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BS येदियुरप्पा सरकार को मिली बड़ी राहत, छह सीटें जीतने के साथ ही हासिल किया बहुमत

09 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

बेंगलुरु। कर्नाटक में सत्तारूढ़ भाजपा ने उपचुनावों में छह सीटें जीतकर विधानसभा में सोमवार को बहुमत हासिल कर लिया। वह छह अन्य सीटों पर आगे भी चल रही है। कर्नाटक विधानसभा उपचुनावों के लिए मतगणना अभी चल रही है। महाराष्ट्र में सरकार न बना पाने के बाद कर्नाटक में भाजपा का 12 सीटों पर अच्छा प्रदर्शन उसके लिए मनोबल बढ़ाने वाला है।झारखंड में एक चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के प्रदर्शन की तारीफ की और कांग्रेस पर पिछले दरवाजे से जनादेश को चुराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हाल में संपन्न हुए उपचुनावों में कांग्रेस को सबक सिखाया गया है। इस बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने कहा कि वह अपने बाकी के साढ़े तीन साल के कार्यकाल के लिए स्थिर और विकासोन्मुख सरकार देंगे।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘मतदाताओं ने अपना फैसला दे दिया और नतीजे आ चुके हैं। अब हमें राज्य के विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। मैं अपने मंत्रियों और विधायकों की मदद से अगले तीन साल के लिए सुशासन दूंगा।’’ उन्होंने अपना कार्यकाल निर्बाध रूप से पूरा करने के लिए विपक्ष का समर्थन मांगा।येदियुरप्पा ने कहा, ‘‘विपक्ष लोगों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहा है। मैं उनसे अपील करता हूं कि कम से कम अब से अपना पूरा समर्थन हमें दें। हमने विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिये गए सभी विधायकों को आश्वासन दिया था कि उन्हें मंत्री बनाया जाएगा।’’मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इसलिए उनसे वादाखिलाफी करने का कोई सवाल ही नहीं है। हम उन्हें मंत्री बनाएंगे।’’ पूर्व के चुनाव में इन 15 सीटों में से 12 सीटें जीतने वाली कांग्रेस केवल दो निर्वाचन क्षेत्रों हुनसुर और शिवाजीनगर पर ही आगे चल रही है। पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा के नेतृत्व वाली जद(एस) उन सभी 12 सीटों पर पीछे चल रही है जहां उसने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। पूर्व में हुए चुनाव में उसके पास तीन सीटें थीं।होसकोटे से निर्दलीय उम्मीदवार शरथ बच्चेगौड़ा जीत की ओर बढ़ रहे हैं। भाजपा ने बच्चेगौड़ा के बगावत करके उपचुनाव लड़ने के बाद उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निष्कासित कर दिया। भाजपा की ओर से जीतने वाले छह उम्मीदवार अराबैल शिवराम हेब्बार (येल्लापुर), नारायण गौड़ा (के आर पेटे), बी सी पाटिल (हीरेकेरूर), श्रीमंत पाटिल (कागवाड), महेश कुमातली (अथानी) और के सुधाकर (चिक्काबल्लापुर) हैं। ये उपचुनाव 17 विधायकों को अयोग्य करार देने से पैदा हुई रिक्तियों को भरने के लिये हो रहे हैं। इन विधायकों में कांग्रेस और जद(एस) के बागी नेता शामिल थे। इन विधायकों की बगावत के चलते जुलाई में एच डी कुमारस्वामी नीत कांग्रेस-जद(एस) सरकार गिर गई थी और भाजपा के सत्ता में आने का मार्ग प्रशस्त हुआ। भाजपा को राज्य की सत्ता में बने रहने के लिए 225 सदस्यीय विधानसभा (अध्यक्ष सहित) में 15 सीटों (जिन पर उपचुनाव हो रहे हैं) में कम से कम छह सीटें जीतने की जरूरत थी।विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के बाद विधानसभा में इस समय 208 सदस्य हैं जिनमें भाजपा के पास 105 (एक निर्दलीय सहित), कांग्रेस के 66 और जद (एस) के 34 विधायक हैं। बसपा का भी एक विधायक है। इसके अलावा एक मनोनीत विधायक और विधानसभा अध्यक्ष हैं।

अगर भाजपा उन छह सीटों पर भी जीत दर्ज कर लेती हैं जिन पर वह आगे चल रही है तो सदन में पार्टी के सदस्यों की संख्या 105 से बढ़कर 117 हो जाएगी जो 223 सदस्यीय सदन में बहुमत के 111 के आंकड़े से अधिक है। उच्च न्यायालय में लंबित याचिका के कारण दो सीटें खाली हैं। भाजपा के जो विधायक आगे चल रहे हैं उनमें आनंद सिंह (विजयनगर), रमेश जारकिहोली (गोकाक), अरुण कुमार गुट्टूर (रानीबेन्नुर), गोपालैया (महालक्ष्मी लेआउट), एस टी सोमशेखर (यशवंतपुरा) और बायरती बसवराज (के आर पुरा) शामिल हैं।



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CAB भाजपा के घोषणापत्र का हिस्सा रहा है, शाह बोले- जनता ने दी है इसकी मंजूरी

09 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन विधेयक को ऐतिहासिक करार देते हुए सोमवार को कहा कि यह भाजपा के घोषणापत्र का हिस्सा रहा है तथा 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में देश के 130 करोड़ लोगों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाकर इसकी मंजूरी दी है। शाह ने लोकसभा में विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए रखते हुए कहा कि हम पूर्वोत्तर की स्थानीय संस्कृति एवं रीति रिवाज का संरक्षण करने के लिये प्रतिबद्ध हैं। गृह मंत्री ने कहा कि हम पूर्वेात्तर के लोगों का आह्वान करते हैं कि वे किसी उकसावे में नहीं आएं।उन्होंने कहा कि यह विषय हमारे घोषणापत्र में शामिल रहा है जो जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। शाह ने कहा कि क्या केवल नेता के चेहरे, परिवार के नाम पर चुनाव लड़ने चाहिए। शाह ने कहा कि यह विधेयक ऐसे लाखों करोड़ों लोगों को ‘नरक की यातना’ से निकालेगा जो पड़ोसी देशों से भारत आने पर मजबूर हुए और यहां उन्हें कोई भी अधिकार नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी के साथ अन्याय करने वाला नहीं, केवल न्याय करने वाला है। लोग 70 साल से इस न्याय का इंतजार कर रहे थे।

गृह मंत्री ने विपक्ष के सदस्यों के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि बार-बार अल्पसंख्यकों की बात हो रही है तो क्या बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए शरणार्थी अल्पसंख्यक नहीं हैं जो धार्मिक आधार पर यातनाएं सहने के कारण वहां से भारत आए। उन्होंने कहा कि संविधान सभा ने पंथ निरपेक्षता की बात कही थी, हम उसका सम्मान करते हैं और उसे आगे ले जाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि किसी के भी साथ धार्मिक आधार पर दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए।

शाह ने कहा कि घुसपैठियों और शरणार्थियों की अलग पहचान करना भी जरूरी है। गृह मंत्री ने कहा कि राशन कार्ड या किसी दस्तावेज के बिना भी शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सदस्य साबित कर दें कि विधेयक भेदभाव करता है तो मैं विधेयक वापस ले लूंगा।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन विधेयक सोमवार को लोकसभा में पेश किया गया जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन का पात्र बनाने का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि जहां बोलने की आजादी नहीं हो, असहमति को अपना दुश्मन मानते हों, देशद्रोह के मुकदमे बनते हों ...ये लोकतंत्र में कभी सुना नहीं हमने। इसलिए हम बार-बार कहते हैं लोकतंत्र देश में खतरे में है। सोच-समझकर कहते हैं। अब जनता को ये समझना पड़ेगा, जनता ये समझ भी रही है। महाराष्ट्र व हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम की ओर संकेत करते हुए गहलोत ने भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि उससे इनकी आंखें खुल जानी चाहिए।



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नागरिकता (संशोधन) विधेयक सोमवार को लोकसभा में होगा पेश

08 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पेश करेंगे जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। लोकसभा में सोमवार को होने वाले कार्यों की सूची के मुताबिक गृह मंत्री दोपहर में विधेयक पेश करेंगे जिसमें छह दशक पुराने नागरिकता कानून में संशोधन की बात है और इसके बाद इस पर चर्चा होगी और इसे पारित कराया जाएगा।इस विधेयक के कारण पूर्वोत्तर के राज्यों में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं और काफी संख्या में लोग तथा संगठन विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे असम समझौता 1985 के प्रावधान निरस्त हो जाएंगे जिसमें बिना धार्मिक भेदभाव के अवैध शरणार्थियों को वापस भेजे जाने की अंतिम तिथि 24 मार्च 1971 तय है। प्रभावशाली पूर्वोत्तर छात्र संगठन (नेसो) ने क्षेत्र में दस दिसम्बर को 11 घंटे के बंद का आह्वान किया है।

नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा बल्कि उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। यह विधेयक 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का चुनावी वादा था।भाजपा नीत राजग सरकार ने अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था और वहां पारित करा लिया था। लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में प्रदर्शन की आशंका से उसने इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया। पिछली लोकसभा के भंग होने के बाद विधेयक की मियाद भी खत्म हो गयी।



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दिल्ली अग्निकांड में 43 लोगों की मौत, इमारत मालिक को पुलिस ने हिरासत में लिया

08 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। दिल्ली की अनाजमंडी में रविवार को लगी आग के मामले में पुलिस ने इमारत के मालिक रेहान को हिरासत में ले लिया है। इस अग्निकांड में 43 लोगों की मौत हुई है। पुलिस ने उसपर भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) और धारा 285 (आग या ज्वलनशील पदार्थ के संदर्भ में लापरवाही) के तहत मामला दर्ज किया है।

दिल्ली अग्निशमन सेवा के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने की जानकारी सुबह पांच बजकर 22 मिनट पर मिली जिसके बाद दमकल की 30 गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा गया। उन्होंने बताया कि 150 दमकल कर्मियों ने बचाव अभियान चलाया और 63 लोगों को इमारत से बाहर निकाला। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रतीत होता है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। दमकल अधिकारियों ने बताया कि 43 श्रमिक मारे गए और दो दमकल कर्मी घायल हुए हैं।



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बलात्कार की घटनाओं को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- PM मौन हैं

08 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

देश के अलग-अलग हिस्सों में बलात्कार की विभिन्न घटनाओं को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए रविवार को आरोप लगाया कि कानून व्यवस्था चरमरा गई है लेकिन प्रधानमंत्री ‘‘मौन’’ हैं और उन्होंने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री मोदी का एक वीडियो भी ट्वीट किया है जिसमें वह दिल्ली में बलात्कार की घटनाओं को लेकर तत्कालीन कांग्रेस सरकार की आलोचना कर रहे हैं।सुरजेवाला ने एक ट्वीट किया कि उन्नाव, इटावा, हैदराबाद, पलवल-फरीदाबाद-चारों ओर से दरिंदगी की खबरें! बेटियां हाहाकर कर रही है और देश की आत्मा छलनी है। उन्होंने एक ट्वीट किया, ‘‘अपराधी खुले आम घूम रहे हैं क्योंकि कानून का शासन चरमराया हुआ है! लेकिन मोदी जी मौन हैं...पश्चाताप और गुस्से का एक शब्द भी नहीं। और कोई प्रधानमंत्री से सवाल नहीं भी करेगा? क्यों?’’दुष्कर्म की बढ़ रही घटनाओं पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय देश का मजाक बना रहा है और भारत अब ‘बलात्कार की राजधानी’ के रूप में जाना जाने लगा है।



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दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में लगी भीषण आग, 43 लोगों की मौत

08 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में रानी झांसी रोड पर अनाज मंडी स्थित एक फैक्ट्री में रविवार सुबह आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई। दिल्ली अग्निशमन सेवा के एक अधिकारी ने बताया कि आग लगने की जानकारी सुबह पांच बजकर 22 मिनट पर मिली जिसके बाद दमकल की 30 गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा गया। उन्होंने बताया कि आवासीय इलाके में चलाई जा रही फैक्ट्री में आग लगने के समय 50 से अधिक लोग थे/

पुलिस ने बताया कि हादसे में 35 लोग मारे गए हैं। दमकल के अधिकारियों ने बताया कि आग के कारण फंसे कई लोगों को बाहर निकालकर आरएमएल अस्पताल एवं हिंदू राव अस्पताल ले जाया गया है। इस घटना पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आग लगने की खबर मिली है। बचाव कार्य जारी है और दमकलकर्मी लोगों को बचाने की सर्वश्रेष्ठ कोशिश कर रहे हैं।

लोग महसूस कर रहे हैं बेबाक राहुल गांधी की कमी, बघेल बोले- जल्द से जल्द बनें अध्यक्ष

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को कहा कि राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद से लोग उनकी एक बेबाक नेता के तौर पर कमी महसूस कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें जल्द से जल्द फिर से पार्टी की कमान संभाल लेनी चाहिए।



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अग्निकांड को लेकर दिल्ली सरकार ने दिए जांच के आदेश, सात दिन के भीतर मांगी रिपोर्ट

08 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। दिल्ली सरकार ने अनाज मंडी क्षेत्र की एक फैक्ट्री में रविवार को लगी आग की घटना में जांच के आदेश देते हुए सात दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी है। दिल्ली के राजस्व मंत्री कैलाश गहलोत ने जिला मजिस्ट्रेट (मध्य) को जांच करने और सात दिन के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।राष्ट्रीय राजधानी में रानी झांसी रोड पर अनाज मंडी स्थित तीन मंजिला इमारत में रविवार सुबह आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई है और करीब 56 लोग घायल हुए हैं। इनमें अधिकतर मजदूर हैं।



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दिल्ली आग: केजरीवाल सरकार मृतको के परिजनों को देगी 10-10 लाख रुपए का मुआवजा

08 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में रानी झांसी रोड पर अनाज मंडी स्थित एक फैक्ट्री में रविवार सुबह आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई और कई लोग झुलस गए। इस घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घटनास्थल का दौरा किया। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार को हर मुमकिन मदद देने की बाद कही और मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं।केजरीवाल ने पूरी घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि यह बेहद दुखद और बहुत बड़ी घटना है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख का और जख्मियों को 1-1 लाख रुपए मुआवजा देने का एलान किया है। केजरीवाल ने कहा कि जख्मी लोगों के इलाज का पूरा खर्चा दिल्ली सरकार उठाएगी।

पुलिस ने बताया कि एक आवासीय इलाके में चल रही फैक्ट्री में आग लगने के समय 59 लोग अंदर थे। आग लगने की जानकारी सुबह पांच बजकर 22 मिनट पर मिली जिसके बाद दमकल के 30 वाहन घटनास्थल पर पहुंचे। फैक्ट्री में काम कर रहे लोगों के रिश्तेदार और स्थानीय लोग घटनास्थल की ओर भाग रहे थे। आग की चपेट में आए लोगों के परेशान परिवार विभिन्न अस्पतालों में अपने संबंधियों को खोज रहे थे। मृतकों और झुलसे लोगों को विभिन्न अस्पतालों में ले जाया गया है।



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नागरिकता संशोधन बिल को मोदी कैबिनेट की मंजूरी, कल संसद में होगा पेश

04 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

एनआरसी विवाद के बीच केंद्र की मोदी सरकार नागरिकता बिल को लेकर सक्रीय हो गई है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज इस पर मुहर लग गई है। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार इसे अगले सप्ताह तक संसद में पास कराने की तैयारी में है क्योकि सरकार की कोशिश इस बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पास करा लेने की होगी। यह सत्र 13 दिसंबर तक चलेगा। मंगलवार को पार्टी सांसदों की बैठक में भी राजनाथ सिंह ने सभी सदस्यों को संसद में उपस्थित रहने को कहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद गृह मंत्री अमित शाह इसे संसद में पेश करेंगे। हालांकि विपक्ष इस बिल का जोरदार विरोध कर रहा है।

नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करने के लिए संसद में नागरिकता विधेयक लाया गया था। ये विधेयक जुलाई, 2016 में केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किया गया था। इस विधेयक में भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों यानि की हिंदु, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइ धर्म के मानने वाले लोग भारत में हैं उन्हें बिना समुचित दस्तावेज के नागरिकता देने का प्रस्ताव है। कहने का मतलब यह है कि इस विधेयक में पड़ोसी देश से आए गैर-मुस्लिम धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी। इस विधेयक में उनके निवास के समय को 11 वर्ष के बजाय छह वर्ष करने का प्रावधान है। कहने का तात्पर्य यह है कि अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस विधेयक के बाद अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदल सकती है।



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मॉब लिंचिंग को लेकर कानून में बदलाव पर विचार विमर्श जारी, राज्यों से मांगे गए सुझाव: अमित शाह

04 Dec 2019 [ स.ऊ.संवाददाता ]

नयी दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि भीड़ हिंसा के बारे में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के प्रावधानों में बदलाव करने के बारे में एक समिति का गठन कर सभी संबद्ध पक्षों के साथ विचार विमर्श किया जा रहा है। शाह ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि इस बारे में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और राष्ट्रपति शासन वाले राज्यों के राज्यपालों को पत्र लिखकर सुझाव मांगे गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्यों से आपराधिक मामलों की जांच से जुड़े विशेषज्ञों और लोक अभियोजकों से इस विषय में सुझाव एकत्र कर अवगत कराने को कहा गया है।

अमित शाह ने कहा, ‘‘इसके साथ ही पुलिस शोध एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरएंडडी) के तत्वावधान में एक समिति का गठन किया गया है जो आईपीसी और सीआरपीसी में आमूल चूल बदलाव के लिये विचार कर रही है। सभी पक्षों के सुझाव मिलने के बाद हम कार्रवाई करेंगे तथा उच्चतम न्यायालय के फैसलों को भी ध्यान में रखा जायेगा।’’ भीड़ हिंसा को रोकने के लिये दो राज्यों की विधानसभा से विधेयक पारित होने तथा राष्ट्रपति के समक्ष विचारार्थ पेश किये जाने के बारे में पूछे गये एक अन्य पूरक प्रश्न के जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि मणिपुर और राजस्थान विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति द्वारा परामर्श की प्रक्रिया अभी चल रही है।

राय ने यह भी कहा कि आईपीसी में भीड़ हिंसा की अभी कोई परिभाषा तय नहीं है। उन्होंने कहा ‘‘इस मामले पर विचार विमर्श करने और सिफारिशें देने के लिए सरकार ने मंत्रियों का एक समूह गठित किया था जिसकी बैठक हो चुकी है। सरकार इस मामले से अवगत है।’’ द्रमुक के तिरुचि शिवा ने पूछा था कि भीड़ हिंसा रोकने के लिये मणिपुर और राजस्थान द्वारा पारित विधेयकों को राष्ट्रपति की अनुमति के लिये भेजा गया है, इसकी मौजूदा स्थिति क्या है। राय ने इसके जवाब में कहा, ‘‘मणिपुर और राजस्थान की विधानसभा द्वारा पारित दो विधेयक प्राप्त हुए हैं, जिन्हें राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखा गया है। इस प्रकार के विधेयकों की जांच केन्द्रीय मंत्रालयों के साथ परामर्श कर की जाती है। अभी इस पर परामर्श चल रहा है।’’ इस दौरान सभापति एम वेंकैया नायडू ने भीड़ हिंसा में समुदाय विशेष के लोगों को निशाना बनाये जाने की बात कुछ सदस्यों द्वारा सदन में उठाये जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा, ‘‘देश को बदनाम न करें और सदन में किसी समुदाय की बात न करें।’’



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