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सभी शक्तियां पीएमओ के अधीन होना अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं: रघुराम राजन

08 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय ‘‘सुस्ती’’ के चंगुल में फंसी है और इसमें बेचैनी और अस्वस्थता के गहरे संकेत दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था में सभी शक्तियां प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन केन्द्रित हैं और सभी मंत्री अधिकारविहीन हैं। ‘इंडिया टुडे’पत्रिका में प्रकाशित एक लेख में राजन ने भारत की कमजोर पड़ती अर्थव्यवस्था को सुस्ती से बाहर निकालने के लिये अपने सुझाव दिये हैं। उन्होंने लगातार सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिये पूंजी क्षेत्र, भूमि और श्रम बाजारों में सुधारों को आगे बढ़ाने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने निवेश और वृद्धि को बढ़ाने पर भी जोर दिया है।उन्होंने कहा कि भारत को विवेकपूर्ण तरीके से मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए)में शामिल होना चाहिए ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सके और घरेलू दक्षता को सुधारा जा सके। राजन ने इसमें लिखा है कि यह समझने के लिए कि गलती कहां हुई है,हमें सबसे पहले मौजूदा सरकार के केन्द्रीकृत स्वरूप से शुरुआत करने की आवश्यकता है। निर्णय प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि इस सरकार में नये विचार और योजनायें जो भी सामने आ रही हैं वह सब प्रधानमंत्री के ईद-गिर्द रहने वाले लोगों और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जुड़े़ लोगों तक ही सीमित हैं।

राजन ने लिखा है कि यह स्थिति पार्टी के राजनीतिक एजेंडे और सामाजिक एजेंडा के हिसाब से तो ठीक काम कर सकती है। क्योंकि इस स्तर पर सभी चीजें स्पष्ट तरीके से तय हैं और इन क्षेत्रों में इन लोगों के पास विशेषज्ञता भी है। लेकिन आर्थिक सुधारों के मामले में यह इतने बेहतर तरीके से काम नहीं कर सकती है। क्योंकि इस मामले में शीर्ष स्तर पर कोई सुसंगत स्पष्ट एजेंडा पहले से तय नहीं है, इसके साथ ही राज्य स्तर के मुकाबले राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था किस तरह से काम करती है इसके बारे में भी जानकारी का अभाव है।उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारें बेशक ‘अव्यवस्थित’गठबंधन थीं, लेकिन उन्होंने आर्थिक उदारीकरण के क्षेत्र में लगातार काम किया। राजन ने कहा कि सत्ता का अत्यधिक केन्द्रीकरण,मजबूत और सशक्त मंत्रियों का अभाव और एक सरल एवं स्पष्ट दिशा वाली दृष्टि की कमी से यह सुनिश्चित हुआ है कि कोई भी सुधार तब ही रफ्तार पकड़ता है जबकि पीएमओ उस पर ध्यान देता है, लेकिन जब पीएमओ का ध्यान दूसरे अहम् मुद्दों की तरफ रहता है तो ये मुद्दे पीछे रह जाते हैं।

उन्होंने लिखा है कि मोदी सरकार न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन के नारे के साथ सत्ता में आई थी। इस नारे का गलत मतलब लिया जाता है। इसका मतलब यह है कि सरकार चीजों को अधिक दक्षता से करेगी न कि लोगों और निजी क्षेत्र को अधिक करने की आजादी होगी। सरकार आटोमेशन की दिशा में बेहतर अभियान चला रही है। लाभार्थियों को सीधे उनके खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। -- कई क्षेत्रों में सरकार की भूमिका बढ़ी है, सिकुड़ी नहीं है।राजन ने कहा कि आर्थिक सुस्ती को दूर करने की शुरुआत के लिए यह जरूरी है कि मोदी सरकार सबसे पहले समस्या को स्वीकार करे। उन्होंने कहा कि भारत आर्थिक मंदी के घेरे में है। ‘शुरुआती बिंदु यह है कि समस्या कितनी बड़ी है उसे समझा जाए, प्रत्येक आंतरिक या बाहरी आलोचक को राजनीतिक मंशा से प्रेरित नहीं बताया जाना चाहिये। यह मानना कि समस्या अस्थायी है और बुरी खबरों को दबाने और सुविधाजनक सर्वे के जरिये इसका हल किया जा सकेगा, यह सब बंद करना होगा।

भारत की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में घटकर 4.5 प्रतिशत रह गई है जो इसका छह साल का निचला स्तर है। मुद्रास्फीति बढ़ने से मुद्रास्फीतिजनित मंदी की आशंका पैदा हो गई है। यह ऐसी स्थिति होती है जबकि मुद्रास्फीति बढ़ने के कारण मांग में कमी आने लगती है। राजन ने लिखा है कि निर्माण, रीयल एस्टेट और बुनियादी ढांचा क्षेत्र ‘गहरे संकट’ में हैं। इसी तरह गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) भी दबाव में हैं। एनबीएफसी में संकट खड़ा होने और बैंकों में फंसा कर्ज बढ़ने की वजह से अर्थव्यवस्था में रिण संकट पैदा हुआ है। राजन ने कहा है कि गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी की संपत्तियों की गुणवत्ता की समीक्षा की जानी चाहिए। कॉरपोरेट और परिवारों को दिया गया कर्ज बढ़ रहा हैं। वित्तीय क्षेत्र के कई हिस्से गंभीर दबाव में हैं। बेरोजगारी के मामले में उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच यह बढ़ रही है।इससे युवाओं के बीच असंतोष भी बढ़ रहा है। ‘‘घरेलू उद्योग जगत नया निवेश नहीं कर रहा है और यह स्थिति इस बात का पुख्ता संकेत देती है कहीं कुछ बहुत गलत हो रहा है।’’राजन ने भूमि अधिग्रहण, श्रम कानूनों, स्थिर कर और नियामकीय प्रशासन, कर्ज में फंसे डेवलपर्स का दिवाला प्रक्रिया के तहत तेजी से समाधान, दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बनाये रखना और किसानों को जरूरी सामान और वित्त सुविधायें उपलब्ध कराना जरूरी है। राजन ने यह भी कहा कि सरकार को मध्यम वर्ग के लिये व्यक्तिगत आयकर की दरों में कटौती से फिलहाल परहेज करना चाहिये और अपने अहम् वित्तीय संसाधनों का उपयोग ग्रामीण गरीबों को मनरेगा जैसी योजनाओं के जरिये समर्थन देने के लिये करना चाहिये।



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CSB Bank की शानदार शुरुआत, पहले दिन 54 प्रतिशत चढ़ा शेयर

04 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। सीएसबी बैंक ने बुधवार को शेयर बाजार में अपने पहले दिन की धमाकेदार शुरुआत की और इसका शेयर 54 प्रतिशत उछलकर बंद हुआ। बीएसई में बैंक का शेयर 195 रुपये के निर्गम मूल्य की तुलना में 45 प्रतिशत उछलकर 275 रुपये पर खुला। कारोबार के दौरान एक समय यह 57.43 प्रतिशत तक चढ़ गया और 307 रुपये पर पहुंच गया। कारोबार की समाप्ति पर इसमें 53.89 प्रतिशत की तेजी रही और यह 300.10 रुपये पर बंद हुआ।एनएसई में भी बैंक का शेयर 54 प्रतिशत उछलकर 300.35 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के पहले दिन बीएसई में इसके कुल 40.27 लाख शेयरों और एनएसई में 3.7 करोड़ शेयरों का लेन-देन हुआ। कारोबार के बंद होने के बाद बैंक का बाजार पूंजीकरण 5,205.41 करोड़ रुपये रहा। सीएसबी बैंक के आईपीओ को पिछले महीने 86.89 गुणा अभिदान मिला था।



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निर्मला सीतारमण का बड़ा ऐलान, BPCL समेत 5 सरकारी कंपनियों को बेचा जाएगा

21 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। सरकार ने बुधवार को निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेट्रोलियम क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल), पोत परिवहन कंपनी भारतीय जहाजरानी निगम (एससीआई) और माल ढुलाई से जुड़ी कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकार) में सरकारी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी। साथ ही चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी को 51 प्रतिशत से नीचे लाने को मंजूरी दी है।

नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम को हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संवाददाताओं से कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की देश की दूसरी सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी बीपीसीएल से नुमालीगढ़ रिफाइनरी को अलग किया जायेगा। उसके बाद प्रबंधन नियंत्रण के साथ बीपीसीएल में सरकार की 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी गई।

मंत्रिमंडल ने एससीआई में सरकार की पूरी 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी तथा कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में 30.9 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को भी मंजूरी दे दी।सरकार की कॉनकार में फिलहाल 54.80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मंत्री ने कहा कि इसके अलावा सरकार टीएचडीसी इंडिया तथा नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लि. (एनईईपीसीओ) में सरकार की हिस्सेदारी को सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी लि. को बेच दिया जायेगा।

सरकार ने इसके साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) जैसे चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से नीचे लाने को मंजूरी दे दी।हालांकि, इनमें प्रबंधन नियंत्रण सरकार अपने पास ही रखेगी। विनिवेश की जाने वाली कंपनी की हिस्सेदारी दूसरे सार्वजनिक उपक्रमों को बेचे जाने के आधार पर सरकार का उस इकाई में प्रबंधन नियंत्रण होगा।

सरकार की फिलहाल आईओसी में 51.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है।इसमें 25.9 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की एलआईसी के पास तथा ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) तथा ऑयल इंडिया लि. के पास है। सरकार 26.4 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 33,000 करोड़ रुपये में बेच सकती है। सीतारमण ने कहा कि नुमालीगढ़ रिफाइनरी को सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी को सौंपा जायेगा। पूर्वोत्तर में निजीकरण की पहल को लेकर चिंता को दूर करते हुए यह कदम उठाया गया है।



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Amazon के सीईओ जेफ बेज़ोस ने कहा, भारत में कंपनी कर रही है अच्छा कारोबार

18 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

वाशिंगटन। ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज अमेजन के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) जेफ बेजॉस ने कहा है कि कंपनी भारत में ‘बेहद अच्छा’ प्रदर्शन कर रही है। उन्होंने भारत में नियामकीय मोर्चे पर स्थिरता की उम्मीद जताई। बेजॉस से पूछा गया था कि डिजिटलीकरण को लेकर भारत की कुछ नीतियां क्या अमेजन के लिए चिंता का विषय हैं। बेजॉस ने कहा कि हम हमेशा चाहते हैं कि भारत में नियामकीय स्थिरता हो। जो भी नियमन हों समय के साथ उनमें स्थिरता आनी चाहिए। हम इसी की उम्मीद कर रहे हैं। यहां एक कार्यक्रम के मौके पर अलग से बातचीत में बेजॉस ने कहा कि अमेजन भारत में काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है। भारत में हमारे कारोबार का प्रदर्शन काफी अच्छा है और यह तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने अमेजन के भारतीय परिचालन के प्रमुख अमित अग्रवाल की सराहना करते हुए कहा कि वह असाधारण व्यक्ति हैं और काफी अच्छा काम कर रहे हैं।

एक अन्य सवाल के जवाब में बेजॉस ने कहा कि वह ‘निश्चित रूप’ से अंतरिक्ष में जाना चाहेंगे। वह जो भी करते हैं उसका आनंद लेते हैं। 2020 में व्हाइट हाउस जाने की संभावना खारिज करते हुए बेजॉस ने कहा कि उनके पास करने को काफी कुछ है और फिलहाल वह उस पर ध्यान दे रहे हैं।



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33% लोगों की राय, नोटबंदी के चलते अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती: सर्वे

09 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। करीब 33 प्रतिशत लोगों का मानना है कि नोटबंदी का सबसे बड़ा नकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था की सुस्ती के रूप में सामने आया है। वहीं 28 प्रतिशत का मानना है कि नोटबंदी का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। आनलाइन कम्युनिटी मंच लोकल सर्किल्स के सर्वे के अनुसार 32 प्रतिशत लोगों का मानना है कि नोटबंदी की वजह से असंगठित क्षेत्र के कामगारों की आमदनी का जरिया समाप्त हो गया। सर्वे में देशभर के 50,000 लोगों की राय ली गई है। वहीं नोटबंदी के फायदों के बारे में 42 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इससे बड़ी संख्या में कर की अपवंचना करने वाले लोगों को कर दायरे में लाया जा सका। वहीं 25 प्रतिशत का मानना है कि इससे कोई फायदा नहीं हुआ। करीब 21 प्रतिशत लोगों की राय थी कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था में कालाधन कम हुआ जबकि 12 प्रतिशत ने कहा कि इससे प्रत्यक्ष कर संग्रह बढ़ा। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में 8 नवंबर 2016 को अर्थव्यवस्था में उस समय प्रचलन में रहे 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों को निरस्त कर दिया था। यह कदम अर्थव्यवस्था में कालेधन को समाप्त करने के इरादे से उठाया गया था।



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SBI के ग्राहकों के लिए खुशखबरी, बैंक ने घटाई ब्याज दरें, लोन हुआ सस्ता

08 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ग्राहकों को राहत दी है। SBI ने MCLR की दरों में सभी अवधि के लिए 0.05 फीसद तक कटौती की है। अब आपका होम, ऑटो और पर्सनल लोन सस्ता हो जाएगा। नई दरें 10 नवंबर से प्रभावी होंगी। बैंक ने 10 अक्टूबर 2019 को भी MCLR में 0.10 फीसद तक की कटौती की थी। मालूम हो कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने इस साल अब तक रेपो रेट में पांच बात कटौती की है। केन्द्रीय बैंक ने कुल 135 बेसिस पॉइंट्स की कमी की है। बैंक के मुताबिक, अब एक साल के लिए नई MCLR दरें 8.05 फीसद से घटकर 8 फीसद पर आ गई है। बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में लगातार सातवीं बार दरें घटाई हैं।गौरतलब है कि निजी क्षेत्र के बड़े बैंक HDFC ने विभिन्न टेन्योर के लिए अपने MCLR में 10 बेसिस पॉइंट्स तक की कटौती की है। बैंक ने 6 महीने के MCLR के लिए 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है, जिसके बाद यह 8.1 फीसद हो गया है। 1 साल की अवधि के लिए 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती के बाद यह 8.3 फीसद हो गया है। 2 साल के टेन्योर के लिए 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती के बाद यह 8.4 फीसद और 3 साल की अवधि के लिए 10 बेसिस पॉइंट्स की कटौती के बाद 8.5 फीसद हो गया है। सभी दरें 7 नवंबर से प्रभावी हैं।बता दें कि केन्द्रीय बैंक ने रेपो रेट में कटौती के बाद सभी बैंकों से कहा है कि वह कटौती का लाभ तुरंत ग्राहकों को दें। दरअसल, आरबीआई को ऐसी शिकायत मिली थी कि बैंक रेपो रेट में कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं।



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SIP के जरिये निवेश में कैसे मिलेगा फायदा, कितनी रकम से हो सकती है शुरुआत

06 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। निवेश के लिए सबसे जरूरी है कि इसका तरीका सीखा जाए। निवेश हर कोई करना चाहता है लेकिन निवेश कब और कैसे किया जाए ये जानना बहुत जरूरी है। ज्यादातर लोगों को एसआईपी, इक्विटी, डेब्ट फंड और म्युच्युअल फंड में कैसे निवेश किया जाए इसकी जानकारी नहीं है। बड़े बुजुर्ग कहा करते हैं कि युवाओं को शुरुआती समय से ही निवेश के लिए ध्यान देना चाहिए।

SIP को सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान कहा जाता है। इसके तहत म्युच्युअल फंड में एक निश्चित अवधि में निवेश किया जाता है। इसमें निवेशक अपनी सुविधा के हिसाब से अपने निवेश की रकम और वह कब इसमें निवेश करना चाहता है, कौन सी तारीख उसके लिए सहूलियत भरी है उसे चुनता है। कई लोगों को लगता है कि एसआईपी या तो म्यूचुअल फंड है या म्यूचुअल फंड से अलग है। हालांकि, सच्चाई यह है कि एसआईपी निवेश की एक बेहतरीन शैली है। यह मूल रूप से आपकी पसंद के फंड या स्कीम में समय-समय पर निवेश करने का बेहतरीन जरिया है।

हालांकि, एक बात जानना जरूरी है कि एसआईपी निवेश लंबी अवधि में काम करता है। वैसे इक्विटी फंड में दीर्घकालिक एसआईपी काम करता है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे। दीर्घकालिक एसआईपी तभी काम करता है जब आप लक्ष्य के लिए सही एसआईपी राशि का निवेश करते हैं।

मान लीजिए आप 15 साल में 1 करोड़ रुपये बचाना चाहते हैं। हालांकि, सिर्फ 15 साल के लिए म्यूचुअल फंड एसआईपी में कुछ राशि निवेश करके आप सोच रहे हैं कि बहुत अधिक रिटर्न मिल सकता है, तो यह सही तरीका नहीं है। हर महीने एक निश्चित रकम जमा करने से पहले गणना करें कि आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कितना निवेश करना है।

मान लीजिए कि आपने 10,000 रुपये प्रति महीने सिप के जरिये अगले 15 साल के लिए निवेश कर रहे हैं। अगर आपको इस पर सालाना 10-12 फीसद का रिटर्न मिलता है तो आप 15 साल में 41-50 लाख रुपये जमा कर पाएंगे। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि एसआईपी में लंबे समय निवेश का फायदा आपको मिला, लेकिन यह इतना भी नहीं हुआ जितना आप चाहते थे। क्योंकि आपका लक्ष्य 1 करोड़ रुपये का था और आप वहां तक नहीं पहुंचे। हालांकि, रिटर्न का बढ़ना-घटना बाजार के प्रदर्शन और अस्थिरता पर निर्भर है।

एसआईपी के जरिये आप नियमित आधार पर एक विशेष राशि का निवेश कर सकते हैं। आप छोटी शुरुआत कर सकते हैं और एसआईपी शुरू करने के लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता नहीं है। यहां तक कि प्रति माह 500 रुपये का एक एसआईपी भी शुरू करने के लिए पर्याप्त है।



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RBI ने पीएमसी बैंक के जमाकर्ताओं को दी राहत, खाते से निकाल सकेंगे 50,000 रुपये

05 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने घोटाले से जूझ रहे पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक के ग्राहकों को धन निकासी के मामले में कुछ और राहत दी है। केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि पीएमसी बैंक के खाताधारक अब अपने खाते से 50,000 रुपये की निकासी कर सकेंगे। पहले यह सीमा 40,000 रुपये थी। केंद्रीय बैंक ने सितंबर में पीएमसी के खाताधारकों पर धन निकासी के लिये छह माह का प्रतिबंध लगाया था। तब ग्राहकों को खाते से छह माह में मात्र 1,000 रुपये तक की निकासी की अनुमति दी गई थी। इसके बाद से आरबीआई कई बार सीमा बढ़ा चुकी है।

बैंक के अब जमा खाताधारक अब छह महीने में एक बार में या फिर किस्तों में 50,000 रुपये तक की निकासी कर सकते हैं। यह चौथी बार है जब रिजर्व बैंक ने पीएमसी के ग्राहकों के लिए प्रति खाता निकासी की सीमा बढ़ाई है। केंद्रीय बैंक ने कई वित्तीय अनियमितताएं सामने आने के बाद 23 सितंबर को पीएमसी बैंक पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। उसी समय प्रति ग्राहक केवल 1,000 रुपये निकासी की सीमा तय की गई थी। केंद्रीय बैंक के इस फैसले की काफी आलोचना हुई। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने नकद निकासी सीमा को बढ़ाकर 40,000 कर दिया था।

केंद्रीय बैंक ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि बैंक की नकदी की स्थिति की समीक्षा के बाद निकासी सीमा को और बढ़ाकर 50,000 रुपये किया जा रहा है। इसमें पहले के 40,000 रुपये भी शामिल हैं। निकासी सीमा में की गई इस वृद्धि के बाद बैंक के 78 प्रतिशत से ज्यादा खाताधारक अपने खाते से समूची रकम निकाल सकेंगे। रिजर्व बैंक ने जमाकर्ताओं को 50,000 रुपये की निर्धारित सीमा में बैंक के एटीएम से पैसे निकालने की अनुमति देने का भी फैसला किया है। इससे निकासी प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिलेगी। रिजर्व बैंक ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रखे हुये है और बैंक जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिये आगे भी जरूरी कदम उठाना जारी रखेगा।



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सात कारोबारी सत्रों के बाद आई गिरावट, सेंसेक्‍स 54 अंक टूटकर 40,248 पर हुआ बंद

05 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

मुंबई। शेयर बाजारों में मंगलवार को पिछले सात कारोबारी सत्र से जारी तेजी के सिलसिले पर ‘ब्रेक’लग गया। उच्च स्तर पर निवेशकों द्वारा मुनाफा काटने से सेंसेक्स 54 अंक टूट गया। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स कारोबार के दौरान 413 अंक तक घूमने के बाद अंत में 53.73 अंक या 0.13 प्रतिशत के नुकसान से 40,248.23 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 40,053.55 अंक के निचले स्तर तक आया। इसने 40,466.55 अंक का उच्चस्तर भी छुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 24.10 अंक या 0.20 प्रतिशत के नुकसान से 11,917.20 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स की कंपनियों में इंडसइंड बैंक, सनफार्मा, इन्फोसिस, टाटा स्टील और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर 2.40 प्रतिशत तक टूट गए। वहीं दूसरी ओर येस बैंक का शेयर 3.40 प्रतिशत चढ़ गया। एक प्रमुख निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने खुले बाजार के लेनदेन के जरिये बैंक के करीब 87 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एसबीआई, बजाज आटो, आईटीसी, हीरो मोटोकॉर्प और टेक महिंद्रा के शेयर भी 2.77 प्रतिशत तक लाभ में रहे। विश्लेषकों ने कहा कि लगातार सात कार्य दिवसों तक लाभ दर्ज करने के बाद शेयर बाजारों में उच्चस्तर पर मुनाफावसूली से गिरावट आई है। अमेरिका-चीन के बीच व्यापार करार की उम्मीद से चीन का शंघाई, हांगकांग का हैंगसेंग, जापान का तोक्यो और दक्षिण कोरिया का सियोल बाजार लाभ में बंद हुये। शुरुआती कारोबार में यूरोपीय बाजार भी लाभ में चल रहे थे। इस बीच, अंतर बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में दिन में कारोबार के दौरान रुपया 10 पैसे की बढ़त के साथ 70.66 रुपये प्रति डॉलर पर चल रहा था। ब्रेंट कच्चा तेल वायदा 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62.65 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था।



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सात कारोबारी सत्रों के बाद आई गिरावट, सेंसेक्‍स 54 अंक टूटकर 40,248 पर हुआ बंद

05 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

मुंबई। शेयर बाजारों में मंगलवार को पिछले सात कारोबारी सत्र से जारी तेजी के सिलसिले पर ‘ब्रेक’लग गया। उच्च स्तर पर निवेशकों द्वारा मुनाफा काटने से सेंसेक्स 54 अंक टूट गया। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स कारोबार के दौरान 413 अंक तक घूमने के बाद अंत में 53.73 अंक या 0.13 प्रतिशत के नुकसान से 40,248.23 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 40,053.55 अंक के निचले स्तर तक आया। इसने 40,466.55 अंक का उच्चस्तर भी छुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 24.10 अंक या 0.20 प्रतिशत के नुकसान से 11,917.20 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स की कंपनियों में इंडसइंड बैंक, सनफार्मा, इन्फोसिस, टाटा स्टील और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर 2.40 प्रतिशत तक टूट गए। वहीं दूसरी ओर येस बैंक का शेयर 3.40 प्रतिशत चढ़ गया। एक प्रमुख निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने खुले बाजार के लेनदेन के जरिये बैंक के करीब 87 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एसबीआई, बजाज आटो, आईटीसी, हीरो मोटोकॉर्प और टेक महिंद्रा के शेयर भी 2.77 प्रतिशत तक लाभ में रहे। विश्लेषकों ने कहा कि लगातार सात कार्य दिवसों तक लाभ दर्ज करने के बाद शेयर बाजारों में उच्चस्तर पर मुनाफावसूली से गिरावट आई है। अमेरिका-चीन के बीच व्यापार करार की उम्मीद से चीन का शंघाई, हांगकांग का हैंगसेंग, जापान का तोक्यो और दक्षिण कोरिया का सियोल बाजार लाभ में बंद हुये। शुरुआती कारोबार में यूरोपीय बाजार भी लाभ में चल रहे थे। इस बीच, अंतर बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में दिन में कारोबार के दौरान रुपया 10 पैसे की बढ़त के साथ 70.66 रुपये प्रति डॉलर पर चल रहा था। ब्रेंट कच्चा तेल वायदा 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62.65 डॉलर प्रति बैरल पर चल रहा था।



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