दिल्ली

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दिल्ली के विधायी इतिहास में पहली बार स्पीकर जाएंगे जेल, BJP नेता से की थी मारपीट

18 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते दिल्ली विधानसभा का एक महत्व है। इस विधानसभा ने विधायी मामलों में तमाम मानक कायम किए हैं और देश के विधानमंडलों में एक अलग पहचान बनाई है। लेकिन दिल्ली के विधायी इतिहास में पहली बार विधानसभा के अध्यक्ष को जेल की सलाखों के पीछे जाना होगा। दिल्ली की एक अदालत ने राजधानी के विधानसभा स्पीकर रामनिवास गोयल को दोषी करार देते हुए 6 महीने की सजा सुनाई है। साथ ही दिल्ली के रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने रामनिवास गोयल के साथ-साथ उनके बेटे सुमित गोयल समेत 5 लोगों को 6-6 महीने की सजा सुनाई है और एक-एक हजार का जुर्माना भी लगाया है।

जानकारी के अनुसार यह मामला 2015 में विधानसभा चुनाव के समय का है। 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय भाजपा से जुड़े और लोकल बिल्डर मनीष घई ने गोयल के खिलाफ मतदान से एक दिन पहले, 6 फरवरी की रात अपने विवेक विहार स्थित घर में अपने समर्थकों के साथ जबरन घुसकर मारपीट करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा के स्पीकर रामनिवास गोयल को मारपीट के मामले में आईपीसी की धारा 448 के तहत दोषी करार दिया। जबकि उनके बेटे सुमित गोयल को धारा 323 यानी मारपीट करने के मामले में दोषी ठहराया गया है।

राम निवास गोयल उत्तरी दिल्ली के शाहदरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जहां उन्होंने बीजेपी के जितेंद्र सिंह शंटी को 11 हजार वोटों के अंतर से पराजित किया। जिसके बाद उन्हें विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया।



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मंदी की बात बाबा रामदेव ने भी कबूली, बोले- आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है देश

18 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

आजकल देश की अर्थव्यवस्था में मंदी की चर्चा-ए-आम है। दरअसल, पिछले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था से जुड़े कई आंकड़े आए हैं, जिससे इस चर्चा को बल मिला है। इनमें जीडीपी ग्रोथ में कमी, ऑटो सहित कई कंपनियों की बिक्री में गिरावट, शेयर बाजार में कमजोरी और कुछ कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी प्रमुख हैं। पर सवाल है कि क्या वाकई भारतीय अर्थव्यस्था मंदी में जा चुकी है? सत्ताधारी दल अर्थव्यवस्था से जुड़ी उपलब्धियों को गिना रहा है तो विपक्ष आर्थिक सुस्ती, सरकार की उदासीनता से भारतीयों के भविष्य और आकांक्षाओं पर असर पड़ता बता रहा है। लेकिन इन सब के बीच बाबा रामदेव ने भी आर्थिक संकट की बात कबूल की है। एक निजी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह सच है कि देश में आर्थिक संकट है और पूरी दुनिया इसका सामना कर रहा है।रामदेव ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में जरूरी है कि देश में राजनीतिक स्थिरता हो और लोग प्रदेशों में भी मजबूत सरकार के लिए वोट करें। साथ ही उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार को निशाने पर भी लेते हुए कहा कि ऐसे लोग जो देश के बारे में सोचने वाले हों, उन्हें सत्ता मिले। जिन्होंने बड़े-बड़े घोटाले किए हों, देश को तबाह किए हों उन्हें सत्ता नहीं मिले। मोदी सरकार के समर्थन में बयान देते हुए रामदेव बोले कि पिछले पांच साल में एक बड़े घोटाले सामने नहीं आए। पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी है, ऐसे में भारत पर ज्यादा संकट नहीं आए इसके लिए ताकतवर लोगों की जरूरत है, वो ताकत मोदी सरकार में दिखती है।



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ऑड-ईवन योजना से महिलाओं के बाद अब दिव्यांगों को भी मिली छूट

16 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। प्रदूषण पर काबू पाने के लिए केजरीवाल सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में 4 नवंबर से 15 नवंबर तक ऑड-ईवन लागू करने की योडना बनाई है। यह योजना तीसरी बार दिल्ली में लागू होने जा रही है। आपको बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस योजना से दिव्यागों को राहत दी है। यानी की दिव्यागों द्वारा मोटर व्हीकल चलाए जाने पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर लिखा कि जी हां, दिव्यांग लोगों को ऑड-ईवन योजना से निश्चित ही छूट दी जाएगी। इससे पहले केजरीवाल ने इस योजना से महिलाओं को छूट दी थी और दिव्यांगों को भी राहत दी गई है। यातायात विभाग ने दिल्ली सरकार को सुझाव दिया कि इस योजना से दोपहिया वाहनों को भी छूट दी जानी चाहिए, जिसके बाद सरकार इस पर विचार कर रही है।



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मनमोहन सरकार के समय पाक से आकर आतंकी भारत में फैलाते थे आतंक: शाह

16 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हरियाणा के गुरुग्राम में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए अनुच्छेद 370 का मुद्दा उठाया। अमित शाह ने कहा कि जो अनुच्छेद 370 देश के अंदर आतंकवाद का कारण था, कश्मीर के विकास में बाधा था, जिसके कारण देश के हर नागरिक को लगता था कि कश्मीर के साथ उनका जुड़ाव आधा-अधूरा है। उस 370 को कोई हाथ लगाने की हिम्मत नहीं करता था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस 370 को उखाड़कर फेंक दिया।इसी के साथ अमित शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटते ही देश के अंदर से पाक प्रेरित आतंकवाद को उखाड़कर फेंकने का काम भी प्रधानमंत्री मोदी ने किया है। अरबों-खरबों रुपए कश्मीर के विकास के लिया भेजा, लेकिन 370 के कारण वहां विकास नहीं हुआ।

इसी बीच अमित शाह ने पूर्व की मनमोहन सिंह सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कई आरोप लगा दिए। गृह मंत्री ने कहा कि 10 साल तक केंद्र में यूपीए की सरकार चली, उनकी सरकार में पाकिस्तान से आतंकी भारत में आकर आतंक फैलाते थे। लेकिन मनमोहन सिंह के मुंह से आह तक नहीं निकलती थी। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद हमारे वीर सैनिकों ने पाकिस्तान के अंदर जाकर एयर स्ट्राइक व सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया और आतंकवादियों को मार गिराया।



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अयोध्या: 40 दिन की सुनवाई के बाद पूरी हुई दलीलें, अब ''सुप्रीम'' मामले के फैसले का इंतजार

16 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई बुधवार को पूरी कर ली और फैसला बाद में सुनाएगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इस मामले में 40 दिन तक सुनवाई करने के बाद दलीलें पूरी कर लीं। पीठ ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिये तीन दिन का समय दिया।इस पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं। आज सुबह सुनवाई शुरू होने पर पीठ ने कह दिया था कि वह पिछले 39 दिनों से अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुनवाई कर रही है और मामले में सुनवाई पूरी करने के लिए किसी भी पक्षकार को आज (बुधवार) के बाद अब और समय नहीं दिया जाएगा।

न्यायालय ने पहले कहा था कि सुनवाई 17 अक्टूबर को पूरी हो जाएगी। बाद में इस समय सीमा को एक दिन पहले कर दिया गया। प्रधान न्यायाधीश का कार्यकाल 17 नवंबर को समाप्त हो रहा है। उल्लेखनीय है कि संविधान पीठ ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला- के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई की है।



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रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद: आज से आखिरी दौर की सुनवाई, अयोध्या में धारा 144 लागू

14 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

अयोध्या की राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में आज यानी सोमवार से सुप्रीम कोर्ट में आखिरी दौर की सुनवाई शुरू हो रही है। इस सुनवाई के मद्देनजर अयोध्या में धारा 144 लागू कर दिया गया है तथा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। अयोध्या के डीएम अनुज कुमार झा ने बताया कि धारा 144 से जिले में 10 दिसंबर तक लागू रहेगा

इसके अलावा धारा 144 पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि दिवाली, चेहलम और कार्तिक मेले के दौरान भी यह निषेधाज्ञा लागू रहेगी। जिले में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है। आपको बता दें कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 17 अक्टूबर से पहले राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुनवाई खत्म करने की बात की थी। उम्मीद है कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के रिटायर होने से पहले निर्णय भी आ जाएगा।



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कश्मीर में आज दोपहर से बजीं फोन की घंटियां, इंटरनेट पर लगी रहेगी पाबंदी

14 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

जम्मू एवं कश्मीर में आज दोपहर 12 बजे से मोबाइल फोन की घंटियां बजनी शुरू हो गई। करीब 70 दिनों बाद आज से 40 लाख से ज्यादा मोबाइल पोस्टपेड सेवाएं बहाल की गई। राज्य सरकार ने दो दिन पहले पोस्टपेड सेवाओं पर पाबंदी हटाने का फैसला लिया था। सोमवार से मोबाइल पोस्टपेड सेवाएं बहाल कर दी गई।गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में पिछले पांच अगस्त से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद एहतियातन सरकार ने फोन और इंटरनेट सेवा पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद हालात सामान्य होने पर पिछले महीने सरकार ने टेलीफोन के सभी एक्सचेंज चालू कर दिए थे और लैंडलाइन सेवाओं को बहाल कर दिया था। प्राप्त जानकारी अनुसार घाटी में 66 लाख मोबाइल उपभोक्ता हैं जिनमें से तकरीबन 40 लाख उपभोक्ताओं के पास पोस्ट पेड सुविधा है। इंटरनेट सुविधा की बहाली पर हालांकि कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। घाटी में पांच अगस्त से इंटरनेट सेवाएं भी बंद हैं।



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आतंकियों पर अब तक किया वार, अबकी बार विचारधारा पर होगा प्रहार: अजीत डोभाल

14 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने जम्मू कश्मीर में आतंक के खिलाफ लड़ाई में राष्ट्रीय जांच एजेंसी के योगदान को रेखांकित किया। अजीत डोभाल ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर जोर देत हुए कहा कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। नई दिल्ली में एनआईए से जुड़े एक कार्यक्रम में अजित डोभाल ने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपने सिस्टम का हिस्सा बना लिया है, जिसका इस्तेमाल वह भारत के खिलाफ कर रहा है। डोभाल ने कहा कि हम आतंकियों को खत्म करने में सफल हो रहे हैं, लेकिन अब हमारा अगला निशाना आतंकियों की विचारधारा को खत्म करना है।

एनएसए ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर जोर देत हुए कहा कि आतंकवाद पर कई बार बातें हुई हैं, हर कोई आतंक के खिलाफ 3 दशक से लड़ रहा है। आतंकवाद से लड़ना हर किसी की सोच में है, लेकिन आप आतंकवाद से सीधा नहीं लड़ते हैं क्योंकि आप सिर्फ आतंकियों को मारकर, हथियारों को खत्म कर, फंडिंग को रोकने पर ध्यान लगा रहे हैं और इसे ही लड़ाई का हिस्सा मान रहे हैं। सबसे पहले जानना जरूरी है कि आतंकी कौन है, उसे पैसा कहां से मिल रहा है, कौन उसकी मदद कर रहा है। डोभाल ने कहा कि पाकिस्तान पर सबसे बड़ा दवाब फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स की कार्यवाही का है। इसने पाकिस्तान पर इतना दवाब बनाया है शायद कोई अन्य कार्रवाई नहीं कर सकता था।



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अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था फिर भी मैं कुछ नहीं बोला: संजय निरुपम

14 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

कांग्रेस की मुंबई इकाई के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम ने स्पष्ट कर दिया कि वह पार्टी को छोड़ने वाले नहीं हैं। बीते दिनों यह अटकलें लगाई जा रही थी कि पार्टी आलाकमान से नाराज चल रहे निरुपम जल्द ही पार्टी को बड़ा झटका दे सकते हैं। इस घटनाक्रम की शुरुआत उस वक्त हुई थी जब संजय निरुपम ने ट्वीट करके पार्टी के प्रति अपनी नाराजगी सभी के सामने रखी थी।

संजय निरुपम ने कहा था कि मैंने विधानसभा चुनाव के लिए मुंबई में सिर्फ एक नाम की सिफारिश की थी। सुना है कि इसे भी खारिज कर दिया गया है। जैसा कि मैंने पहले पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दी थी ऐसी स्थिति में मैं चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं बनूंगा और यह मेरा अंतिम निर्णय है।

संजय निरुपम इतने में ही नहीं रुके थे उन्होंने बाद में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा था कि कांग्रेस अब जमीनी स्तर पर प्रतिक्रिया नहीं ले रही है और राज्य के प्रभारी एआईसीसी महासचिव को काफी प्रभावशाली बना दिया गया है।निरुपम ने कहा था कि उन्हें ‘दरकिनार’ कर दिया गया है जबकि उन्होंने चार वर्षों तक पार्टी की मुंबई इकाई का अध्यक्ष पद संभाला था। उन्होंने अपनी नाराजगी सभी के सामने साझा करते हुए कहा था कि मुझे विधानसभा चुनाव प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं दी गई। मेरे लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ही (विधानसभा) टिकट के बंटवारे के दौरान मेरे विचारों पर ध्यान नहीं दिया गया।एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में संजय निरुपम ने यह स्पष्ट कर दिया कि चाहे पार्टी नेताओं के प्रति कितनी भी नाराजगी क्यों न हो, वह कांग्रेस नहीं छोड़ने वाले। संजय निरुपम ने आगे कहा कि मैं कांग्रेस को नहीं छोड़ रहा हूं। बाकी पार्टी चाहे तो मेरे खिलाफ कोई भी फैसला ले सकती है।

इसी बीच निरुपम ने दूसरी पार्टियां ज्वाइन करने की अफवाहों को दरकिनार करते हुए कहा कि मैं किसी और पार्टी में नहीं जाना चाहता हूं। इसी बीच उन्होंने अध्यक्ष पद से हटाए जाने पर भी चुप्पी तोड़ी और कहा कि लोकसभा चुनाव के दरमियां मुझे प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया लेकिन मैं चुप रहा।



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चुनाव प्रचार में नये तेवर के साथ उतरे राहुल गांधी पर मुद्दे वही पुराने हैं

14 Oct 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

लोकतंत्र और चुनाव एक दूसरे के पूरक हैं और नेता के बगैर चुनाव की संभावना बेहद कम होती है। लोकतंत्र में चुनाव के मौके पर एक पार्टी के नेता दूसरी पार्टी के नेताओं पर हमलावर रहते हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के दो राज्यों में चुनाव हैं। महाराष्ट्र और हरियाणा में राजनीतिक दल अपने प्रचार-प्रसार को लेकर बेहद ही सक्रिय हैं। सभी पार्टियां अपने-अपने बड़े नेताओं के जरिए लोगों को लुभाने में लगी हैं। वर्तमान में देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर जैसे बड़े नेताओं के भरोसे है और सत्ता में वापसी की उम्मीद पाले है। वहीं देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस एक बार फिर गांधी नेहरु परिवार के भरोसे ही दिख रही है। हालांकि पार्टी के बड़े नेता भी चुनाव प्रचार में हैं पर प्रत्याशियों की मांग गांधी परिवार के सदस्य हैं। उम्मीदवार हों या फिर कार्यकर्ता, सभी चाहते हैं कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उनके लिए प्रचार करें। फिलहाल सोनिया अपनी सेहत की वजह से प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं। प्रियंका गांधी भी चुनाव प्रचार में जा सकती हैं। लेकिन मीडिया का कैमरा एक चेहरे को ढूंढ रहा था। काफी असमंजस की स्थिति के बाद अखिरकार रविवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी महाराष्ट्र के चुनाव प्रचार में उतरे। राहुल ने एक के बाद एक तीन रैलियां कीं और मोदी सरकार पर खूब बरसे। लेकिन एक बार फिर उनकी चुनावी भाषण में राफेल आ ही गया। कुछ दिन पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राफेल की शस्त्र पूजा की। इस पूजा के बाद एक बार फिर राफेल चुनावी मुद्दा बन गया है। लेकिन राहुल के एंट्री ने एक बात फिर से कहा जाने लगा कि राफेल को लेकर कांग्रेस अपनी स्टैंड बदलने वाली नहीं है। हालांकि यह बात पार्टी को अच्छे से पता है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को इससे काफी नुकसान हुआ था। फिर भी राहुल ने इस चुनाव में भी इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि एक बार फिर राहुल ने भाजपा को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ने का मौका दे दिया है। शायद भाजपा चाहती भी यहीं है। फिर विकास का मुद्दा कहीं पीछे छूट जाता है। हालांकि कांग्रेस राफेल की शस्त्र पूजा पर सवाल उठा कर पहले ही अपना राजनीतिक नुकसान कर चुकी है। भाजपा शस्त्र पूजा को हिन्दू संस्कृति से जोड़कर कांग्रेस पर हमलावर है। राहुल ने भले ही इस बार चौकीदार चोर है का नारा नहीं दिया है पर राफेल को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे रहे हैं। मुंबई के चांदिवली विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा कि ऐसा लगता है कि राफेल सौदा अब भी भाजपा को परेशान कर रहा है। अगर नहीं कर रहा तो राजनाथ सिंह पहला लड़ाकू विमान ग्रहण करने के लिये फ्रांस क्यों गए? उन्होंने कहा कि रक्षा अधिकारियों ने भी दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राफेल लड़ाकू विमान सौदे में दखल दे रहे हैं। इस सच से कोई नहीं भाग सकता, ना तो नरेंद्र मोदी, ना ही अमित शाह और ना ही भाजपा। एक दिन सच उन्हें पकड़ेगा। राहुल ने कहा कि हर कोई जानता है कि राफेल सौदा विवादास्पद था और ‘‘कुछ रिश्वत दिए गए थे।’’ सौदा अभी भी (भाजपा को) परेशान कर रहा। इसी कारण से हमारे रक्षा मंत्री पहला लड़ाकू विमान लेने फ्रांस गए थे। अब तक कोई भी इस तरह लड़ाकू विमान लेने आपूर्ति करने वाले देश नहीं गया था। राहुल के ये आरोप भाजपा को इसके मजबूत पक्ष को लोगों के समक्ष एक बार फिर रखने का बड़ा मौका दे रहे हैं। तभी तो अपनी हर रैली में भाजपा के बड़े नेता राफेल का जिक्र कर कांग्रेस से सवाल करते हैं। हां, एक बात जो राहुल के चुनावी प्रचार में सुनाई नहीं दी वद थी 'चौकीदार चोर है' का नारा। राहुल ने भी प्रधानमंत्री के लिए अपने बयाने में वैसी कटुता नहीं दिखाई जो लोकसभा चुनाव के समय देखने को मिलती थी। राहुल ने अपने भाषण में रोजगार, अर्थव्यव्स्था और PMC का भी मुद्दा उठाया और सरकार से कई सवाल पूछे पर अब सबसे ज्यादा चर्चा राफेल पर होगी। राहुल ने अगर ये राग फिर से छेड़ा है तो भाजपा उसे चुनावी रंग में जरूर भिगोएगी। अपने अंर्तकलह से जूझ रही कांग्रेस के राहुल के प्रचार में लोटने से उम्मीदें तो बहुत हैं पर भाजपा की चनौती से वे कैसे निपटेंगे, इसको लेकर आशंका के बादल कायम हैं। यह तमाम आरोप वहीं है जो राहुल लोकसभा चुनाव के समय में भी मोदी सरकार पर लगाते रहे हैं पर वहां मुंह की खानी पड़ी थी। कांग्रेस अध्यक्ष के पद से हटने के बाद राहुल की राजनीतिक समझ और गंभीरता पर भी सवाल उठ रहे है। चुनावी तैयारियों के बीच उनका विदेश दौरा भी विरोधियों को सवाल दागने का एक अच्छा मौका दे गया है। भाजपा भी राहुल के चुनाव प्रचार में उतरने को लेकर मजे ले रही है। तभी तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार अभियान के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी का मतलब है कि भाजपा ‘‘100 प्रतिशत’’ जीतने जा रही है। खैर अब देखना यह है कि राहुल कांग्रेस की नैया को पार लगाने में कामयाब हो पाते हैं या फिर एक बार फिर उन्हें करारी शिकस्त का सामना करना पड़ेगा।



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