पश्चिम बंगाल

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ओडिशा में बोले शाह, CAA में किसी भी मुस्लिम या अल्पसंख्यक की नागरिकता नहीं जाने देंगे

28 Feb 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

ओडिशा के भुवनेश्वर जनता मैदान में गृह मंत्री अमित शाह ने सीएए के समर्थन आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान शाह ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, लेफ्ट और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला। अमित शाह ने कहा कि विपक्ष नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के बारे में क्यों झूठ बोल रहा है? मैं यहां फिर से दोहराता हूं कि किसी भी मुस्लिम या अल्पसंख्यक की नागरिकता को सीएए के माध्यम से नहीं लिया जाएगा, क्योंकि यह नागरिकता देने के लिए एक अधिनियम है जो इसे दूर नहीं ले जाएगा।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन लोगों को नागरिकता देने और मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए सीएए लेकर आए हैं, जिन पर धर्म के आधार पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अत्याचार हो रहा है. जिनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।



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आधार और PAN कार्ड नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं : दिलीप घोष

18 Jan 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

हावड़ा (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने शुक्रवार को कहा कि आधार और पैन कार्ड नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने शरणार्थियों से आग्रह किया कि वे संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत अपनी नागरिकता प्राप्त करें। घोष यहां सीएए के समर्थन में आयोजित एक रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने लोगों से कहा कि वे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं के जाल में नहीं आएं जो कह रहे हैं कि दशकों से पश्चिम बंगाल में रह रहे उन शरणार्थियों को नागरिकता के लिए आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है जिनके पास आधार और पैन कार्ड है।

घोष ने कहा, ...यह गुमराह करने वाली बात है क्योंकि शरणार्थियों को नए सिरे से नागरिकता कानून के जरिए नागरिकता लेनी होती है। यदि आप अपना विवरण जमा नहीं करते हैं, तो आप परेशानी में पड़ जाएंगे।’’ अपने भाषण में उन्होंने देश भर में सीएए के खिलाफ हो रही रैलियों पर भी निशाना साधा और कहा जब हिंदुओं को पड़ोसी देशों से भारत भागना पड़ा तो बुद्धिजीवी कभी सड़कों पर नहीं उतरे।’’ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि सीएए शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए लाया गया है न कि नागरिकों से इसे छीनने के लिए।उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री नागरिकता के लिए आवेदन करने की खातिर तीन से चार महीने का समय देंगे। आप सभी को नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहिए। आपको कुछ भी साबित करने के लिए दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं है, बस अपने माता-पिता के नाम के साथ फॉर्म भरें और आपको नागरिकता मिल जाएगी।’’राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल ने घोष के बयान की आलोचना की और संसदीय कार्य राज्य मंत्री तापस रॉय ने कहा, यह तय करने के लिए दिलीप घोष कौन हैं कि कौन नागरिक है और कौन नहीं? इस राज्य के लोग दिलीप घोष और उनकी पार्टी को उनके अहंकार का जवाब देंगे।’’



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ट्रेड यूनियन हड़ताल: बैंकिंग सेवाओं पर रहा असर, कई राज्यों में जनजीवन प्रभावित

08 Jan 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का बुधवार को कई प्रकार की बैंकिंग सेवाओं पर देश भर में असर दिखा लेकिन आवश्यक सेवाएं सामान्य रहीं । बंगाल और केरल में तथा पूर्वोत्तर राज्य असम में हड़ताल से सड़क और रेल यातायात भी प्रभावित रहा। यूनियनों ने केंद्र की आर्थिक नीतियों को मजदूर और जनविरोधी बताते हुए इस एक दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया है। बुधवार को अधिकांश जगह बैंकों की शाखाएं खुली हुई थीं लेकिन बैंक कर्मचारियों के हड़ताल का समर्थन करने से देश में कई जगह बैंकों में नकदी जमा करने और निकालने समेत कई सेवाएं प्रभावित हुईं। त्रिपुरा जैसे कुछ स्थानों पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों की कई शाखाएं बंद रहीं। सरकारी विभागों के कामकाज पर हड़ताल का असर नहीं पड़ा है। इस दौरान, ट्रेड यूनियनों ने जगह जगह छोटे-मोटे धरने-प्रदर्शन भी किए।ट्रेड यूनियनों ने दावा किया था कि हड़ताल में करीब 25 करोड़ लोग शामिल होंगे। देशभर में कहीं पर भी जरूरी सेवाओं पर असर पड़ने की कोई खबर नहीं है। अधिकांश जगहों पर रेल सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं जबकि बिजली उत्पादन, तेल रिफाइनरी और पेट्रोल पंप सामान्य रूप से चलते रहे। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का वाम मोर्चा शासित केरल में करीब-करीब हर जगह असर दिखा। केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) और निजी आपरेटरों की बसें सुबह से ही सड़कों पर नहीं दिख रही थीं। तिरुवनंतपुरम में केएसआरटीसी की नगर और लंबी दूरी के मार्गों की बस सेवाएं बंद रहीं। सड़कों पर वाहनों और ऑटो रिक्शा की आवाजाही भी कम थी। वहीं, पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में सड़क और रेल यातायात बाधित हुआ। हड़ताल समर्थकों ने राज्य के कुछ हिस्सों में रैलियां निकालीं और उत्तर 24 परगना जिले में सड़कों और रेलवे पटरियों को अवरुद्ध कर दिया। हालांकि, पुलिस ने तत्काल वाहनों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उन्हें हटा दिया।

कोलकाता में सरकारी बसें सामान्य रूप से चल रही हैं, लेकिन शुरुआती घंटों में निजी बसों की संख्या कम थी। इस दौरान शहर में मेट्रो सेवाएं सामान्य थीं और सड़कों पर ऑटो-रिक्शा तथा टैक्सियां भी चल रही थीं। शहर के कई इलाकों में भारी पुलिस तैनाती देखी गई है। उत्तर बंगाल के कुछ इलाकों में तृणमूल कांग्रेस ने हड़ताल का विरोध करते हुए रैलियां निकालीं और लोगों से सामान्य स्थिति बनाए रखने का आग्रह किया। असम में हड़ताल से आम जनजीवन प्रभावित रहा क्योंकि सड़कों में वाहनों की संख्या कम रही और बाजार भी बंद रहे। गुजरात में बैंकिंग सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हुईं। राज्य में परिवहन सेवा पूरी तरह से सामान्य रही और कई व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के दफ्तर भी खुले रहे। ट्रेड यूनियनों का दावा है कि गुजरात में कई हिस्सों में कारखाने में उत्पादन प्रभावित हुआ। हालांकि, उद्योगपतियों ने कारोबार सामान्य रहने की बात कही है। ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का त्रिपुरा में मिला-जुला असर देखने को मिला। वहां रेल और वाहन सेवा सामान्य रहने के बावजूद कई जगहों पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों के कार्यालय बंद रहे। सरकार ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से कहा था कि वे अपने कर्मचारियों को हड़ताल से दूर रहने को कहें। साथ ही कामकाज के सुचारू तरीके से संचालन को आपात योजना भी तैयार करने की सलाह दी थी। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने बताया कि हम बैंक विलय, निजीकरण, शुल्क वृद्धि और वेतन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के सदस्यों के साथ विभिन्न महासंघ भी हिस्सा ले रहे हैं। केंद्रीय यूनियनों में एटक, इंटक, सीटू, एआईसीसीटीयू, सेवा, एलपीएफ समेत अन्य शामिल है। उन्होंने बताया, हम महंगाई, सार्वजनिक कंपनियों की बिक्री, रेलवे, रक्षा, कोयला समेत अन्य क्षेत्रों में 100 प्रतिशत एफडीआई और 44 श्रम कानूनों को संहिताबद्ध करने (श्रम संहिता) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार की नीतियों के खिलाफ अखिल भारतीय स्तर पर होने वाली इस हड़ताल में करीब 25 करोड़ लोगों के भाग लेने का अनुमान व्यक्त किया गया है। कौर ने कहा कि हमारी अन्य मांगों में सभी के लिए 6000 रुपये न्यूनतम पेंशन, किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और लोगों को राशन की पर्याप्त आपूर्ति शामिल हैं। कौर ने दावा किया , हमें पूरे देश भर से खबरें मिल रही हैं। भेल के कर्मचारी हड़ताल परहैं। ऑयल यूनियन हड़ताल पर है। पूर्वोत्तर, ओडिशा, पुडुचेरी, केरल और महाराष्ट्र में बंद की स्थिति है।



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ट्रेड यूनियनों की हड़ताल, कई राज्यों में रोकी गई ट्रेनें, सड़कें की गईं ब्लॉक

08 Jan 2020 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। श्रमिक व किसान संगठनों ने बुधवार को भारत बंद का आह्वान किया है। जिसका असर अब दिखाई दे रहा है। 10 ट्रेड यूनियंस की तरफ से भारत बंद का आयोजन किया गया है, जिसका समर्थन 6 बैंक यूनियंस भी कर रही हैं। बैंक यूनियंस द्वारा हड़ताल का समर्थन किए जाने की वजह से आज बैंकों का कामकाज लगभग ठप्प रहेगा। ट्रेड यूनियन ने बयान जारी कर कहा था कि इस हड़ताल में करीब 25 लाख लोगों के शामिल होने की संभावना है।ट्रेड यूनियनों ने दावा किया है मोदी सरकार द्वारा आर्थिक और जन विरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है। साथ ही साथ तमाम यूनियन्स सरकार द्वारा लाए जा रहे लेबर लॉ का भी विरोध कर रही हैं। स्टूडेंट यूनियंस शिक्षण संस्थानों में फीस बढ़ोत्तरी का विरोध कर रहे हैं। यूनियन ने मांग की है कि सरकार कर्मचारियों से बात करके नीतियों को बनाना चाहिए।

यूनियन की मांग है कि न्यूनतम मजदूरी 21 हजार रुपए की जाए। मजदूरों को मिड डे मील मिलना चाहिए। जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों पर सरकार रोक लगाए। 6,000 रुपए की न्यूनतम पेंशन की सुविधा होनी चाहिए। इसके साथ ही यूनियनों ने पब्लिक सेक्टर बैंक के मर्जर का विरोध किया हैदिन की शुरूआत होने के साथ ही भारत बंद का असर बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक जैसे राज्यों पर दिखने लगा है। बंगाल में तो प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन को रेक दिया और ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि सिलिगुड़ी में राज्य सरकार की बस के ड्राइवर हेल्मेट पहनकर बस चला रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि अगर कोई हमला करें तो उसका सामना किया जा सके।



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रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन का ममता सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम

15 Jun 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। दिल्ली स्थित एम्स और सफदरजंग अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राज्य के आंदोलनकारी डॉक्टरों की मांगों को पूरा करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसा न होने पर वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और सफदरजंग अस्पतालों के डॉक्टरों ने कोलकाता में अपने सहयोगियों पर हमलों के विरोध में शुक्रवार को काम का बहिष्कार किया था।

शनिवार को काम फिर से शुरू करने वाले एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के सदस्यों ने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों की मांगें 48 घंटे के भीतर पूरी नहीं की जाती हैं तो उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम पश्चिम बंगाल सरकार के शत्रुतापूर्ण और अड़ियल रवैये की निंदा करते हैं। एम्स, नयी दिल्ली में हमारा विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक न्याय नहीं मिल जाता।’’

एम्स आरडीए ने एक बयान में कहा, ‘‘14 जून को हुई आम सभा की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, आरडीए पश्चिम बंगाल सरकार को हड़ताली डॉक्टरों की मांगों को पूरा करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम देती है। मांगें पूरी न होने पर एम्स नयी दिल्ली में हम अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। हमें उम्मीद है कि देशभर में हमारे सहयोगी जरूरत की इस घड़ी में हमारे साथ जुड़ेंगे।’’

आरडीए सदस्यों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के प्रति आभार व्यक्त किया और गतिरोध को दूर करने के लिए उनके कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘हमें पूरी उम्मीद है कि वह इसे प्राथमिकता देते हुए इस मामले का अति शीघ्र समाधान करेंगे।’’

सफदरजंग अस्पताल आरडीए के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने भी इस मामले पर समान रुख अपनाया। दिल्ली के चिकित्सकों ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब ममता बनर्जी ने कुछ दिन पहले अपने राज्य में हड़ताली डॉक्टरों को हड़ताल वापस लेने या छात्रावास खाली करने के लिए चार घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पश्चिम बंगाल में अपने सहयोगियों पर हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने 17 जून को हड़ताल का आह्वान किया है।



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मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगी दीदी

29 May 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा था कि वह 30 मई को प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी के शपथ-ग्रहण समारोह में हिस्सा लेंगी पर अब उन्होंने इनकार कर दिया है। ममता बनर्जी ने एक पत्र में मोदी को बधाई देते हुए लिखा कि शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की मेरी योजना थी, हालांकि पिछले एक घंटे से मैं मीडिया रिपोर्टों को देख रही हूं कि भाजपा दावा कर रही है कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा में उसके 54 कार्यकर्ता मारे गए हैं। यह असत्य है। मैं समारोह में शामिल नहीं होने के लिए मजबूर हूं। उन्होंने बताया कि यह राजनीतिक हत्या नहीं है, बल्कि आपसी रंजिशों के मसले हैं।

उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि शपथग्रहण समारोह लोकतंत्र का जश्न मनाने का एक अच्छा अवसर है, न कि किसी भी राजनीतिक दल द्वारा अवमूल्यन किया जाना चाहिए। इससे पहले भाजपा ने पश्चिम बंगाल में पिछले एक साल में राजनीतिक हिंसा में मारे गए 40 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजनों को बृहस्पतिवार को होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में आमंत्रित किया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं होंगी। बनर्जी ने इसके साथ ही भाजपा के इस दावे को भी खारिज किया कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस द्वारा की गई हिंसा में भाजपा के कई कार्यकर्ता मारे गए। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो बनर्जी द्वारा ट्विटर पर यह घोषणा परोक्ष रूप से विरोध के तौर पर आयी जब भाजपा के 40 से अधिक उन कार्यकर्ताओं के परिवारों को ट्रेन से नयी दिल्ली ले जाया गया जिनकी उनकी पार्टी द्वारा कथित रूप से हत्या कर दी गई। भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार के ये लोग राजधानी दिल्ली में मोदी के शपथग्रहण समारोह में शामिल होंगे। बनर्जी को मंगलवार को एक आमंत्रण मिला था और उन्होंने संवाददाताओं से कहा था कि अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करने के बाद वे कार्यक्रम में एक ‘‘संवैधानिक शिष्टाचार’’ के तौर पर शामिल होंगी। यद्यपि जब यह पता चला कि 40 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार के सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया है जिनकी पिछले एक वर्ष के दौरान कथित रूप से राजनीतिक हिंसा में हत्या कर दी गई तो बनर्जी ने कहा कि कि वे समारोह में शामिल नहीं होंगी क्योंकि ‘‘लोकतंत्र का जश्न मनाने के अवसर का राजनीतिक नंबर बनाने के लिए अवमूल्यन नहीं किया जाना चाहिए।’’ बनर्जी ने एक ट्वीट में लिखा, ‘‘बधाई, नये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी। मेरी योजना ‘‘संवैधानिक निमंत्रण’’ को स्वीकार करने और शपथग्रहण समारोह में शामिल होने की थी। लेकिन पिछले एक घंटे से मैं मीडिया में ऐसे खबरें देख रही हूं कि भाजपा दावा कर रही है कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा में लोगों की हत्या हुई है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरी से गलत है। बंगाल में कोई राजनीतिक हत्या नहीं हुई है। ये मौतें निजी शत्रुता, पारिवारिक झगड़ों और अन्य विवादों के चलते हुई होंगी, इनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। हमारे पास ऐसा कोई रिकार्ड नहीं है।’’ बनर्जी ने कहा कि इसलिए वे समारोह में शामिल नहीं होने के लिए ‘‘मजबूर’’ हुई हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह समारोह लोकतंत्र का जश्न मनाने का एक विशेष अवसर है। यह कोई ऐसा अवसर नहीं है जिसका किसी राजनीतिक दल को महत्व घटाना चाहिए या कोई इसका इस्तेमाल अपने राजनीतिक हित साधने के अवसर के तौर पर करे। कृपया मुझे माफ करिये।’’ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जतायी और इस पर जोर दिया कि बनर्जी के कार्यकाल में राज्य में 100 से अधिक राजनीतिक हत्याएं हुई हैं। प्रदेश भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने कहा, ‘‘हमारे युवा कार्यकर्ताओं की हत्या करके उन्हें पेड़ों से लटका दिया गया। बनर्जी के शासन में 100 से अधिक राजनीतिक हत्याएं हुई हैं। हम ऐसे पीड़ितों के परिवारों को राष्ट्रपति के पास ले गए हैं, अब हम उन्हें देश के सामने पेश करना चाहते हैं।’’ भाजपा नेता एवं कोलकाता दक्षिण सीट से भाजपा के उम्मीदवार रहे चंद्र कुमार बोस ने कहा कि बनर्जी राजनीतिक हत्याओं की जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती क्योंकि वह गृह प्रभार भी संभालती हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के रिश्तेदार बोस कोलकाता दक्षिण सीट से चुनाव हार गए थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग राज्य में तृणमूल कांग्रेस शासन के खिलाफ खड़े हुए हैं जहां ‘‘कानून एवं व्यवस्था’’ का अस्तित्व नहीं है और पुलिस सत्ताधारी पार्टी का एक ‘‘मोर्चा’’ बन गई है।’’ उन्होंने कहा कि इसके परिणाम चुनावी नतीजों में दिखे। पश्चिम बंगाल में सात चरण के लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा हुई थी।

23 मई को परिणाम घोषित होने के बाद भी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच झड़पों की घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित हिंसा को एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था। कोलकाता में अमित शाह के रोडशो के दौरान हिंसक झड़पें भड़क गई थीं जिसमें कई व्यक्ति घायल हुए और वाहनों को जला दिया गया था। इस दौरान एक कालेज में प्रसिद्ध समाज सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर की आवक्ष प्रतिमा तोड़ दी गई थी। इससे पहले बनर्जी के मोदी के शपथग्रहण समारोह में शामिल होने के निर्णय को, कई लोगों ने प्रधानमंत्री की तरफ शांति पहल के तौर पर देखा था। हाल ही में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोदी और बनर्जी ने एक दूसरे पर तीखे आरोप लगाए थे। दोनों नेताओं ने पश्चिम बंगाल में अपनी - अपनी पार्टियों के लिए प्रचार का नेतृत्व किया था। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में 18 सीटें जीत कर आश्चर्यजनक प्रदर्शन किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटों पर जीत मिली। भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में मात्र दो सीटें जीती थी।



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NRC बंगाल पर थोपा गया तो गृह युद्ध, राजनाथ से मिलने के बाद ममता ने दी धमकी

31 Jul 2018 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के मुद्दे पर गर्म हो रही सियासत के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। बाहर आने पर बोलीं कि अगर बंगाल में एनआरसी लागू किया गया तो गृह युद्ध छिड़ जाएगा।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने एनआरसी बिल की जगह नया बिल लाने पर विचार करने का आश्वासन दिया है। साथ ही कहा है कि एनआरसी से बाहर रह गए लोगों को केंद्र या राज्य सरकार कतई परेशान नहीं करेगी। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि एनआरसी का प्रकाशन असम समझौते और केंद्र सरकार, असम सरकार एवं अॉल असम स्टूडेंट यूनियन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता के तहत किया गया है। जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं है उन्हें पर्याप्त मौका दिया जाएगा।

इससे पहले ममता बनर्जी ने दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में एक कार्यक्रम में एनआरसी के मसले पर केंद्र सरकार को जमकर आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा सिर्फ चुनाव जीतने के लिए यह सरकार लोगों को निशाना नहीं बना सकती। क्या उन्हें इस बात का आभास भी है कि जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं होगा वे अपनी पहचान खो देंगे। केंद्र को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विभाजन से पहले भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश एक ही थे। मार्च 1971 तक जो भी व्यक्ति बांग्लादेश से भारत में आ गया वह भारतीय नागरिक है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, 'अगर बंगाली लोग बिहार के लोगों को बंगाल में न रहने दें, दक्षिण भारत के लोग उत्तर भारतीयों से वापस लौटने को कह दें और उत्तर भारतीय लोग दक्षिण भारत के लोगों को अपने वहां नहीं रहने देंगे तो फिर इस देश का क्या होगा। हम सब साथ हैं, हमारा देश एक परिवार की तरह है।'

ममता बनर्जी ने कहा, 'मुझे आश्चर्य है कि पूर्व राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद के परिवार के सदस्यों का नाम एनआरसी की लिस्ट में नहीं है। इसमें मैं और क्या-क्या कहूं? बहुत से ऐसे लोग हैं जिनका नाम इस लिस्ट में नहीं है।' उन्होंने कहा, हम बंगाल में ऐसा नहीं होने देंगे क्योंकि वहां पर हम हैं। आज स्थिति यह है कि इन लोगों के पास मतदान का अधिकार भी नहीं है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, 'आज आसाम में एनआरसी को लेकर जो कुछ हो रहा है। इसमें सिर्फ बंगाली लोग ही नहीं पिस रहे, इसमें अल्पसंख्यक, हिंदू, बिहारी सब लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कल की ही बात है जब 40 लाख से ज्यादा लोगों ने सत्तारूढ़ दल के लिए मतदान किया था और आज अचानक उन्हें अपने ही देश में रिफ्यूजी बना दिया गया है।'



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अमित शाह ने कहा- बंगाल में हर हाल में 50 फीसद से अधिक सीटों पर हासिल करनी होगी जीत

28 Jun 2018 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोलकाता। लोकसभा चुनाव में भाजपा को बंगाल में हर हाल में 50 फीसद से अधिक सीटें पर जीत हासिल करनी होगी। साथ ही प्रदेश भाजपा के लिए 22 सीटों को लक्ष्य निर्धारित किया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश नेतृत्व के लिए यही लक्ष्य तय किया।

शाह बुधवार दोपहर दो दिवसीय बंगाल दौरे पर पहुंचे हैं। एयर पोर्ट से कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट गेस्ट हाउस पहुंचने के साथ ही दोपहर दो बजे से भाजपा अध्यक्ष ने पार्टी की चुनाव प्रबंधन कमेटी के साथ क्लोज डोर बैठक की। इसके बाद स्टेट कोर कमेटी समेत शीर्ष नेतृत्व से मिले।

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष, राष्ट्रीय सचिव सुरेश पुजारी, राहुल सिन्हा, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, नेता मुकुल राय सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी उपस्थित थे। शाह ने यहां करीब दो घंटे तक बैठक की।

भाजपा के राट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने तारापीठ में मां काली की पूजा अर्चना की। उनके साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष और महासचिव राजू बनर्जी सहित अन्य प्रदेश नेता थे। शाह यहां पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ दोपहर का भोजन कर पुरुलिया के लिए हेलीकॉटर से रवाना होंगे। वे वहां सिमुलिया में जनसभा को संबोधित करेंगे।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तारापीठ में मां काली की पूजा-अर्चना के बाद हेलीकाप्टर से पुरुलिया पहुंचे। वे वहां लागदा गांव में स्थानीय लोगों से मिले। उनके हाल पूछे। इसके पहले उन्होंने बूथ कमेटी के साथ बैठक कर सांगठनिक चर्चा की। इसके बाद वे जनसंपर्क अभियान में शामिल हुए। उनके साथ भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा समेत कई नेता मौजूद थे। शाह वीरभूम में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ दोपहर का भोजन कर पुरुलिया के लिए रवाना हुए। वे वहां अपराह्न 3 बजे सिमुलिया में जनसभा को संबोधित करेंगे। जनसभा में मृत भाजपा कार्यकर्ता जगन्नाथ टुडू, त्रिलोचन महतो और दुलाल कुमार के परिजन भी उपस्थित होंगे।

तीन माह में 35 फीसद बूथों पर कमेटी गठित करने का निर्देश : अब तक बंगाल में 35 फीसद सीटों पर बूथ कमेटी गठित नहीं होने से भाजपा अध्यक्ष क्षुब्ध दिखे। उन्होंने पार्टी नेताओं को तीन माह के भीतर बचे हुए 35 फीसद बूथों के लिए कमेटी गठित करने का निर्देश दिया।

इस दौरान उन्होंने सांगठनिक मजबूती के लिए जन संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने राज्य के हर जिले के हर गांव में जाकर स्थानीय, राज्य स्तरीय एवं राष्ट्र स्तरीय मुद्दों पर आंदोलन करने को कहा। उन्होंने कहा कि गांवों में बिना संपर्क के संगठन का विस्तार नहीं किया जा सकता है।

शाह ने साफ कहा कि तृणमूल कांग्रेस के साथ भाजपा का कोई समझौता नहीं है। इसलिए प्रदेश नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को किसी तरह के भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है। वे लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ें, केंद्रीय नेतृत्व उनके साथ है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सांगठनिक तौर पर राज्य को तीन भाग उत्तर बंगाल, दक्षिण बंगाल एवं जंगल महल में विभक्त किया।

उन्होंने इन तीनों भाग को ध्यान में रखते हुए आंदोलन चलाने को कहा। शाह ने मुख्यमंत्री ममता द्वारा भाजपा के खिलाफ की गई बयानबाजी की भी निंदा की। शाह ने प्रदेश भाजपा नेतृत्व से पूछा कि भाजपा कार्यकर्ता क्यों मार खा रहे हैं। इस पर प्रदेश नेतृत्व से जवाब मांगा है।

पोर्ट ट्रस्ट गेस्ट हाउस में बैठक के बाद शाह हावड़ा के शरत सदन पहुंच गए जहां भाजपा के आइटी सेल के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर चुनाव में कैसे वे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं इसका मंत्र दिया। इसके बाद वे बंगाल के बुद्धिजीवियों के साथ बैठक की जिसमें उन्होंने अपनी बातें रखीं और बुद्धिजीवियों से चर्चा की।

आज तारापीठ और पुरुलिया जाएंगे अमित शाह : अपने दौरे के दूसरे दिन गुरुवार को सर्व प्रथम भाजपा अध्यक्ष अमित शाह वीरभूम जाएंगे जहां तारापीठ में मां काली का दर्शन करेंगे। इसके बाद पुरुलिया जाएंगे जहां मृत भाजपा कार्यकर्ता के परिजनों से मुलाकात के बाद सभा को संबोधित करेंगे



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चीन सरकार का ग्रीन सिग्नल नहीं आने से ममता ने पांच दिवसीय चीन दौरा किया रद

22 Jun 2018 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कोलकाता। तृणमूल प्रमुख व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पांच दिनों के दौरे पर शुक्रवार की रात 11.30 बजे चीन रवना होने वाली थी। जहां उनकी उद्योगपतियों, चेंबरर्स व सरकार तथा वहां की कम्युनिस्ट नेताओं के साथ बैठक होनी थी।

परंतु, शुक्रवार दोपहर तक चीन सरकार की ओर से सरकारी प्रतिनिधियों व कम्युनिस्ट नेताओं के साथ बैठक को लेकर कोई ग्रीन सिग्नल नहीं आने के बाद ममता ने चीन दौरे को रद कर दिया है।

पॉलिटिकल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत चीन सरकार के प्रतिनिधियों के साथ ममता की बैठक होने वाली थी। परंतु, चीन सरकार की ओर से शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक यह नहीं बताने पर की सरकारी प्रतिनिधियों के साथ बैठक होगी या नहीं।

इसके बाद ममता ने चीन जाने का कार्यक्रम रद कर दिया। बताते चलें कई माह पहले ममता के 22 जून को चीन दौरे का कार्यक्रम तय हुआ था।



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येदियुरप्पा का इस्तीफा लोकतंत्र की जीत : ममता बनर्जी

19 May 2018 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कर्नाटक विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले ही मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा द्वारा पद से इस्तीफा दे दिए जाने पर कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। ममता ने पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) के अध्यक्ष एच.डी. देवगौड़ा, पार्टी नेता एच.डी. कुमारस्वामी और कांग्रेस को लोकतंत्र की जीत पर बधाई दी।

ममता ने ट्वीट कर कहा, लोकतंत्र की जीत। बधाई हो कर्नाटक। देवगौड़ा जी, कुमारस्वामी जी, कांग्रेस और अन्य को बधाई। क्षेत्रीय मोर्चे की जीत।

कर्नाटक विधानसभा में भावुकतापूर्ण भाषण देने के बाद येदियुरप्पा ने अपने इस्तीफे की घोषणा की, जिसके बाद ममता की प्रतिक्रिया आई। अपने भाषण में येदियुरप्पा ने कहा, सदन में बहुमत सिद्ध करने के लिए भाजपा के पास जरूरी संख्या नहीं है। मैंने चुनाव से लेकर अब तक जो कुछ किया, वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर किया।

येदियुरप्पा ने राज्य के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के दो दिन बाद ही इस्तीफा दिया। राज्यपाल वजुभाई वाला ने उन्हें आनन-फानन में गुरुवार की सुबह मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी और बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का लंबा वक्त दे दिया था। इसके खिलाफ कांग्रेस सर्वोच्च न्यायालय पहुंची, शीर्ष अदालत ने 26 घंटे के अंदर शनिवार की शाम चार बजे बहुमत साबित करने का आदेश दिया था। बहुमत जुटाने में असमर्थ येदियुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया।



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