कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व वाले संप्रग शासन काल में सत्ता बैठे लोगों द्वारा बैंक प्रबंधन को फोन कर अपने चहेते लोगों को कर्ज दिलाया जाता रहा। भाजपा कांग्रेस शासनकाल की इसी कार्रवाई को ‘फोन बैंकिंग लाभ’ कहकर कांग्रेस पर हमला करती है। वित्तमंत्री ने मंगलवार देर रात एक के बाद एक कई ट्वीट कर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को आत्मावलोकन करना चाहिये कि उनकी पार्टी पूरे तंत्र को साफ- सुथरा बनाने में रचनात्मक भूमिका निभाने में क्यों असफल रही। कांग्रेस ने न तो सत्ता में रहते और न ही विपक्ष में रहते हुये भ्रष्टाचार और भाई- भतीजावाद को रोकने के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई।

सीतारमण ने कहा, ‘‘ राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। वह कांग्रेस के मूल चरित्र की तरह बिना किसी संदर्भ के तथ्यों को सनसनी बनाकर पेश कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस और राहुल गांधी को आत्मावलोकन करना चाहिए कि क्यों उनकी पार्टी तंत्र की साफ-सफाई में कोई रचनात्मक भूमिका नहीं निभा सकी। ना सत्ता में रहते और ना विपक्ष में रहते हुए... कांग्रेस ने भ्रष्टाचार को रोकने-हटाने और सांठ-गांठ वाली व्यवस्था को खत्म करने के लिए कोई भी प्रतिबद्धता जतायी है?’’ वित्त मंत्री ने कहा कि 2009-10 और 2013-14 के बीच वाणिज्यिक बैंकों ने 1,45,226 करोड़ रुपये के ऋण बट्टे खाते में डाले।उन्होंने कहा, ‘‘काश!गांधी (राहुल) ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूछ लिया होता कि राशि को बट्टे खाते में डालना क्या होता है।’’ उन्होंने उन मीडिया रपटों का भी हवाला दिया जिनमें रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि अधिकतर फंसे कर्ज 2006-2008 के दौरान बांटे गए। ‘‘अधिकतर कर्ज उन प्रवर्तकों को दिए गए जिनका जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने का इतिहास रहा है।’’ सीतारमण ने कहा, ‘‘ऋण लेने वाले ऐसे लोग जो ऋण चुकाने की क्षमता रखते हुए भी ऋण नहीं चुकाते, कोष की हेरा-फेरी करते हैं और बैंक की अनुमति के बिना सुरक्षित परिसंपत्तियों का निपटान कर देते हैं, उन्हें डिफॉल्टर कहते हैं। यह सभी ऐसे प्रवर्तक की कंपनियां रहीं जिन्हें संप्रग (कांग्रेस नीत पूर्ववती गठबंधन सरकार) की ‘फोन बैंकिंग’ का लाभ मिला।’’

वित्त मंत्री ने एक ट्वीट और कर 18 नवंबर 2019 को लोकसभा में इस संबंध में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब का उल्लेख भी किया। यह जवाब डिफॉल्टरों की सूची से संबंधित था। उन्होंने कहा कि इस अतारांकित सवाल संख्या 52 के जवाब में पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक का बकाया रखने वाले डिफॉल्टरों की सूची को उपलब्ध कराया गया था। यह सूची बड़े ऋणों की जानकारी एकत्रित करने वाली केंद्रीय व्यवस्था (सीआरआईएलआईसी) के पास 30 सितंबर 2019 तक उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। वहीं 16 मार्च 2020 को राहुल गांधी के लोकसभा में पूछे गए तारांकित सवाल 305 के जवाब में 50 शीर्ष डिफॉल्टरों पर किस बैंक पर कितना बकाया है, इसकी भी जानकारी दी गयी। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया था कि उन्होंने संसद में 50 ऋण चूककर्ताओं के नाम पूछे थे, लेकिन वित्त मंत्री ने उसका जवाब नहीं दिया। गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘अब रिजर्व बैंक ने नीरव मोदी, मेहूल चौकसी जैसे अन्य कई भाजपा के मित्रों के नाम दिए हैं जो बैंक के साथ धोखाधड़ी करने वालों की सूची में शामिल है। यह सच संसद से क्यों छिपाया गया।’’ कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि 2014 से सितंबर 2019 तक सरकार ने बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने वालों का 6.66 लाख करोड़ रुपये का ऋण माफ कर किया। सीतारमण ने कहा कि कांग्रेसी नेता जानबूझ कर ऋण ना चुकाने वालों,फंसे कर्ज और कर्ज को बट्टे खाते डालने के बारे में लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बकाया ऋण की वसूली के लिए डिफॉल्टरों के खिलाफ 9,967 वसूली मुकदमे दायर किए हैं। 3,515 प्राथमिकियां दर्ज करायी गयी हैं। इनके मामलों में भगोड़ा संशोधन कानून के तहत कार्रवाई चल रही है। नीरव मोदी, मेहूल चौकसी और विजय माल्या की जब्त परिसंपत्तियों का कुल मूल्य 18,332.7 करोड़ रुपये है। सीतारमण ने इन तीनों के खिलाफ की जारी कार्रवाई का पूरा ब्यौरा दिया है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मंगलवार को इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जवाब देने को कहा था। उन्होंने कहा कि देश कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। सरकार के पास राज्यों को देने के लिये पैसा नहीं है लेकिन वह डिफाल्टरों का 68,607 करोड़ रुपये का बैंक कर्ज माफ कर सकती है।



hindi news portal lucknow

लॉकडाउन के दौरान भारतीय डाक ने किया कमाल का काम, घरों तक पहुचाएं पैसे

25 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश भर में लॉकडाउन लागू किया गया है। इस बीच भारतीय डाक ने कमाल का काम किया है। भारतीय डाक विभाग ज्यादातर पत्र और पार्सल पहुंचाने के लिए जाना जाता है, लेकिन लॉकडाउन के बीच, इसने देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में नकदी और आवश्यक वस्तुओं को पहुंचाने का जिम्मा उठाया। संचार मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि 20 अप्रैल 2020 तक लॉकडाउन की अवधि के दौरान, इंडिया पोस्ट ने आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) का उपयोग करते हुए लोगों के घर तक जाके 15 लाख लेनदेन में 300 करोड़ रुपये वितरित किए।

इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक की एईपीएस सुविधा किसी भी अनुसूचित बैंकों के खातों से घर बैठे पैसे निकालने में सक्षम बनाती है। इसे जोड़कर, लगभग 1.8 करोड़ डाकघर बचत बैंक लेनदेन में 28,000 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। आधार-इनेबल्ड पेमेंट सर्विस (एईपीएस) सुविधा के तहत कोई भी ग्राहक भले उसका अकाउंट किसी भी बैंक में क्यों न हो वह डाकिए के जरिए अपने घर तक पैसे मंगा सकता है। इसके लिए पोस्ट ऑफिस में ग्राहक के बचत खाते की जरूरत नहीं होती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के अलावा, दिव्यांगजन और पेंशनरों को बड़ा समर्थन देते हुए, लॉकडाउन की अवधि के दौरान 480 करोड़ रुपये मूल्य के लगभग 52 लाख प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण भुगतान किए गए हैं। यात्री एयरलाइंस, रेलवे और राज्य रोडवेज पर सख्त प्रतिबंध के कारण, केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, रविशंकर प्रसाद ने संकट काल में भारतीय डाक को कुछ अलग सोचने के लिए प्रोत्साहित किया था। नतीजतन, विभाग को विभागीय वाहनों के मौजूदा बेड़े के साथ एक अच्छा अभियान शुरू किया।



hindi news portal lucknow

भारत में विदेशी निवेश के नए नियमों से WTO का कोई उल्लंघन नहीं हुआ: विशेषज्ञ

21 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। विशेषज्ञों ने भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में ताजा संशोधन पर चीन की आपत्तियों को खारिज किया है। उनका कहना है कि इस समय जो आर्थिक संकट है, उसमें अपने उद्योगों को बचाना प्रत्येक देश के अधिकार क्षेत्र में आता है और भारत ने डब्ल्यूटीओ का कोई उल्लंघन नहीं किया है। इससे पहले भारत में चीन के दूतावास के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि नए नियम डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) के सिद्धांतों और मुक्त व्यापार के सामान्य चलन के विरुद्ध हैं। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्राचार्य विश्वजित धर ने कहा, ‘डब्ल्यूटीओ में एफडीआई को लेकर कोई समझौता हुआ ही नहीं है। इस संगठन के नियम निवेश संबंधी मुद्दों पर लागू नहीं होते। इस लिए भारत अपने उद्योगों के हित में ऐसे निर्णय करने का पूरा अधिकार रखता है।’

उन्होंने कहा कि निवेशकों के बारे में डब्ल्यूटीओं में जो भी प्रावधान हैं निर्यात और आयात से जुड़े हैं। इस संबंध में उन्होंनें निर्यात में स्थानीय सामग्री की शर्त का उदाहरण दिया। भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने कहा, ‘भारत आपने आप ही आपनी एफडीआई नीति उदार करता रहा है। अपने उद्योग को बचाने का कोई निर्णय डब्ल्यूटीओ के दायरे में नहीं आता।’ जोशी ने कहा यह संकट का समय है इसमें भारत को अपने उद्योग को बचाने का फैसला करने की जरूरत है। फिंडाक समूह के वरिष्ठ निवेश सलाहकार सुमित कोचर नेकहा कि भारत सरकार का यह नीतिगत निर्णय जवाबी है क्यों कि चीन के केंद्रीय बैंक ने इससे पहले भारत की वित्तीय सेवा कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन (एचडीएफसी) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा कर एक प्रतिशत से कुछ अधिक कर ली है।

उन्होंने कहा कि नए नियमों से चीनी निवेशकों पर भारतीय कंपनियों के शेयर आगे किसी भी समय खरीदने में एक रुकावट आ सकती है। इससे भारत में भाविष्य में विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है।’ सरकार ने शनिवार को एफडीआई नियमों संशोधन कर भारत की थल सीमा से जुड़े देशों से प्रत्यक्ष या परोक्षतरीके से निवेश के हर प्रस्ताव पर पहले सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय कोविड-19 से पैदा हालात में भारतीय कंपनियों को अवसरवादी अधिग्रहण के प्रयासों सेबचाना है। भारत ने कुछ एक प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़ कर बाकी उद्योगों में निवेश को स्वत: स्वीकृत मार्ग से खोल दिया है। इसमार्ग से विदेशी निवेशक को सरकार के किसी विभाग से अनुमति लेने के बजाय केवल भारतीय रिजर्व बैंकों निवेश की सूचना करने मात्र की जरूरत होती है ताकि निवेश सरल हो।



hindi news portal lucknow

वित्त मंत्रालय ने कहा- केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों की पेंशन में नहीं होगी कोई कटौती

19 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। वित्त मंत्रालय ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की पेंशन में कोई कटौती नहीं होगी। ऐसी रिपोर्टें थी कि सरकार पेंशन काटने की योजना बना रही है। उसके बाद मंत्रालय ने उक्त स्पष्टीकरण जारी किया। यह बात ऐसे समय सामने आयी है जब सरकार को एक तरफ कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये उठाये गये विभिन्न कदमों पर भारी खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘लॉकडाउन’ के कारण कर राजस्व एवं विनिवेश समेत अन्य स्रोत से आय पर असर पड़ता दिख रहा है।मंत्रालय ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘ऐसी रिपोर्ट है कि केंद्र सरकार के पेशनभोगियों की पेंशन में 20 प्रतिशत की कटौती की जा रही है। यह खबर पूरी तरह गलत है। पेंशन में कोई कटौती नहीं होगी। यह स्पष्ट है कि वेतन और पेंशन सरकार के नकदी प्रबंधन संबंधी निर्देशों से प्रभावित नहीं होगी।’’ मंत्रालय के ट्वीट को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी साझा किया है।



hindi news portal lucknow

RBI ने नकदी बढ़ाने, बैंकों को कर्ज बांटने में सहुलियत देने के उपाय किये: सीतारमण

17 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि रिजर्व बैंक बैंकों के पास कर्ज देने के लिए पर्याप्त नकदी बनाये रखने, उन्हें कर्ज वितरण को प्रोत्साहित करने, उन पर वित्तीय दबाव कम करने तथा बाजार की कार्यप्रणाली सामान्य रखने में मदद के लिये कई उपाय किये हैं। सुबह भारतीय रिजर्व बैंक की अप्रत्याशित नीतिगत घोषणाओं के बाद सीतारमण ने ट्वीट किया, ‘‘कोविड-19 के कारण आ रही दिक्कतों को देखते हुए रिजर्व बैंक ने कई कदम उठाये हैं, जो प्रणाली में पर्याप्त नकदी बनाये रखने, बैंकों के कर्ज वितरण को प्रोत्साहित करने, वित्तीय दबाव कम करने तथा बाजार में सामान्य कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं।’’ रिजर्व बैंक ने एक महीने के भीतर राहत उपायों की दूसरी घोषणा करते हुए गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) से संबंधित प्रावधानों में ढील दी।

इसके अलावा रिजर्व बैंक ने बैंकों द्वारा लाभांश भुगतान पर रोक लगाने के साथ ही बैंकों को कर्ज वितरण के लिये अधिक धन मुहैया कराने को प्रोत्साहित करने के लिए रिवर्स रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती भी की। वित्त मंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक ने किसानों, छोटे एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) तथा आवास क्षेत्र के लिये कर्ज की उपलब्धता बढ़ाने को लेकर नाबार्ड, सिडबी तथा राष्ट्रीय आवास बैंक के लिये 50 हजार करोड़ रुपये के विशेष पुनर्वित्तपोषण की भी घोषणा की। इस 50 हजार करोड़ रुपये में नाबार्ड को 25 हजार करोड़ रुपये, सिडबी को 15 हजार करोड़ रुपये और राष्ट्रीय आवास बैंक को 10 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे ताकि वे कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र, छोटे उद्योगों, आवास वित्त कंपनियों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) की दीर्घकालिक वित्तीय जरूरतें पूरा कर सकें। सीतारमण ने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक ने एमएसएमई के लिये नकदी उपलब्धता बढ़ाने को लेकर और 50 हजार करोड़ रुपये की दीर्घकालिक रेपो आधारित लाक्षित ऋण सुविधा (टारगेटेड एलटीआरओ) की घोषणा की। यह राशि छोटे एनबीएफसी तथा एमएफआई की सहायता के लिएकेंद्रित हैं। भविष्य में जरूरत पड़ने पर राशि को बढ़ाया भी जा सकता है। रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो दर को भी 0.25 प्रतिशत घटाकर 3.75 प्रतिशत कर दिया है।’’

बैंकों को रिजर्व बैंक के पास पैसे जमा कराने पर जिस दर पर ब्याज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि एमएसएमई के ऋण खातों के एनपीए हो जाने के जोखिम को देखते हुए कर्ज की किस्तें चुकाने पर दी गयी तीन महीने की छूट की अवधि को एनपीए वर्गीकरण प्रावधानों से अलग कर दिया गया है। इसका अर्थ हुआ कि अब किस्त चुकाने में चूक करने के 180 दिन बाद संबंधित ऋण खाता एनपीए कहा जाएगा। पहले यह अवधि 90 दिन की थी। यह बैंकों तथा एनबीएफसी दोनों के कर्जदारों पर लागू होगा। उन्होंने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक ने राज्यों के लिये कर्ज जुटाने के विभिन्न उपायों की सीमा भी बढ़ाकर 60 प्रतिशत से तथा 31 मार्च के स्तर से बढ़ा दी है। इससे राज्यों को राजस्व संग्रह में आयी तात्कालिक गिरावट के कारण पैसों की आ रही दिक्कत दूर करने में मदद मिलेगी।



hindi news portal lucknow

महामारी के बीच चीन निवेश करने में जुटा, 1 फीसदी से अधिक हुई HDFC में PBC की शेयरधारिता

13 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार लगातार रोकथाम के लिए जरूरी उपाय कर रही है। ऐसे में एक तरफ वायरस ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है तो दूसरी तरफ मंदी आने के आसार भी दिखाई देने लगे हैं। इसी बीच चीन के केंद्रीय बैंक ने आवास ऋण देने वाले एचडीएफसी लिमिटेड में मार्च तिमाही में एक प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ाई है। जिसके बाद खलबली सी मच गई है। इसी को देखते हुए राहुल गांधी ने ट्वीट कर सरकार से अपील की कि ऐसी व्यवस्था की जाए कि कोई भी विदेशी कम्पनी भारत के किसी कॉरपोरेट का नियंत्रण अपने हाथ में न ले पाए।कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच में रविवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने कहा कि आर्थिक मंदी ने कई भारतीय कॉरपोरेट को कमजोर कर दिया है और उन्होंने सरकार से राष्ट्रीय संकट की इस घड़ी में किसी विदेशी कंपनी द्वारा देश के किसी कॉरपोरेट का नियंत्रण अपने हाथ में नहीं ले पाने को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। राहुल गांधी ने यह चिंता मीडिया में आई उन खबरों पर प्रकट की है, जिनमें कहा गया था कि विदेशी संस्थानों ने स्टॉक बाजार के गिरने के मद्देनजर भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदी है। राहुल ने ट्वीट किया कि भीषण आर्थिक मंदी ने कई भारतीय कॉरपोरेट को कमजोर कर दिया है, उन्हें अधिग्रहण के लिये आसान निशाना बना दिया है। सरकार को राष्ट्रीय संकट की इस घड़ी में विदेशी कंपनियों को किसी भारतीय कंपनी का नियंत्रण अपने हाथों में लेने की इजाजत नहीं देनी चाहिए।’’

चीन द्वारा खरीदी गई हिस्सेदारी से घबराने की ज्यादा जरूरत नहीं है। क्योंकि 1.01 % की हिस्सेदारी चीन ने नहीं खरीदी है। बल्कि चीन के पास पहले से ही 0.80 % की हिस्सेदारी थी और वुहान शहर से फैले इस वायरस के बाद जरूर चीन ने 0.21 % की हिस्सेदारी खरीदी है। हां, यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि जनवरी से लेकर मौजूदा समय के बीच में दुनियाभर में चीन इतना ज्यादा निवेश क्यों कर रहा है ?

बीएसई (BSE) के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष की अंतिम यानी मार्च तिमाही में चीन के केंद्रीय बैंक (PBC) की एचडीएफसी में हिस्सेदारी 1.75 करोड़ शेयरों की हो गई है। जबकि मार्च 2019 तक यह 0.8 % थी।

जब हम बीएसई (BSE) की ऑफिसियल बेवसाइट को ध्यान से देखते हैं तो सामने आता है कि एचडीएफसी लिमिटेड की हिस्सेदारी चीन के अलावा कई सारी विदेशी कम्पनियों ने ले रखी है। इसमें गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर भी है। जिसने करीब 3.33 प्रतिशत की हिस्सेदारी ली हुई है। लेकिन जब हम चीन की बात करते हैं तो यह सवाल जरूर खड़ा हो जाता है कि क्या चीन इस समय का इंतजार कर रहा था जब दुनियाभर के शेयर डाउन हो जाएंगे ? इस सवाल पर ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि जब एक तरफ देश कोरोना जैसी महामारी से पार पाने में जुटा हुआ है तब चीन लगातार निवेश कर रहा है। इतना ही नहीं तेल के दामों में भी काफी गिरावट हुई है और इसको देखते हुए चीन ने भारी मात्रा में क्रूड ऑयल की खरीदारी कर चुका है।

कई सारी रिपोर्ट्स सामने आई हैं जिसमें दावा किया गया है कि चीन के प्रमुख बैंक भारत में निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चीन की कई सारी कम्पनियों ने भारतीय कम्पनियों में निवेश किया हुआ है।



hindi news portal lucknow

मदर डेयरी का खाद्य तेल उत्पादन, बिक्री लॉकडाउन के बाद 35-40 प्रतिशत घटा

13 Apr 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। धारा ब्रांड से खाद्य तेल की बिक्री करने वाली मदर डेयरीने सोमवार को कहा कि कोविड-19वायरस की रोकथाम के प्रयासों के तहत देशव्यापी लॉकडाऊन से उसके खाद्य तेलों के उत्पादन और बिक्री में 35-40 प्रतिशत की गिरावट आई है। हालांकि, कामगारों की कमी और अन्य कई मुद्दों के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, लेकिन ज्यादातर बिक्री होटल, रेस्तरां और कैफेटेरिया को बंद करने की वजह से मांग में आई कमी के कारण प्रभावित हुई है।लॉकडाउन, के पहले मदर डेयरी प्रतिदिन 650 टन खाद्य तेलों का उत्पादन करती थी और प्रतिदिन लगभग इतनी मात्रा में ही बिक्री भी होती थी। ई-मेल से पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में मदर डेयरी के प्रवक्ता ने कहा कि इस लॉकिंग अवधि के दौरान व्यापार में 35-40 प्रतिशत की गिरावट आई है।यह पूछे जाने पर कि क्या कंपनी ने लॉकडाउन के बाद खाद्यतेलों की कीमतों में वृद्धि की है, प्रवक्ता ने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता के कारण हमारे कारोबार में मूल्य संशोधन करना एक सामान्य गतिविधि है।पिछले हफ्ते, फॉर्च्यून ब्रांड के तहत खाद्यतेलों की बेचने वाली प्रमुख कंपनी, अडाणीविल्मर के ‘डिप्टी सीईओ’ अंग्शु मल्लिक ने पीटीआई-को बताया था कि कंपनी के उत्पादन और बिक्री में क्रमशः 40 प्रतिशत और 25 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो कि लॉकडाउन के बाद हुआ है। देश में खाद्य तेलों की सालाना मांग 230 लाख टन की है, जिसका बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है।



12345678910...