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Coronavirus ने दिया निवेशकों को ''अटैक'', बेहाल हुआ घरेलू शेयर बाजार

28 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का प्रकोप न सिर्फ लोगों की जान ले रहा बल्कि दुनिया भर के इकोनॉमी को भी काफी नुकसान पहुंचा रहा है। बता दें कि शुक्रवार को कई देशों के शेयर बाजारों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट देखी गई। इसका असर चीन में तो देखने को मिल ही रहा है लेकिन अब इसका असर भारत के शेयर बाजारों में भी देखने को मिला।

हफ्ते के आखिरी दिन भारत के बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1000 से ज्यादा अंक टूट गया जिसकी वजह से निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। बता दें कि सेंसेक्स की तेजी गिरावट से निवेशकों का साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये डूब गया है। भारत के अलावा इसका असर अमेरिकी बाजार में भी देखने को मिला। बता दें कि अमेरिकी शेयर मार्केट के मुताबिक डाउ जोंस में भी एक हजार अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। शेयर बाजार में नवंबर 2016 के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

कोरोना वायरस की महामारी की वजह से शेयर बाजार में बहुत तेजी से गिरावट आई जिसकी वजह से जिन कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है वह फार्मा, रियल्टी, मेटल इंडेक्स, बैंक है। इन कंपनियों के शेयर मार्केट काफी तेजी से नीचे गए है।

बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1163 अंक यानी 2.93 प्रतिशत गिरकर 38,582.66 अंक पर चल रहा था। एनएसई का निफ्टी भी 350.35 यानी 3.01 प्रतिशत गिरकर 11,282.95 अंक पर चल रहा था।

सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर गिरावट में चल रहे थे। टाटा स्टील, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक और रिलायंस इंडस्ट्रीज में आठ प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।

बृहस्पतिवार को सेंसेक्स 143.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत गिरकर 39,745.66 अंक पर और निफ्टी 45.20 अंक यानी 0.39 प्रतिशत टूटकर 11,633.30 अंक पर बंद हुआ था। विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों का पिछले सप्ताह तक मानना था कि यदि चीन ने कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पा लिया तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इस आपदा का मामूली असर पड़ेगा। लेकिन संक्रमित लोगों के नये मामले सामने आते जाने से निवेशकों की धारणा बदली है और वे आर्थिक नरमी को लेकर चिंतित हो उठे हैं।

इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली जारी रहने से भी बाजार पर दबाव है। प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार, बृहस्पतिवार को एफपीआई ने 3,127.36 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। एशियाई बाजारों में चीन के शंघाई कंपोजिट, हांगकांग के हैंगसेंग, दक्षिण कोरिया के कोस्पी और जापान के निक्की में चार प्रतिशत तक की गिरावट चल रही थी।

अमेरिका का डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज बृहस्पतिवार को 1,190.95 अंक गिरकर बंद हुआ था। यह डाउ जोन्स के इतिहास में सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट है।



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LIC के IPO से इस सेक्टर की कंपनियों को होगा भारी फायदा

26 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। फिच रेटिंग्स का मानना है कि जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी की जवाबदेही और पारदर्शिता में सुधार होगा। फिच रेटिंग्स ने इसके साथ ही बुधवार को कहा कि एलआईसी के आईपीओ से पूरे बीमा उद्योग को फायदा होगा। फिच ने कहा कि इसका लाभ संभवत: पूरे बीमा उद्योग को मिलेगा। उद्योग अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित कर पाएगा, जिससे देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह भी बढ़ेगा। फिच ने कहा कि उसे उम्मीद है कि एक बार एलआईसी का आईपीओ आने के बाद निजी क्षेत्र की कुछ बीमा कंपनियां भी मध्यम अवधि में अपने शेयरों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने को प्रोत्साहित होंगी। हालांकि, मौजूदा नियमनों के तहत सभी बीमा कंपनियों के लिए सूचीबद्ध होना अनिवार्य नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 2020-21 के बजट भाषण में घोषणा की थी कि सरकार की विनिवेश पहल के तहत एलआईसी को सूचीबद्ध किया जाएगा। अभी एलआईसी में सरकार की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है। फिच ने कहा कि सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध एलआईसी को अधिक कड़े खुलासा नियमों को पूरा करना होगा। इससे कंपनी के भीतर ही अनुपालन और जवाबदेही की मजबूत संस्कृति बनेगी।



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मौद्रिक नीति रूपरेखा की समीक्षा कर रहा रिजर्व बैंक: गवर्नर

23 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि केंद्रीय बैंक मौद्रिक नीति निर्णय में खुदरा मुद्रास्फीति के लक्ष्य की रूपरेखा के साथ उसकी प्रभावित की समीक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस बारे में सरकार समेत संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श की योजना है। सरकार ने मुद्रास्फीति को निश्चित सीमा के दायरे में रखने के प्रयास के तहत 2016 में आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति गठित करने का फैसला किया। समिति को नीतिगत दर (रेपो दर) निर्धारित करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति को 2 प्रतिशत घट-बढ़ के साथ महंगाई दर को 4 प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गयी। दास ने बातचीत में कहा, ‘‘मौद्रिक नीति रूरपेखा साढे तीन साल से काम कर रहा है। हमने आंतरिक समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है कि आखिर मौद्रिक नीति रूपरेखा ने किस तरीके से काम किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने आंतरिक रूप से मौद्रिक नीति रूपरेखा के प्रभाव की समीक्षा शुरू की है। चालू वर्ष के मध्य में जून के आसपास हम सभी विश्लेषकों और विशेषज्ञों तथा संबद्ध पक्षों के साथ बैठक करेंगे। इस बारे में सरकार की भी सलाह ली जाएगी।’’ दास ने कहा कि निश्चित रूप से आरबीआई को सरकार से बातचीत करनी है क्योंकि रूपरेखा कानून का हिस्सा है।मौद्रिक नीति का लाभ ग्राहकों को मिलने के संदर्भ में गवर्नर ने कहा कि इसमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा है तथा आने वाले समय में यह और बेहतर होगा। उन्होंने कहा, ‘‘मौद्रिक नीति में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने में सुधार आया है। दिसंबर एमपीसी में नये कर्ज में 0.49 प्रतिशत का लाभ ग्राहकों को दिया गया जबकि फरवरी में यह बढ़कर 0.69 प्रतिशत हो गया है। यानी इसमें सुधार आया है।’’केंद्रीय बैंक ने छह फरवरी को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार दूसरी बार नीतिगत दर रेपो को 5.15 प्रतिशत पर बरकरार रखा। हालांकि उसने नरम रुख को बनाये रखा है। दिसंबर में नीतिगत दर को यथावत रखने से पहले लगातार पांच बार नीतिगत दर में कटौती की गयी। कुल मिलाकर इसमें 1.35 प्रतिशत की कटौती की गयी। आरबीआई के वित्तीय लेखा वर्ष को केंद्र सरकार के अनुरूप किये जाने के बारे में दास ने कहा कि चालू वित्त वर्ष जून में समाप्त होगा जबकि अगला वित्त वर्ष जुलाई में शुरू होगा और 31 मार्च को समाप्त होगा।उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा वर्ष जून तक होगा। अगला लेखा वर्ष एक जुलाई को शुरू होगा और 31 मार्च को समाप्त होगा। अत: 12 महीने का समय होगा।’’ दास ने कहा कि केंद्रीय बैंक पास नौ महीने (जुलाई 2020 से मार्च 2021) की अवधि के लिये बही-खाता तैयार करने की जिम्मेदारी होगी। आरबीआई का पूर्ण वित्त वर्ष एक अप्रैल 2021 से शुरू होगा। इस कदम के साथ आरबीआई करीब आठ दशक से चले आ रहे लेखा वर्ष को समाप्त करेगा। अप्रैल 1935 में गठित आरबीआई शुरू में जनवरी-दिसंबर को लेखा वर्ष मानता था लेकिन मार्च 1940 में दसे बदलकर जुलाई-जून कर दिया गया।आर्थिक पूंजी रूपरेखा पर गठित विमल जालान समिति ने आरबीआई लेखा वर्ष को 2020-21 अप्रैल-मार्च करने का सुझाव दिया था।



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प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत वितरित हो चुके हैं 50,850 करोड़ रुपये: सरकार

22 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत किसानों के बीच अभी तक 50,850 करोड़ रुपये का वितरण किया गया है। इस योजना के 24 फरवरी को एक साल पूरे होने वाले हैं। कृषि मंत्रालय ने इससे पहले योजना से जुड़ी जानकारियां साझा की हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में गोरखपुर में पिछले साल 24 फरवरी को इस योजना की औपचारिक शुरुआत की थी। इस योजना के तहत पात्र किसानों को साल में तीन किस्तों में छह हजार रुपये की मदद मिलती है।एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के 24 फरवरी 2020 को एक साल होने वाले हैं।’’बयान में कहा गया कि देशभर में किसानों के परिवार को आय में मदद करने के लिये तथा उन्हें कृषि कार्यों समेत घरेलू खर्च में सक्षम बनाने के लिये इस योजना की शुरुआत की गयी थी।मंत्रालय ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार अभी तक 50,850 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का वितरण कर चुकी है।’’कृषि गणना 2015-16 के आकलन के अनुसार, इस योजना में 14 करोड़ किसानों को लाभमिल सकता है। इस साल 20 फरवरी तक 8.46 करोड़ किसानों को योजना की राशि मिल चुकी है।यह योजना दिसंबर 2018 से लागू है। लाभार्थियों की पहचान करने की समयसीमा एक फरवरी 2019 रखी गयी थी। यह काम राज्य सरकारों के जिम्मे था। इस योजना के तहत शुरुआत में सिर्फ उन छोटे किसानों को लाभ मिलना था, जिनके पास दो एकड़ या इससे कम खेत हैं। हालांकि बाद में इसका सभी छोटे बड़े किसानों को इसका पात्र बना दिया गया।



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Share Market: शुरुआती कारोबार में गिरावट का दौर, सेंसेक्स 300 और निफ्टी 100 अंक लुढ़का

18 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। स्टॉक मार्केट में आज मंगलवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिल रही है। बीएसई के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स की बात करें, तो यह आज मामूली गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स आज करीब 13 अंक की गिरावट के साथ 41,042.46 पर खुला है। खबर लिखे जाने तक यह न्यूनतम 40,778.56 अंक तक गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी आज 17.55 अंक की गिरावट के साथ 12,028.25 पर खुला है। खबर लिखने तक निफ्टी न्यूनतम 11,954.35 अंकों तक गया।सेंसेक्स मंगलवार सुबह 9 बजकर 53 मिनट पर शुरुआती कारोबार में 231.91 अंक की गिरावट के साथ 40,823.78 पर कारोबार कर रहा था और निफ्टी 73.30 अंक की गिरावट के साथ 11,972.50 पर कारोबार कर रहा था। इस समय पर निफ्टी-50 में 6 कंपनियों के शेयर हरे निशान पर और 44 कंपनियों के शेयर लाल निशान पर कारोबार करते दिखे।

शुरुआती कारोबार में आज मंगलवार को निफ्टी 50 में शामिल कंपनियों में से YES BANK, INFRATEL, INDUSIND BANK, VEDANTA LIMITED और TATA MOTORS के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दिखाई दी।

भारतीय रुपया आज मंगलवार को गिरावट के साथ खुला है। यह आज एक डॉलर के मुकाबले 11 पैसे की गिरावट के साथ 71.40 पर खुला है। गौरतलब है कि रुपया सोमवार को एक डॉलर के मुकाबले 71.29 पर बंद हुआ था। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में भी रुपये में गिरावट देखने को मिल रही है। क्रूड ऑयल की बात करें, इसमें आज गिरावट देखी जा रही है। क्रूड ऑयल डब्ल्यूटीआई का वायदा भाव मंगलवार सुबह 0.82 फीसद की गिरावट के साथ 51.89 डॉलर प्रति बैरल पर और ब्रेंट ऑयल का वायदा भाव 1.14 फीसद या 0.66 डॉलर की गिरावट के साथ 57.01 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेंड कर रहा था।



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बजट प्रस्तावों का महंगाई पर नहीं होगा कोई असर: RBI गवर्नर शक्तिकांत दास

15 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शनिवार को कहा कि बजट प्रस्तावों का महंगाई पर बहुत अधिक असर नहीं होगा क्योंकि सरकार राजकोषीय घाटे को सीमित करने की एफआरबीएम कानून में तय राह पर कमोबेश बनी हुई है। इस महीने की शुरुआत में पेश आम बजट में राजस्व संग्रह में कमी के चलते 2019-20 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बढ़ाकर जीडीपी का 3.8 प्रतिशत कर दिया गया था, जो इससे पहले 3.3 प्रतिशत था।दास ने कहा, “किसी भी बजट का मु्द्रास्फीति पर सीधा असर उसके राजकोषीय घाटे के आंकड़े से जुड़ा होता है, जब उधार में बढ़ोतरी होती है, लेकिन सरकार ने राजकोषीय अनुशासन के सिद्धान्त का पालन किया है।” उन्होंने कहा, “एफआरबीएम कानून के ‘राहत उपनियम’ के तहत चालू वर्ष के साथ ही अगले वर्ष में भी घाटे की आंकड़े एफआरबीएम समिति की सिफारिशों के अनुसार निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हैं।”राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून के ‘राहत उपनियम’ के तहत सरकार आर्थिक दबाव के समय राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों को 0.5 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। ऐसा अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलावों के समय भी किया जा सकता है, जब विकास तेजी से कम होता है। परंपरा के अनुसार बजट के बाद वित्त मंत्री ने शुक्रवार को आरबीआई के निदेशक मंडल को संबोधित किया। इस संबोधन के बाद दास ने पत्रकारों से कहा, “सरकार के उधारी में अच्छी बात है कि ये छोटी बचत से आ रही है। इसलिए मुझे नहीं लगता है कि इसका मुद्रास्फीति पर बहुत अधिक असर होगा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का निश्चित रूप से मु्दास्फीति पर सकारात्मक असर होगा।” उन्होंने कहा, “मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी की मुख्य वजह खाद वस्तुओं की महंगाई है, खासतौर से दूध, मछली और प्रोटीन से संबंधित विभिन्न उत्पाद।”खुदरा कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर जनवरी में 7.59 प्रतिशत थी, जो करीब छह साल में सबसे अधिक है। इस दौरान सब्जियों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी का रुख देखने को मिला। सरकार को अंतरिम लाभांश देने के बारे में सवाल पूछने पर दास ने कहा कि इस बारे में सरकार ने कुछ नहीं कहा है और यदि कोई फैसला लिया गया, तो उसे सभी को बताया जाएगा। उन्होंने कहा, “व्यापक पारदर्शिता के लिए हम आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की बैठक का ब्यौरा (वेबसाइट) पर अपलोड कर रहे हैं। अगर कोई भी फैसला किया जाएगा, तो वह वेबसाइट पर अपलोड होगा।” कर्ज वृद्धि में नरमी के बारे में उन्होंने कहा कि अब इसमें तेजी के संकेत मिल रहे हैं।



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Gold Futures price: सोने-चांदी की वायदा और वैश्विक कीमतों में आया उछाल

13 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से मौतों की संख्या में तेज वृद्धि के कारण निवेशक सेफ हैवन समझे जाने वाले सोने में अधिक निवेश कर रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के भाव में आज 13 फरवरी यानी गुरुवार को बढ़त देखने को मिल रही है। वैश्विक कीमतों में तेजी के चलते सोने के वायदा भाव में भी गुरुवार को बढ़त देखी जा रही है। साथ ही चांदी के वायदा भाव में भी तेजी देखने को मिल रही है।एमसीएक्स एक्सचेंज पर गुरुवार सुबह तीन अप्रैल 2020 का सोने का वायदा भाव 0.42 फीसद या 172 रुपये की तेजी के साथ 40656 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेंड कर रहा था। गौरतलब है कि सोने के हाजिर भाव में बुधवार को 128 रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे यह 41,148 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।सोने के साथ ही चांदी के वायदा भाव में भी गुरुवार को अच्छी-खासी तेजी देखने को मिल रही है। पांच मार्च 2020 का चांदी का वायदा भाव गुरुवार सुबह 0.64 फीसद या 290 रुपये के उछाल के साथ 45790 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेंड कर रहा था। हाजिर भाव की बात करें, तो बुधवार को चांदी 700 रुपये की भारी गिरावट के साथ 46,360 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।अंतरराष्ट्रीय कीमतों की बात करें, तो ब्लूमबर्ग के अनुसार, सोने का हाजिर भाव गुरुवार सुबह 0.46 फीसद या 7.27 डॉलर की तेजी के साथ 1573.33 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड कर रहा था। सोने के साथ ही चांदी के हाजिर भाव में भी गुरुवार को तेजी देखने को मिल रही है। यह गुरुवार सुबह 0.75 फीसद या 0.13 डॉलर की तेजी के साथ 17.62 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेंड कर रही थी।



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भारत को तीन ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में 70 साल लग गए: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

13 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत को तीन ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में 70 साल लग गए और आश्चर्य है कि किसी ने भी यह सवाल नहीं पूछा कि इसमें इतना लंबा वक्त क्यों लग गया। प्रधानमंत्री ने बुधवार को एक टीवी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। प्रधानमंत्री ने पिछले 70 सालों में देश की सुस्त आर्थिक रफ्तार पर चुप्पी को लेकर सवाल उठाए।पीएम ने कहा कि उन्होंने अब एक लक्ष्य तय किया है, तो उनसे सवाल पूछे जा रहे हैं। पीएम ने कहा कि उनकी सरकार इस लक्ष्य को पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। पीएम ने कहा कि एक कठिन लक्ष्य चुनना और उस पर काम करना बेहतर होता है।प्रधानमंत्री ने कहा 'भारतीय अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन इसे पाया जा सकता है।' उन्होंने कहा, 'आज भारतीय अर्थव्यवस्था करीब तीन ट्रिलियन डॉलर की है। क्या आपने कभी देश में सुना कि तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तय किया गया था? कभी नहीं। हमें तीन ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने में 70 साल लग गए।'

पीएम मोदी ने कार्यक्रम में आगे कहा, 'पहले किसी ने भी यह नहीं पूछा कि इसमें इतना समय क्यों लग गया और ना ही किसी ने उत्तर दिया।' उन्होंने कहा, 'अब हमने एक लक्ष्य निर्धारित किया है। हम सभी सवालों का सामना कर रहे हैं और इस लक्ष्य को पाने की हरसंभव कोशिश में लगे हैं। भारत अब समय बर्बाद नहीं करेगा। यह आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगा। केंद्रीय बजट पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा।' पीएम ने कहा कि सरकार पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।



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BPCL, LIC के बाद अब SAIL में हिस्सेदारी बेचने की है सरकार की योजना, 1000 करोड़ जुटाने का है लक्ष्य

09 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। सरकार ऑफर फॉर सेल के जरिए Steel Authority of India Ltd (SAIL) में अपनी पांच फीसद हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। इससे सरकारी खजाने को 1,000 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। एक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी। डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (दीपम) और इस्पात मंत्रालय के अधिकारियों ने सेल में हिस्सेदारी बेचने के लिए सिंगापुर और हांगकांग में रोडशो करने की योजना बनाई है। हालांकि, कोरोनावायरस संक्रमण के कारण हांगकांग में रोड शो को कैंसल करना पड़ सकता है।

SAIL में सरकार की 75 फीसद की हिस्सेदारी है। सरकार ने दिसंबर, 2014 में कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेची थी। अधिकारी ने कहा, ''हम ऑफर फॉर सेल के जरिए पांच फीसद हिस्सेदारी बेचने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि, हम रोड शो के दौरान निवेशक की मांग का आकलन करेंगे।''

वर्तमान बाजार मूल्य पर कंपनी की पांच फीसद हिस्सेदारी बेचने पर सरकार को 1,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। BSE पर शुक्रवार को SAIL के एक शेयर की कीमत 48.65 रुपये थी।सरकार की कोशिश चालू वित्त वर्ष में सेल में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर होगी क्योंकि उसकी नजर चालू वित्त वर्ष में 65,000 करोड़ रुपये के संशोधित विनिवेश लक्ष्य तक पहुंचने की है। सीपीएसई में हिस्सेदारी की बिक्री के जरिए चालू वित्त वर्ष में अब तक 34,000 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। मार्च के आखिर तक शेष 31,000 करोड़ रुपये जुटाया जाना है।



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घरेलू उद्योगों के हित में बढ़ाया गया कुछ तैयार उत्पादों पर सीमा शुल्क: सीतारमण

04 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। रसोई के बर्तन, घरेलू सामान और चप्पल जूते पर सीमा शुल्क बढ़ाने से इन वस्तुओं के महंगे होने को लेकर बढ़ रही आशंका के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश में विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देने के इरादे से ही बजट में कुछ तैयार उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क बढ़ाया है। जिन वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाया गया है, उनमें से ज्यादातर का उत्पादन देश में पहले से हो रहा है। सीतारमण ने बजट बाद संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि जिन वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाया गया है, उनमें से ज्यादातर का उत्पादन देश में हो रहा है। ‘‘देशहित में और छोटे उद्योगों का ध्यान रखते हुय ही इन पर सीमा शुल्क बढ़ाया गया है।’’वित्त मंत्री के शनिवार को पेश 2020-21 के बजट में चप्पल, जूतों पर सीमा शुल्क 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत, चीन से आयात होने वाले खाने-पीने के बर्तन, रसोई के बर्तन, पानी का फिल्टर (40 लीटर तक क्षमता वाले) और घरों में उपयोग होने वाले अन्य सामान पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया गया है।इसी प्रकार, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अखरोट पर सीमा शुल्क 30 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 100 प्रतिशत, चीनी मिट्टी के बर्तनों पर सीमा शुल्क 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया गया है। सीतारमण ने कहा कि इन वस्तुओं का देश में भी उत्पादन हो रहा है। इनकी गुणवत्ता में भी ज्यादा अंतर नहीं है, इसलिये इनके आयात पर शुल्क बढ़ाया गया है ताकि विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके। ‘‘जो उत्पाद हमारी अर्थव्यवस्था के लिये जरूरी नहीं है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उसकी जरूरत है तो आप उसे मंगाइये। हमें तो यह देखना है कि देश हित में है कि नहीं, छोटे उद्योगों को फायदा होगा कि नही।’’उन्होंने कहा कि इनमें कच्चे माल को शामिल नहीं किया गया है।मध्यवर्ती सामान भी इनमें शामिल नहीं होगा।ऐसे सामान पर शुल्क नहीं बढ़ाया गया है। विदेश यात्रा करने अथवा विदेशों में बच्चों को पढ़ाई के लिये भेजने पर सात लाख रुपये की विदेशी मुद्रा खर्च करने को भी कर के दायरे में लाया गया है।इसके बारे में पूछे गये सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘आप विदेश भेज रहे हैं कोई समस्या नहीं, एक साल में सात लाख रुपये से खर्च कर रहे हैं, आपकी कमाई कितनी होगी, उसमें से सरकार यदि थोड़ा बहुत लेती है तो कोई बुराई नहीं।’’बजट में ‘असेंबल इन इंडिया’ पर जोर दिया गया है, क्या मेक इन इंडिया को छोड़ दिया गया है? इस सवाल पर सीतारमण ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है मेक इन इंडिया भी चलता रहेगा। देश में कौशल बढ़ रहा है, निपुणता बढ़ रही है। असेंबलिंग भी कम नहीं है। दोनों में ही सम्मानजनक रोजगार है। दोनों बढ़ेंगे।’’बजट भाषण में दस प्रतिशत आर्थिक वृद्धि (बाजार मूल्य पर आधारित) का अनुमान व्यक्त किये जाने के बारे में पूछे जाने पर वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थशास्त्रियों के बीच यह वृद्धि काफी चर्चित है। यह कोई नया पैमाना नहीं है। इसमें मुद्रास्फीति शामिल रहती है।



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