राष्ट्रीय

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CAB भाजपा के घोषणापत्र का हिस्सा रहा है, शाह बोले- जनता ने दी है इसकी मंजूरी

09 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन विधेयक को ऐतिहासिक करार देते हुए सोमवार को कहा कि यह भाजपा के घोषणापत्र का हिस्सा रहा है तथा 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में देश के 130 करोड़ लोगों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाकर इसकी मंजूरी दी है। शाह ने लोकसभा में विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए रखते हुए कहा कि हम पूर्वोत्तर की स्थानीय संस्कृति एवं रीति रिवाज का संरक्षण करने के लिये प्रतिबद्ध हैं। गृह मंत्री ने कहा कि हम पूर्वेात्तर के लोगों का आह्वान करते हैं कि वे किसी उकसावे में नहीं आएं।उन्होंने कहा कि यह विषय हमारे घोषणापत्र में शामिल रहा है जो जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। शाह ने कहा कि क्या केवल नेता के चेहरे, परिवार के नाम पर चुनाव लड़ने चाहिए। शाह ने कहा कि यह विधेयक ऐसे लाखों करोड़ों लोगों को ‘नरक की यातना’ से निकालेगा जो पड़ोसी देशों से भारत आने पर मजबूर हुए और यहां उन्हें कोई भी अधिकार नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी के साथ अन्याय करने वाला नहीं, केवल न्याय करने वाला है। लोग 70 साल से इस न्याय का इंतजार कर रहे थे।

गृह मंत्री ने विपक्ष के सदस्यों के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार अल्पसंख्यकों की बात हो रही है तो क्या बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए शरणार्थी अल्पसंख्यक नहीं हैं जो धार्मिक आधार पर यातनाएं सहने के कारण वहां से भारत आए। उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने पंथ निरपेक्षता की बात कही थी, हम उसका सम्मान करते हैं और उसे आगे ले जाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि किसी के भी साथ धार्मिक आधार पर दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए।

शाह ने कहा कि घुसपैठियों और शरणार्थियों की अलग पहचान करना भी जरूरी है। गृह मंत्री ने कहा कि राशन कार्ड या किसी दस्तावेज के बिना भी शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सदस्य साबित कर दें कि विधेयक भेदभाव करता है तो मैं विधेयक वापस ले लूंगा।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किया गया जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन का पात्र बनाने का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि जहां बोलने की आजादी नहीं हो, असहमति को अपना दुश्मन मानते हों, देशद्रोह के मुकदमे बनते हों ...ये लोकतंत्र में कभी सुना नहीं हमने। इसलिए हम बार-बार कहते हैं लोकतंत्र देश में खतरे में है। सोच-समझकर कहते हैं। अब जनता को ये समझना पड़ेगा, जनता ये समझ भी रही है। महाराष्ट्र व हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम की ओर संकेत करते हुए गहलोत ने भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि उससे इनकी आंखें खुल जानी चाहिए।



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नागरिकता (संशोधन) विधेयक सोमवार को लोकसभा में होगा पेश

08 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पेश करेंगे जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। लोकसभा में सोमवार को होने वाले कार्यों की सूची के मुताबिक गृह मंत्री दोपहर में विधेयक पेश करेंगे जिसमें छह दशक पुराने नागरिकता कानून में संशोधन की बात है और इसके बाद इस पर चर्चा होगी और इसे पारित कराया जाएगा।इस विधेयक के कारण पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं और काफी संख्या में लोग तथा संगठन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे असम समझौता 1985 के प्रावधान निरस्त हो जाएंगे जिसमें बिना धार्मिक भेदभाव के अवैध शरणार्थियों को वापस भेजे जाने की अंतिम तिथि 24 मार्च 1971 तय है। प्रभावशाली पूर्वोत्तर छात्र संगठन (नेसो) ने क्षेत्र में दस दिसम्बर को 11 घंटे के बंद का आह्वान किया है।

नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा बल्कि उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। यह विधेयक 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का चुनावी वादा था।भाजपा नीत राजग सरकार ने अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था और वहां पारित करा लिया था। लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में प्रदर्शन की आशंका से उसने इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया। पिछली लोकसभा के भंग होने के बाद विधेयक की मियाद भी खत्म हो गयी।



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नागरिकता संशोधन बिल को मोदी कैबिनेट की मंजूरी, कल संसद में होगा पेश

04 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

एनआरसी विवाद के बीच केंद्र की मोदी सरकार नागरिकता बिल को लेकर सक्रीय हो गई है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज इस पर मुहर लग गई है। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार इसे अगले सप्ताह तक संसद में पास कराने की तैयारी में है क्योकि सरकार की कोशिश इस बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पास करा लेने की होगी। यह सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा। मंगलवार को पार्टी सांसदों की बैठक में भी राजनाथ सिंह ने सभी सदस्यों को संसद में उपस्थित रहने को कहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद गृह मंत्री अमित शाह इसे संसद में पेश करेंगे। हालांकि विपक्ष इस बिल का जोरदार विरोध कर रहा है।

नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करने के लिए संसद में नागरिकता विधेयक लाया गया था। ये विधेयक जुलाई, 2016 में केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किया गया था। इस विधेयक में भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों यानि की हिंदु, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइ धर्म के मानने वाले लोग भारत में हैं उन्हें बिना समुचित दस्तावेज के नागरिकता देने का प्रस्ताव है। कहने का मतलब यह है कि इस विधेयक में पड़ोसी देश से आए गैर-मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी। इस विधेयक में उनके निवास के समय को 11 वर्ष के बजाय छह वर्ष करने का प्रावधान है। कहने का तात्पर्य यह है कि अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस विधेयक के बाद अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदल सकती है।



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मॉब लिंचिंग को लेकर कानून में बदलाव पर विचार विमर्श जारी, राज्यों से मांगे गए सुझाव: अमित शाह

04 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि भीड़ हिंसा के बारे में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधानों में बदलाव करने के बारे में एक समिति का गठन कर सभी संबद्ध पक्षों के साथ विचार विमर्श किया जा रहा है। शाह ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि इस बारे में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और राष्ट्रपति शासन वाले राज्यों के राज्यपालों को पत्र लिखकर सुझाव मांगे गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्यों से आपराधिक मामलों की जांच से जुड़े विशेषज्ञों और लोक अभियोजकों से इस विषय में सुझाव एकत्र कर अवगत कराने को कहा गया है।

अमित शाह ने कहा, ‘‘इसके साथ ही पुलिस शोध एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) के तत्वावधान में एक समिति का गठन किया गया है जो आईपीसी और सीआरपीसी में आमूल चूल बदलाव के लिये विचार कर रही है। सभी पक्षों के सुझाव मिलने के बाद हम कार्रवाई करेंगे तथा उच्चतम न्यायालय के फैसलों को भी ध्यान में रखा जायेगा।’’ भीड़ हिंसा को रोकने के लिये दो राज्यों की विधानसभा से विधेयक पारित होने तथा राष्ट्रपति के समक्ष विचारार्थ पेश किये जाने के बारे में पूछे गये एक अन्य पूरक प्रश्न के जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि मणिपुर और राजस्थान विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति द्वारा परामर्श की प्रक्रिया अभी चल रही है।

राय ने यह भी कहा कि आईपीसी में भीड़ हिंसा की अभी कोई परिभाषा तय नहीं है। उन्होंने कहा ‘‘इस मामले पर विचार विमर्श करने और सिफारिशें देने के लिए सरकार ने मंत्रियों का एक समूह गठित किया था जिसकी बैठक हो चुकी है। सरकार इस मामले से अवगत है।’’ द्रमुक के तिरुचि शिवा ने पूछा था कि भीड़ हिंसा रोकने के लिये मणिपुर और राजस्थान द्वारा पारित विधेयकों को राष्ट्रपति की अनुमति के लिये भेजा गया है, इसकी मौजूदा स्थिति क्या है। राय ने इसके जवाब में कहा, ‘‘मणिपुर और राजस्थान की विधानसभा द्वारा पारित दो विधेयक प्राप्त हुए हैं, जिन्हें राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखा गया है। इस प्रकार के विधेयकों की जांच केन्द्रीय मंत्रालयों के साथ परामर्श कर की जाती है। अभी इस पर परामर्श चल रहा है।’’ इस दौरान सभापति एम वेंकैया नायडू ने भीड़ हिंसा में समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाये जाने की बात कुछ सदस्यों द्वारा सदन में उठाये जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा, ‘‘देश को बदनाम न करें और सदन में किसी समुदाय की बात न करें।’’



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गांधी परिवार से SPG वापस लेने पर बोले शाह, सुरक्षा बदली गई है, हटाई नहीं गई

03 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

लोकसभा के बाद आज एसपीजी बिल को राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई। भारी हंगामे के बाद कांग्रेस ने संदन से वॅाकआउट किया। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में बोलते हुए कहा कि इस बिल को लेकर के जो भ्रांतियां हैं वह मैं दूर करना चाहता हूं दो सदस्यों ने जो कहा कि इस बिल को दो परिवारों को ध्यान में रखकर के लाया गया यह हकीकत नहीं है। देश में सिर्फ गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा नहीं हटाई गई। चंद्रशेखर जी, वी पी सिंह जी, नरसिम्हा राव जी, आई के गुजराल जी और मनमोहन सिंह जी की सुरक्षा को भी बदलकर जेड प्लस किया गया है।देश में सिर्फ गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा नहीं हटाई गई। चंद्रशेखर जी, वी पी सिंह जी, नरसिम्हा राव जी, आई के गुजराल जी और मनमोहन सिंह जी की सुरक्षा को भी बदलकर जेड प्लस किया गया है। लेकिन कांग्रेस ने कोई नाराजगी नहीं दिखाई। लोकतंत्र में कानून सबके लिए बराबर होता है, एक परिवार के लिए अलग कानून नहीं होता। हम परिवार का विरोध नहीं करते हैं। हम परिवारवाद का विरोध करते हैं। तीनों लोगों को वो सुरक्षा दी है जो देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री के पास है। देश में सर्वोच्च सुरक्षा उन्हें प्रदान की गई है। मगर एसपीजी सुरक्षा ही मिले, ऐसा कहना तो उचित नहीं है। तीनों लोगों को वो सुरक्षा दी है जो देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री के पास है। देश में सर्वोच्च सुरक्षा उन्हें प्रदान की गई है। मगर एसपीजी सुरक्षा ही मिले, ऐसा कहना तो उचित नहीं है। शाह ने कहा कि कोई प्रधानमंत्री न रहते हुए भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा मांगे तो ऐसा नहीं होता।



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दिल्ली सरकार ने दिया लाखों लोगों को तोहफा, पानी-सीवर कनेक्शन का शुल्क माफ

22 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। Delhi Assembly Election 2020: जनवरी-फरवरी में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव-2020 के मद्देनजर दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) सरकार ने लाखों लोगों को बड़ा तोहफा दिया है। शुक्रवार से लोगों को सीवर कनेक्शन लेने के लिए विकास शुल्क के साथ रोड कटिंग शुल्क व कनेक्शन शुल्क नहीं देना होगा।दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) ने शुक्रवार को एलान किया है कि अब पानी और सीवर का कनेक्शन लेने के लिए सिर्फ 2310 रुपये चुकाने होंगे। उपभोक्ताओं को अब पानी और सीवर का नया कनेक्शन लेने के दौरान विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क नहीं देना होगा।मुख़्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेसवार्ता कर कहा कि दिल्ली जल बोर्ड ने सीवर और पानी के कनेक्शन पर डेवलपमेंट चार्ज और इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज खत्म कर दिया है। अब किसी भी साइज के प्लॉट के लिए 2310 रुपये ही देना होगा। नई व्यवस्था नोटिफिक्शन जारी होने के बाद लागू हो जाएगी। अभी 200 मीटर के प्लाट पर सीवर और पानी के कनेक्शन के लिए 1 लाख 14 हजार 110 रुपये और 300 मीटर के प्लाट पर 1 लाख 24 हजार 110 रुपये देना पड़ता है। सीएम ने कहा लोग ज्यादा चार्ज के कारण अभी लोग लाइन डालने के बावजूद सीवर और पानी का कनेक्शन नही ले रहे हैं।यहां पर बता दें कि पिछले दिनों केजरीवाल सरकार ने सीवर कनेक्शन के लिए शुल्क माफ करने का एलान किया था। दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने सोमवार को ही मुख्यमंत्री मुफ्त सीवर कनेक्शन योजना को मंजूरी दी थी

इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को सीवर कनेक्शन लेने के लिए विकास शुल्क, रोड कटिग शुल्क व कनेक्शन शुल्क नहीं देने का एलान हुआ था। इसके बाद उपभोक्ताओं के हजारों रुपये बचेंगे।



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राज्यसभा के 250वें सत्र पर बोले PM मोदी, विचार, व्यवहार और सोच ही हमारे औचित्य को करेगी साबित

18 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

राज्यसभा के 250वें सत्र के विशेष मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने राज्यसभा में योगदान देने वालों का अभिनंदन किया। साथ ही कहा कि राज्यसभा के 250वें सत्र में शामिल होना मेरा सौभाग्य है।संसद के शीतकालीन सत्र की शुरूआत आज से हो गई है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने, दो राज्यों में विधानसभा होने और अयोध्या विवाद का फैसला आने के बाद यह संसद का पहला सत्र है। राज्यसभा का 250वां सत्र आज से शुरू हो गया। संसद का शीतकालीन सत्र राज्यसभा के लिए 250वां अधिवेशन होने की वजह से बेहद खास है। राज्यसभा के 250वें सत्र के विशेष मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने राज्यसभा में योगदान देने वालों का अभिनंदन किया। साथ ही कहा कि राज्यसभा के 250वें सत्र में शामिल होना मेरा सौभाग्य है। एक विचार यात्रा रही। समय बदलता गया, परिस्थितियां बदलती गई और इस सदन ने बदली हुई परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए अपने को ढालने का प्रयास किया।पीएम मोदी ने कहा कि अनुभव कहता है संविधान निर्माताओं ने जो व्यवस्था दी वो कितनी उपयुक्त रही है। कितना अच्छा योगदान इसने दिया है। जहां निचला सदन जमीन से जुड़ा है, तो उच्च सदन दूर तक देख सकता है। भारत की विकास यात्रा में निचले सदन से जमीन से जुड़ी चीजों का प्रतिबिंब झलकता है, तो उच्च सदन से दूर दृष्टि का अनुभव होता है। इस सदन ने बनते हुए इतिहास को देखा है। पीएम ने स्थायित्व और विविधता को इस सदन की सबसे बड़ी खासियत बताया।स्थायित्व इसलिए महत्वपूर्ण है कि लोकसभा तो भंग होती रहती है लेकिन राज्य सभा कभी भंग नहीं होती और विविधता इसलिए महत्वपूर्ण है कि क्योंकि यहां राज्यों का प्रतिनिधित्व प्राथमिकता है। इस सदन का एक और लाभ भी है कि हर किसी के लिए चुनावी अखाड़ा पार करना बहुत सरल नहीं होता है, लेकिन देशहित में उनकी उपयोगिता कम नहीं होती है, उनका अनुभव, उनका सामर्थय मूल्यवान होता है। मोदी ने कहा कि राज्यसभा का फायदा है कि यहां वैज्ञानिक, कलाकार और खिलाड़ी जैसे तमाम व्यक्ति आते हैं जो लोकतांत्रिक तरीके से चुने नहीं जाते हैं। बाबा साहेब इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। वे लोक सभा के लिए नहीं चुने जा सके लेकिन वे राज्यसभा पहुंचे। बाबा साहेब अंबेडकर के कारण देश को बहुत कुछ प्राप्त हुआ।



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PM मोदी ने की NCP की जमकर तारीफ, बदल सकता है महाराष्ट्र का सियासी गणित

18 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

महाराष्ट्र में सरकार गठन के बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शरद पवार की पार्टी एनसीपी की जमकर तारीफ की है। शीतकालीन सत्र के पहले दिन राज्यसभा में संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनसीपी का बार-बार जिक्र किया।

राज्यसभा में पीएम मोदी ने कहा आज मैं दो दलों, NCP और बीजद की सराहना करना चाहता हूं। इन दलों ने संसदीय मानदंडों का कड़ाई से पालन किया है। वे कभी सबापति के आसन के समक्ष नहीं गए। फिर भी, उन्होंने अपनी बातों को बहुत प्रभावी ढंग से उठाया है। मेरा पार्टी सहित अन्य दल उनसे बहुत कुछ सिख सकते हैं।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना एनसीपी और कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाने की कवायद में जुटी हुई है। शिवसेना भाजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव में गई थी। जनता ने भाजपा गठबंधन को बहुमत दिया था पर मुख्यमंत्री पद कि रार के बाद शिवसेना ने भाजपा से नाता तोड़ लिया।



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अयोध्या Live: रामलला की जीत, विवादित जमीन राम जन्मभूमि न्यास को मिली

09 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में सुनाए जाने वाले फैसले के मद्देनजर शनिवार को उच्चतम न्यायालय के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि विवादित जमीन रामलला को दी जाए। सरकार मंदिर निर्माण के लिए नियम बनाएं।

राम जन्मभूमि न्यास को विवादित जमीन दे दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ की वैकल्पिक ज़मीन मिले। या तो केंद्र 1993 में अधिगृहित जमीन से दे या राज्य सरकार अयोध्या में ही कहीं दे। कोर्ट ने कहा कि हम अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए मुस्लिम पक्ष को ज़मीन दे रहे हैं।

कोर्ट में कहा कि अयोध्या में ही मस्जिद के लिए सुन्नी बफ्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन दी जाए। आपको बता दें कि यह फैसला संविधान की धारा 142 के तहत सुनाया गया।

कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार तीन महीने में ट्रस्ट बनाए।

टिप्पणी में कोर्ट ने कहा, सुन्नी बफ्फ बोर्ड को वैकल्पिक जमीन देना जरूरी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम विवाद को 2 लोगों के बीच के विवाद के तौर पर देखते हैं। जिसके मुताबिक अब दो पक्षकार रह गए है- सुन्नी बफ्फ बोर्ड और रामलला विराजमान

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं के वहां पर अधिकार की ब्रिटिश सरकार ने मान्यता दी। 1877 में उनके लिए एक और रास्ता खोला गया था। अंदरूनी हिस्से में मुस्लिमों की नमाज बंद हो जाने का कोई सबूत नहीं मिला।

सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट में कहा कि ढांचे के नीचे पुरानी रचना से हिन्दू का दावा नहीं माना जा सकता है।

अयोध्या में राम के जन्म के दावे को किसी ने विरोध नहीं किया, विवादित जगह पर हिन्दू पूजा करते रहे थे।

कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। नीचे विशाल रचना थी जो कि इस्लामिक नहीं थी।

एएसआई की खुदाई में जो कुछ मिला उसे सुप्रीम कोर्ट ने सबूत माना। इसी के साथ रामलला को कानूनी मान्यता भी दी।

सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) संदेह से परे है और इसके अध्ययन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने कहा कि राजस्व रिकार्ड के अनुसार विवादित भूमि सरकारी है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया निर्मोही अखाड़े का दावा।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने जजमेंट पढ़ते हुए कहा कि मस्जिद कब बनी इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति की आस्था दूसरे व्यक्ति

शिया वक्फ बोर्ड का दावा एकमत से खारिज, सीजेआई गोगोई ने कहा कि हमने 1946 के फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटिशन (SLP) को खारिज करते हैं।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई फैसला पढ़ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि 1949 में मूर्तियां रखी गईं।

सर्वसम्मति से आएगा फैसला, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने जजमेंट पढ़ना शुरू किया। आधे घंटे में आएगा पूरा फैसला।

मुख्य न्यायाधीश और उनके सहयोगी जज कोर्ट रूम पहुंचे।कड़ी सुरक्षा के बीच मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की कोर्ट के बाहर वकीलों का भारी जमावड़ा है। हर किसी को मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट रूम पहुंचने का इंतजार है, जिसके बाद देश के सुप्रीम मामले का फैसला सुनाया जाएगा।

अयोध्या में विवादित जमीन पर मालिकाना हक संबंधी मुकदमे में उच्चतम न्यायालय की पीठ शनिवार पूर्वाह्न 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगी। न्यायालय परिसर के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है और सभी वाहनों तथा राहगीरों की भी पूरी जांच की जा रही है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई,न्यायमूर्ति एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई. चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर के घरों के बाहर भी दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। ये भी शीर्ष न्यायालय की फैसला सुनाने वाली पीठ का हिस्सा हैं।



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अयोध्या पर SC का फैसला कल आएगा, CJI ने ली UP की कानून-व्यवस्था पर रिपोर्ट

08 Nov 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट शनिवार को सुबह 10.30 बजे फैसला सुनाएगा। धार्मिक, राजनैतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील इस मुकदमें में फैसले से पहले उत्तर प्रदेश और विशेषकर अयोध्या की स्थिति जानने के लिए शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी और डीजीपी ओपी सिंह से मिलकर कानून-व्यवस्था की स्थिति जानी।

दूरगामी प्रभाव वाले राजनैतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील मुकदमें के ऐतिहासिक फैसले से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था का क्या हाल है, सरकार के जिम्मेदार तीसरे अंग न्यायपालिका का मुखिया होने के नाते शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को सुप्रीम कोर्ट बुलाकर स्थिति की जानकारी ली। मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी और डीजीपी ओपी सिंह के साथ मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने दोपहर में करीब डेढ़ घंटे अपने चैम्बर में मुलाकात की। हालांकि मुलाकात का कोई औपचारिक ब्योरा नहीं दिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रदेश के दोनों आला अधिकारियों ने मुख्य न्यायाधीश को प्रदेश में शांति और कानून-व्यवस्था की स्थित ठीक होने की जानकारी दी।सुप्रीम कोर्ट में शनिवार से लेकर मंगलवार तक छुट्टी है। ऐसे में जस्टिस गोगोई की सेवानिवृति तक मात्र तीन कार्यदिवस बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार ही बचे हैं। अयोध्या में चल रहे कार्तिक उत्सव और स्नान के चलते इस वक्त बहुत से श्रद्धालु वहां एकत्रित हैं। हालांकि 13 नवंबर तक कार्तिक उत्सव समाप्त हो जाएगा।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 40 दिन की मैराथन सुनवाई करने के बाद गत 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को दिये गए फैसले में राम जन्मभूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था जिसके खिलाफ सभी पक्षों ने कुल 14 अपीलें सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थीं।



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